- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- लोकतंत्र की मजबूती पर...

x
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र की मजबूती को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार, पारदर्शी नौकरशाही और जिम्मेदार विपक्ष का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि सभी संवैधानिक संस्थाएं और राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार करते हैं। जोशी ने लोकतंत्र के संबंध में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की प्रसिद्ध परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की सरकार तभी मजबूत बनी रह सकती है, जब लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन किया जाए।
मुरली मनोहर जोशी ने यह टिप्पणी गुरुवार, 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित 21वें फिक्की उच्च शिक्षा सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में की। उनसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विपक्षी आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर सीधा आरोप लगाने के बजाय लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और सरकार तथा प्रशासनिक संस्थाओं को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए।
जोशी ने अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध लोकतांत्रिक विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा चुनी गई सरकार धरती से समाप्त नहीं होगी, बशर्ते लोकतंत्र की आवश्यक शर्तों का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए, सरकारों को जवाबदेह होना चाहिए और नौकरशाही के कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष का संवेदनशील और जिम्मेदार होना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष के पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए। उनके अनुसार, विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जनता के सामने नीतियों और कार्यक्रमों का विकल्प भी प्रस्तुत करना चाहिए। जोशी ने सभी राजनीतिक पक्षों को अपने दायित्वों का निर्वहन करने की आवश्यकता बताई।
पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था संविधान के दायरे में संचालित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उस मामले पर गौर करना चाहिए। जोशी के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारु रूप से बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों और संस्थागत जिम्मेदारियों का सम्मान जरूरी है।
मुरली मनोहर जोशी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्ष इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से संबंधित विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य रिकॉर्ड को अद्यतन करना और अमान्य प्रविष्टियों को हटाना है। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए हैं। विपक्ष ने दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी रखने की घोषणा की है। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोका और हिरासत में भी लिया था।
इन घटनाक्रमों के बीच मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र की चार प्रमुख आवश्यकताओं की बात कही। उन्होंने चुनावी निष्पक्षता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार बताया। इसके साथ सरकार की जवाबदेही, नौकरशाही की पारदर्शिता और विपक्ष की जिम्मेदारी पर समान रूप से जोर दिया। उनके बयान में यह बात प्रमुख रही कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी किसी एक संस्था या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़े पक्षों की है।
जोशी ने अपने बयान में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान के अनुरूप चलनी चाहिए। संविधान के उल्लंघन की स्थिति में न्यायपालिका की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले पर विचार किए जाने की बात कही।
वरिष्ठ भाजपा नेता का यह बयान केवल चुनाव आयोग से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने व्यापक लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी अपने विचार रखे। उनके अनुसार, जनता द्वारा चुनी गई सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता लोकतंत्र के महत्वपूर्ण तत्व हैं। यदि राजनीतिक दल और संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियों को समझकर काम करें तो लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जोशी ने नई शिक्षा नीति और छात्रों के आंदोलनों पर भी प्रतिक्रिया दी। नई शिक्षा नीति के परिणामों के बारे में उन्होंने कहा कि इसे लागू हुए अभी पर्याप्त समय नहीं हुआ है और इसके प्रभाव का मूल्यांकन करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि नीति के परिणाम आगे स्पष्ट होंगे।
छात्र आंदोलनों को लेकर उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं और जायज मांगों को संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने बल प्रयोग को समस्याओं का समाधान नहीं बताया और छात्रों के साथ संवाद करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकार और प्रशासन को विद्यार्थियों की चिंताओं को समझना चाहिए और उनकी बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच मुरली मनोहर जोशी की टिप्पणी ने लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों की चर्चा को प्रमुखता दी है। उन्होंने न तो अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया और न ही विपक्ष के आरोपों पर कोई स्पष्ट फैसला सुनाया। इसके बजाय उन्होंने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदार विपक्ष की आवश्यकता को रेखांकित किया।
जोशी ने दोहराया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी पक्षों का संविधान के दायरे में काम करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनावों के साथ सरकार, नौकरशाही और विपक्ष को भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उनके इस बयान का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरी संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्था का जिम्मेदार होना जरूरी है।
Next Story





