दिल्ली-एनसीआर

ब्रिक्स की शाकाहारी थाली पर छिड़ी सियासी जंग

Kavita2
14 Sept 2026 10:26 AM IST
ब्रिक्स की शाकाहारी थाली पर छिड़ी सियासी जंग
x

दिल्ली : ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में आयोजित आधिकारिक रात्रिभोज का मेन्यू अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों के सम्मान में शनिवार को दिए गए रात्रिभोज में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे गए थे। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर अपनी भोजन संबंधी पसंद विदेशी मेहमानों पर थोपने और भारत की बहु-व्यंजन संस्कृति के एक महत्वपूर्ण हिस्से को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि सम्मेलन की सफलता से निराश विपक्ष के पास आलोचना के लिए अब खाने की थाली के अलावा कोई मुद्दा नहीं बचा है।

विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई। राहुल ने लिखा कि रिकॉर्ड के लिए बता दें कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी भोजन बेहद स्वादिष्ट होता है। उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी द्वारा बनाए गए छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की। हालांकि राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सीधे ब्रिक्स रात्रिभोज का उल्लेख नहीं किया, लेकिन इसे सम्मेलन में परोसे गए पूर्ण शाकाहारी मेन्यू की पृष्ठभूमि में देखा गया।

इसके बाद कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ब्रिक्स रात्रिभोज के मेन्यू की तस्वीर साझा करते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की अपनी भोजन संबंधी पसंद देशवासियों पर थोपने की आदत पहले से ही गंभीर समस्या है और अब इसे दुनिया के अलग-अलग देशों से आए गणमान्य अतिथियों तक पहुंचा दिया गया है। खेड़ा ने सवाल किया कि भारत समृद्ध, विविध और बहु-व्यंजन संस्कृति वाला देश है, जहां कई प्रकार के प्रसिद्ध मांसाहारी व्यंजन भी बनाए जाते हैं। इसके बावजूद आधिकारिक रात्रिभोज में इस विविधता का वह हिस्सा क्यों नहीं दिखाया गया।

कांग्रेस की तरफ से यह भी पूछा गया कि क्या सरकार भारत की भोजन संबंधी विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने से बच रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि किसी राजकीय भोज का मेन्यू केवल खानपान का विषय नहीं होता, बल्कि उसके माध्यम से मेजबान देश की संस्कृति, परंपरा और विविधता भी विदेशी अतिथियों के सामने रखी जाती है। कांग्रेस के मुताबिक भारत की खाद्य संस्कृति को केवल शाकाहारी व्यंजनों तक सीमित करके प्रस्तुत करना उसकी पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को अनावश्यक और छोटी राजनीति करार दिया। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जब विपक्ष के पास ब्रिक्स सम्मेलन की आलोचना करने के लिए खाने के मेन्यू के अलावा कुछ नहीं बचता तो यह बताता है कि सम्मेलन कितना सफल रहा। भाजपा ने कहा कि रात्रिभोज में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की शाकाहारी परंपराओं को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया गया था। मेन्यू को विदेशी मेहमानों के सामने भारत की समृद्ध पाक विरासत, पोषण और टिकाऊ खाद्य प्रणाली को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विवाद पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि भारतीय शाकाहारी भोजन पोषक होने के साथ विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं से समृद्ध है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर एक बड़े कूटनीतिक आयोजन को भोजन संबंधी बहस तक सीमित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कांग्रेस ने इन उपलब्धियों को छोड़कर रात्रिभोज के मेन्यू को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

ब्रिक्स गाला डिनर के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए मेन्यू में भारत के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक स्वादों को शामिल किया गया था। शुरुआत खांडवी मिले-फ्यू और खुंब गलौटी से हुई। खांडवी को केसर आम, माइक्रोग्रीन्स और दही की ड्रेसिंग के साथ परोसा गया, जबकि खुंब गलौटी में मशरूम कबाब को शीरमाल के साथ प्रस्तुत किया गया था।

मुख्य व्यंजनों में पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, कैरट बीन पोरियाल और ठक्काली बेले सारू शामिल थे। इसके अलावा मेहमानों को मिलेट पुलाव, चुकंदर का रायता और विभिन्न प्रकार की भारतीय रोटियां परोसी गईं। मिठाई में पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी और शहतूत फिरनी रखी गई थी। पेय पदार्थों में अनार का रस और नारियल पानी शामिल था।

मेन्यू में मोटे अनाज यानी श्रीअन्न को विशेष स्थान दिया गया। मिलेट पुलाव में बाजरा, रोटियों में ज्वार और मिठाई में दूसरे प्रकार के मोटे अनाज का इस्तेमाल किया गया। मेन्यू कार्ड पर मोटे अनाज की पौष्टिकता, कम संसाधनों में उत्पादन और जलवायु अनुकूलता का भी उल्लेख था। सरकार लंबे समय से मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने की कोशिश कर रही है। इसी कारण ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच के रात्रिभोज में श्रीअन्न को प्रमुखता देना खाद्य कूटनीति का हिस्सा माना गया।

रात्रिभोज के साथ ‘ब्रिक्स सिम्फनी’ नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। इसमें भारत और अन्य सदस्य देशों के लगभग 160 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। भारतीय कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता दिखाई। पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया।

कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद अब इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि आधिकारिक भोज में मेन्यू तय करना मेजबान सरकार का सामान्य अधिकार है या ऐसे अवसरों पर देश की सभी प्रमुख खानपान परंपराओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। राहुल गांधी का “80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी” वाला आंकड़ा भी राजनीतिक बहस में शामिल हो गया है। इस आंकड़े के स्रोत का उल्लेख उनकी पोस्ट में नहीं था, इसलिए इसे राहुल गांधी के दावे के रूप में ही प्रकाशित करना उचित होगा।

ब्रिक्स सम्मेलन की कूटनीतिक उपलब्धियों के बीच खाने की थाली पर शुरू हुआ यह विवाद भारतीय राजनीति में भोजन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी पुरानी बहस को एक बार फिर सामने ले आया है। कांग्रेस इसे विविधता और प्रतिनिधित्व का मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा इसे सफल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से ध्यान हटाने की कोशिश करार दे रही है। विवाद से जुड़े कांग्रेस के बयानों की जानकारी दी है।

Next Story