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New Delhi: एनएसए डोभाल ने यंग लीडर्स को बताया भारत का उज्जवल भविष्य

Admindelhi1
10 Jan 2026 1:31 PM IST
New Delhi: एनएसए डोभाल ने यंग लीडर्स को बताया भारत का उज्जवल भविष्य
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"यंग लीडर्स डायलॉग में एनएसए ने बढ़ाई युवाओं की हिम्मत"

नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल शनिवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ (वीबीवाईएलडी) के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए, जहां उन्होंने देशभर से आए युवाओं से सीधा संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के भविष्य, नेतृत्व की भूमिका, राष्ट्रीय शक्ति और युवाओं की जिम्मेदारी पर विस्तार से विचार रखे। डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है कि यदि यह रफ्तार बनी रही तो देश स्वतः ही विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।

युवाओं से संवाद की शुरुआत करते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि उनका कार्यक्षेत्र और अनुभव युवाओं से अलग है तथा उम्र का अंतर भी काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था और आज का भारत पूरी तरह बदला हुआ नजर आता है। इसके बावजूद एक बात आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी पहले थी—निर्णय लेने की क्षमता। डोभाल ने कहा कि जीवन की दिशा छोटे-बड़े फैसलों से तय होती है और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, फैसलों की जिम्मेदारी भी बढ़ती जाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का विकसित होना अब तय है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में जितने भी संघर्ष और युद्ध हो रहे हैं, उनका मूल कारण यही है कि कुछ देश अपनी इच्छा दूसरों पर थोपना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई देश शक्तिशाली है, तो वही वास्तव में स्वतंत्र रह सकता है। केवल हथियार या संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि आत्मविश्वास और मजबूत नेतृत्व सबसे बड़ी ताकत होती है। इस संदर्भ में उन्होंने नेपोलियन के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व साधारण जनसमूह को भी असाधारण बना सकता है।

अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में वैश्विक आर्थिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब जापान का उदय हो रहा था, तब पश्चिमी देशों में यह चर्चा शुरू हुई थी कि क्या कोई एशियाई देश पश्चिम से आगे निकल सकता है। इसी विषय पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने अध्ययन कर ‘विश्व अर्थव्यवस्था का इतिहास’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें पहली से उन्नीसवीं शताब्दी तक का विवरण है। इस पुस्तक के अनुसार लगभग 1700 वर्षों तक भारत और चीन विश्व अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करते रहे और दोनों मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा थे। डोभाल ने कहा कि भारत कभी विज्ञान, तकनीक और अर्थव्यवस्था के शिखर पर था, लेकिन पतन इसलिए हुआ क्योंकि कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती। राष्ट्र को मजबूत बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष और प्रयास आवश्यक होते हैं।

अपने भाषण के अंतिम हिस्से में एनएसए ने स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत उस दौर से बहुत अलग है, जब देश पराधीन था और हमारे पूर्वजों ने अपमान, अत्याचार और फांसी तक झेली। भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवन भर संघर्ष किया और महात्मा गांधी ने सत्याग्रह का मार्ग दिखाया। अनगिनत बलिदानों के बाद देश आज स्वतंत्र है। डोभाल ने कहा कि इतिहास हमें चुनौती देता है और आज के युवाओं में उस चुनौती का सामना करने का जोश है। उन्होंने कहा कि बदला शब्द भले ही कठोर लगे, लेकिन इसका अर्थ है अपने मूल्यों पर आधारित एक महान और शक्तिशाली भारत का पुनर्निर्माण करना।

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