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मनरेगा विवाद गरमाया जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को घेरा

Ratna Netam
1 Sept 2026 4:31 PM IST
मनरेगा विवाद गरमाया जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को घेरा
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दिल्ली : कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के लिए सबसे बड़ी सहारा बनी योजना को कमजोर कर दिया है। जयराम रमेश ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार देने वाली योजना नहीं थी बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा की लाइफलाइन थी, जिसे सरकार की नीतियों से नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पारदर्शिता और तकनीक के नाम पर ऐसे बदलाव किए हैं, जिनसे आम मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधार आधारित भुगतान प्रणाली, मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं ने कई गरीब श्रमिकों के लिए रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है।
मनरेगा को बताया ग्रामीण भारत की सुरक्षा कवच
जयराम रमेश ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत के गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम रहा है। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार का अधिकार मिला और संकट के समय लोगों को आय का सहारा मिला। उन्होंने दावा किया कि कोरोना महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में मजदूर शहरों से गांव लौटे थे, तब मनरेगा ने लाखों परिवारों को संभालने का काम किया था।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने न केवल रोजगार उपलब्ध कराया बल्कि गांवों में सड़क, तालाब, सिंचाई और अन्य विकास कार्यों को भी बढ़ावा दिया। कांग्रेस का कहना है कि इस योजना से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और कमजोर वर्गों के लोगों को काफी लाभ मिला है।
सरकार पर बजट कम करने का आरोप
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा के बजट को पर्याप्त महत्व नहीं देने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ग्रामीण बेरोजगारी के बीच योजना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका दावा है कि इससे मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी मिलने में परेशानी हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में मनरेगा के बजट और क्रियान्वयन को लेकर सरकार की नीतियों से मजदूरों की मुश्किलें बढ़ी हैं। कांग्रेस लगातार मांग करती रही है कि योजना के लिए अधिक धनराशि दी जाए और मजदूरी दर में वृद्धि की जाए।
आधार भुगतान प्रणाली पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य बनाकर कई मजदूरों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि तकनीकी दिक्कतों, बैंकिंग समस्याओं और दस्तावेजों की कमी के कारण कई श्रमिकों को भुगतान हासिल करने में परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब मजदूरों के लिए डिजिटल प्रक्रिया हमेशा आसान नहीं होती। ऐसे में सरकार को तकनीक लागू करने से पहले जमीनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव
मनरेगा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है। कांग्रेस इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाती है, जबकि बीजेपी समय-समय पर योजना में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने की बात करती रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार धीरे-धीरे मनरेगा को कमजोर कर रही है, जबकि बीजेपी का तर्क रहा है कि तकनीक और सुधारों के जरिए योजना में भ्रष्टाचार रोकने और बेहतर निगरानी की कोशिश की जा रही है।
गरीबों के मुद्दे पर विपक्ष आक्रामक
जयराम रमेश के बयान को कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी ग्रामीण रोजगार, महंगाई और मजदूरों के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार को घेर रही है। कांग्रेस का कहना है कि गरीब और ग्रामीण मजदूरों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को मजबूत करने की जरूरत है ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर रोजगार मिल सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनरेगा जैसे मुद्दे ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे असर डालते हैं, इसलिए आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बन सकता है। सरकार और विपक्ष दोनों ही ग्रामीण मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से उठा रहे हैं।
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