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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली पुलिस पर 3 महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न का आरोप
Ratna Netam
8 Oct 2026 5:20 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने इस मामले में मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने पुलिस कमिश्नर से दो सप्ताह के भीतर घटना से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। यह मामला 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला होगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में बताया गया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले में पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।आयोग ने स्पष्ट किया कि समाचार रिपोर्ट में वर्णित घटनाएं यदि सही साबित होती हैं, तो इससे नागरिकों के मानवाधिकारों और विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं। इसी आधार पर आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया।एनएचआरसी ने पुलिस आयुक्त से कहा है कि वह घटना से संबंधित सभी आवश्यक तथ्यों के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सामने आए आरोप
जानकारी के मुताबिक, 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे।प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों की तैनाती की गई थी। पुलिस ने इलाके में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका था।इसी दौरान प्रदर्शन की खबर जुटाने पहुंची तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत की। पत्रकारों का आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।यह मामला सामने आने के बाद महिला पत्रकारों की सुरक्षा और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपराध साबित होने की कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
क्राइम ब्रांच को सौंपी गई शिकायतों की जांच
दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को जानकारी दी थी कि नई दिल्ली जिला पुलिस को तीन महिला पत्रकारों की ओर से यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों को आगे की कार्रवाई के लिए कमला मार्केट स्थित दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी शिकायतें मिलने और उन्हें क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित किए जाने की पुष्टि की थी।दिल्ली पुलिस के अनुसार, शिकायतें 3 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति से संबंधित हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान प्रदर्शन स्थल के सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील भी की है, ताकि शिकायतों से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरोप लगाने वाली महिलाएं प्रदर्शन के दौरान पत्रकारिता से जुड़ी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभा रही थीं।पत्रकारों का काम सार्वजनिक घटनाओं और गतिविधियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक कार्यक्रम और कानून-व्यवस्था से संबंधित घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।विशेष रूप से महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आने पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।इस मामले को लेकर कई पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी विवाद
जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस ने कुछ मामलों में सरकारी आदेशों की अवहेलना और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज की।पुलिस का कहना था कि संबंधित इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से हटने के निर्देश दिए गए थे।वहीं, प्रदर्शन में शामिल कुछ संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और हिरासत में लिए जाने के दौरान अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए। इन आरोपों के बीच महिला पत्रकारों की शिकायतों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
NHRC ने दो सप्ताह के भीतर मांगा जवाब
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग के नोटिस का उद्देश्य घटना से संबंधित तथ्यों, शिकायतों और जांच की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करना है।आयोग ने अभी किसी पुलिसकर्मी को दोषी घोषित नहीं किया है। उसका कहना है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला होगा।मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान लेना इस मामले की संस्थागत समीक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पुलिस प्रशासन की ओर से की जा रही जांच और घटना से संबंधित तथ्यों की जानकारी आयोग के सामने प्रस्तुत की जाएगी।
अब पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट पर नजर
फिलहाल तीन महिला पत्रकारों की शिकायतों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी जा चुकी है। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।इस मामले में अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सामने आ सकती है। आयोग रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब जांच के नतीजों से स्पष्ट होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी।
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