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New Delhi: दिल्ली में औद्योगिक विकास और कारोबार सुगमता की पहल तेज

Admindelhi1
9 Sept 2026 11:38 AM IST
New Delhi: दिल्ली में औद्योगिक विकास और कारोबार सुगमता की पहल तेज
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पहलों को और तेज करेगी दिल्ली सरकार

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार रोजगार सृजन, उद्यमिता और दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने उद्योग विभाग, दिल्ली सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।

बैठक के दौरान दिल्ली के औद्योगिक और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने, निर्यात को बढ़ावा देने, एमएसएमई और कारीगरों को सहयोग प्रदान करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा सरकारी सेवाओं की तेज और अधिक प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करने से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों की समीक्षा की गई।

बैठक में मंत्री सिरसा ने प्रस्तावित दिल्ली औद्योगिक नीति 2026–2036 की प्रगति की समीक्षा की। यह नीति भविष्य के लिए तैयार, नवाचार-आधारित और टिकाऊ औद्योगिक इकोसिस्टम के विकास की परिकल्पना करती है। प्रस्तावित नीति में फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसीएस), डेटा सेंटर, अनुसंधान एवं नवाचार सेवाएं, स्वास्थ्य एवं मेडिकल वेलनेस, शहरी लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकोनॉमी, उद्योग-आधारित कौशल विकास, एमएसएमई आधुनिकीकरण और ग्रीन इंडस्ट्रीज जैसे कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है।

मंत्री ने प्रस्तावित दिल्ली स्टार्टअप नीति 2026–2031 की प्रगति की भी समीक्षा की। इस नीति का उद्देश्य दिल्ली को नवाचार और उद्यमिता के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस नीति में फिनटेक, अनुसंधान एवं विकास, आईटी एवं आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीपटेक, फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। समीक्षा के दौरान प्रस्तावित ‘गो-दिल्ली फाउंडेशन’ पर भी चर्चा की गई, जिसे दिल्ली सरकार के एक प्रमुख स्टार्टअप, नवाचार और व्यावसायीकरण संस्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

सिरसा ने व्यापक औद्योगिक सर्वेक्षण और यूनिफाइड इंडस्ट्री रजिस्ट्री के विकास से जुड़ी पहलों की भी समीक्षा की। इसके तहत औद्योगिक परिसरों की बेहतर पहचान और प्रभावी प्रबंधन के लिए डिजिटल एवं क्यूआर-कोड आधारित प्रणालियों के उपयोग का प्रस्ताव है।

बैठक में निर्यात संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके तहत विभिन्न जिलों में क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित करने, निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने तथा एक व्यापक दिल्ली राज्य निर्यात कार्ययोजना और जिला निर्यात कार्ययोजनाएं तैयार करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।

दिल्ली सिंगल विंडो सिस्टम की प्रगति की समीक्षा करते हुए सिरसा ने व्यवसायों और निवेशकों के लिए अनुमोदन एवं मंजूरियों की प्रक्रिया को और सरल तथा डिजिटल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सिस्टम के पुनर्विकास और विभिन्न प्रक्रियाओं के एकीकरण का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और व्यवसाय-अनुकूल बनाना है।

मंत्री ने उद्योग संवाद की तैयारियों की भी समीक्षा की। यह उद्योग परामर्श का एक प्रमुख मंच है, जिसका उद्देश्य सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा उद्योग संघों, निवेशकों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को अपने विचार एवं सुझाव रखने के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराना है। बैठक में दिल्ली राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस पुरस्कार का उद्देश्य उत्कृष्ट कारीगरों को सम्मानित करना तथा दिल्ली की समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं को बढ़ावा देना है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कारीगरों को अधिक पहचान, सम्मान और बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

समीक्षा के दौरान विनियमन में कमी से संबंधित कार्यों पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन संबंधी बोझ को कम करना, नियमों को सरल बनाना तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही प्रस्तावित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक और अन्य सुधारात्मक उपायों की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

समीक्षा बैठक के बाद सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार एक आधुनिक और रोजगारोन्मुखी औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ध्यान स्वच्छ एवं गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा देने, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, एमएसएमई को मजबूत करने और दिल्ली के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर है।

सिरसा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक योजना, कार्यक्रम और परियोजना स्पष्ट रूप से निर्धारित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़े। हमने संबंधित अधिकारियों को प्रगति की करीबी निगरानी करने और अनावश्यक देरी न होने सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकारी पहलों का लाभ जल्द से जल्द नागरिकों, उद्यमियों, निवेशकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।”

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