- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- ब्रिक्स मंच से मोदी ने...

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए दुनिया को प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक इस्तेमाल को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को किसी देश पर दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया तो इससे साझा प्रगति और समृद्धि की राह बाधित होगी। वैश्विक विकास को समावेशी बनाने के लिए आवश्यक है कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और जरूरी संसाधनों तक सभी देशों की न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित की जाए।
रविवार को आयोजित इस सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत विभिन्न देशों के नेता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भू-राजनीतिक तनाव, महामारी, जलवायु आपदाएं और आपूर्ति शृंखला में रुकावटें किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। इनका असर सामान्य लोगों, उद्योगों, किसानों और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को अपनी प्राथमिकताओं में रखा। समूह ने तकनीकी विकास को कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित रखने के बजाय इसे समावेशी बनाने पर जोर दिया है। मोदी के अनुसार आधुनिक तकनीक का उद्देश्य असमानता बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन आसान बनाना और विकास के अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए।
महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति का मुद्दा हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में आया है। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे संसाधनों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों, दूरसंचार और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में होता है। इन संसाधनों का उत्पादन और प्रसंस्करण कुछ देशों तक सीमित होने के कारण आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है। प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी को इसी वैश्विक चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है।
मोदी ने विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति शृंखला बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महामारी और जलवायु आपदाओं जैसी परिस्थितियों ने दिखाया है कि एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच परिवहन, भंडारण, व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
प्रधानमंत्री ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। इस कोष के माध्यम से ऐसी तकनीकी परियोजनाओं और स्टार्टअप को समर्थन देने की बात कही गई जो आम लोगों की समस्याओं के किफायती और व्यापक समाधान तैयार कर सकें। भारत का कहना है कि स्टार्टअप केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और पर्यावरण की चुनौतियों का समाधान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के लिए मोदी ने ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर का सुझाव दिया। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक तकनीक, मौसम संबंधी आंकड़ों और डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार किया जा सकेगा। यह व्यवस्था खेती की लागत कम करने, फसलों की निगरानी, मौसम के जोखिम का पूर्वानुमान और बाजार तक किसानों की पहुंच सुधारने में सहायक हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की भी घोषणा की। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संक्रामक बीमारियों से संबंधित सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान करना और संभावित स्वास्थ्य संकट के लिए पहले से तैयारी करना है। कोविड महामारी का उल्लेख किए बिना उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए समय पर जानकारी और सामूहिक कार्रवाई बेहद जरूरी है।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के लिए साझा दिशा-निर्देश तैयार करने की पहल की गई है। सदस्य देशों के अनुभव, तकनीकी क्षमता और राहत संसाधनों को साझा करने से भूकंप, बाढ़, चक्रवात और जंगल की आग जैसी आपदाओं में तेज प्रतिक्रिया संभव हो सकती है। मोदी ने कहा कि संकटों का प्रभाव सीमाओं को नहीं पहचानता, इसलिए उनका समाधान भी सामूहिक सहयोग से ही निकाला जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को केवल सरकारों के बीच बैठकों का मंच बनाए रखने के बजाय नागरिकों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्यमियों, किसानों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। कौशल विकास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और छोटे उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करके ब्रिक्स को लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जोड़ा जा सकता है।
सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के लिए चीन के नेतृत्व में एक ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने व्यापार, वित्त, प्रौद्योगिकी और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की भी बात कही। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और सदस्य देशों के बीच आर्थिक समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया।
ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, सीमापार भुगतान प्रणाली मजबूत करने और खाद्य तथा ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग का समर्थन किया गया। संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी दोहराई गई। पश्चिम एशिया और सूडान में जारी संघर्षों पर चिंता जताते हुए तनाव कम करने का आह्वान किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों का ब्रिक्स पर विश्वास बढ़ा है क्योंकि यह समूह उनकी आवाज और चिंताओं को महत्व देता है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि संसाधनों तथा तकनीक पर नियंत्रण का इस्तेमाल प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं होना चाहिए। सम्मेलन के समापन पर भारत ने ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन को सौंप दी। सम्मेलन में प्रधानमंत्री के संबोधन और प्रमुख प्रस्तावों की जानकारी दी है।





