दिल्ली-एनसीआर

New Delhi: वायु प्रदूषण कम करने के लिए इनोवेशन चैलेंज का अगला चरण शुरू

Admindelhi1
11 March 2026 1:13 AM IST
New Delhi: वायु प्रदूषण कम करने के लिए इनोवेशन चैलेंज का अगला चरण शुरू
x
"अगले चरण में पहुंचा एयर पॉल्यूशन इनोवेशन चैलेंज"

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शुरू किए गए इनोवेशन चैलेंज ने अगले चरण में प्रवेश कर लिया है। इस पहल के तहत चुने गए 22 डिवाइसेज अब शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऑन-ग्राउंड ट्रायल के लिए तैयार किए जा रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इन डिवाइस को पहचाने गए प्रदूषण हॉटस्पॉट पर लगाया जाएगा ताकि पार्टिकुलेट प्रदूषण और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर पर इनके असर को वैज्ञानिक तरीके से मापा जा सके।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज इनोनोवेशन चैलेंज के अगले चरण की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान सिरसाने पिछले कई हफ्तों में हुई तैयारियों की समीक्षा की। इसमें टेस्टिंग प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देना, डिवाइस की उपलब्धता और तैयारी, तथा डिप्लॉयमेंट के लिए इनोवेटर्स के साथ समन्वय जैसे मुद्दे शामिल थे। सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ट्रायल “वैज्ञानिक रूप से मजबूत, पारदर्शी और ऐसे हों जो जल्दी निर्णय लेने में मदद करें कि राष्ट्रीय राजधानी के लिए सबसे बेहतर समाधान कौन-सा है।

देश भर से इस इनोवेशन चैलेंज में कुल 284 एंट्री प्राप्त हुई थीं, जिनमें से विशेषज्ञ तकनीकी समिति की स्क्रीनिंग के बाद 22 डिवाइस ट्रायल-रन चरण तक पहुंचे हैं। इनमें 13 सॉल्यूशन ऐसे हैं जो गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं, जैसे व्हीकल-माउंटेड एयर प्यूरीफायर, रेट्रोफिट एमिशन-कंट्रोल सिस्टम, बायो-अल्कलाइन एग्जॉस्ट स्क्रबर और बसों, ट्रकों तथा जेनसेट्स के लिए अन्य रेट्रोफिट टेक्नोलॉजी। बाकी 9 डिवाइस एम्बिएंट एयर के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनमें मॉड्यूलर और स्टैटिक एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम, डस्ट सप्रेशन यूनिट, स्मॉग-कंट्रोल टेक्नोलॉजी और अन्य सॉल्यूशन शामिल हैं, जिन्हें खुले स्थानों, रोड कॉरिडोर तथा इंडस्ट्रियल या कंस्ट्रक्शन जोन में इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है।

सिरसा ने हाल के हफ्तों में समिति और इनोवेटर्स द्वारा किए गए लगातार प्रयासों की सराहना की। समिति ने टेस्टिंग प्रोटोकॉल तैयार करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की, इनोवेटर्स के साथ नजदीकी संवाद किया, हर डिवाइस की तैयारी का आकलन किया और स्टैटिक तथा व्हीकल-आधारित सिस्टम की इंस्टॉलेशन के लिए आवश्यक जरूरतों की पहचान की। साथ-साथ स्टैटिक डिवाइस के लिए संभावित लोकेशन भी चिन्हित की जा रही हैं और मॉनिटरिंग, डेटा कलेक्शन तथा परफॉर्मेंस रिव्यू के साथ स्ट्रक्चर्ड ट्रायल-रन के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं।

सिरसा ने कहा कि यह इनोवेशन चैलेंज जमीन पर प्रदूषण कम करने वाले वास्तविक और मापने योग्य समाधान खोजने का एक मिशन है। जब ये 22 डिवाइस दिल्ली के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में ट्रायल के लिए लगाए जाएंगे, तब हमारा एक ही मानक होगा -सबूत। यानी कौन-सी टेक्नोलॉजी प्रदूषण में साफ और लगातार कमी दिखाती है और जिसे तेजी से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। इसमें मॉनिटरिंग को मजबूत करना, मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और साथ ही इस तरह के इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से नई टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन देना शामिल है।

सिरसा ने कहा कि दिल्ली एक ऐसा मॉडल बने जहां सख्त एनफोर्समेंट और इनोवेटिव सॉल्यूशन साथ-साथ आगे बढ़ें। जैसे ही इन ट्रायल के जरिए सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी की पहचान होगी, हम उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। ट्रायल चरण शुरू होने के साथ ही पर्यावरण विभाग और डीपीसीसी सभी डिवाइस से मिलने वाले परफॉर्मेंस डेटा पर करीबी नजर रखेंगे और समय-समय पर मंत्री स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। इन ट्रायल के नतीजे अंतिम विजेता सॉल्यूशन के चयन और दिल्ली की व्यापक क्लीन-एयर रणनीति में उनके उपयोग के रोडमैप को तय करने में मदद करेंगे।

Next Story