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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास तथा वहां रहने वाले लोगों की प्रगति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं और विकास की नई संभावनाएं सामने आई हैं।
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने का फैसला लिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में पुनर्गठित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
केंद्र सरकार का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में केंद्र के कई कानून लागू हो सके, जिससे विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिली। सरकार के अनुसार, इससे सामाजिक और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा हुए हैं।
अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था। इसके तहत राज्य के लिए अलग संवैधानिक प्रावधान और कई विशेष अधिकार मौजूद थे। केंद्र सरकार के फैसले के बाद इन प्रावधानों में बदलाव किया गया और जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों के समान संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत लाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आए हैं। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसरों, बेहतर सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को सरकार की प्राथमिकता बताया।
केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में निवेश बढ़ाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में सड़क, रेल, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है।
वहीं, राजनीतिक स्तर पर अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ राजनीतिक दलों ने केंद्र के फैसले का विरोध किया था और इसे जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया था। दूसरी ओर, केंद्र सरकार इसे विकास और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बताती रही है।
लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद वहां भी प्रशासनिक और विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए विशेष योजनाओं के माध्यम से विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अनुच्छेद 370 हटने की सातवीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री का संदेश केंद्र सरकार की उस नीति को दोहराता है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को विकास के प्रमुख केंद्रों के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए काम जारी रहेगा।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल बाद भी यह फैसला भारतीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार इसे बदलाव और विकास की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि विपक्षी दल इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते रहे हैं।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी के बयान के साथ एक बार फिर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भविष्य, विकास और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।





