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राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनेगा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का स्मारक DUAC ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की स्मृति में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्मारक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। दिल्ली अर्बन आर्ट्स कमीशन (DUAC) ने राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मंजूरी के साथ ही कमीशन ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों को स्मारक की वास्तुकला, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और लैंडस्केपिंग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। आयोग ने कहा है कि प्रस्तावित स्मारक का स्वरूप राजघाट क्षेत्र में पहले से मौजूद अन्य स्मारकों के अनुरूप होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्मृति स्थल देश के प्रमुख नेताओं की स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रस्तावित स्मारक को भी आसपास के क्षेत्र की वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए विकसित करने पर जोर दिया गया है। DUAC की मंजूरी के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
कमीशन ने परियोजना अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि स्मारक का डिजाइन तैयार करते समय राजघाट क्षेत्र के मौजूदा स्वरूप का विशेष ध्यान रखा जाए। स्मारक की वास्तुकला ऐसी होनी चाहिए जिससे वह आसपास मौजूद अन्य स्मारकों से अलग-थलग नजर न आए। इसके साथ ही निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री के चयन में भी क्षेत्र की पहचान और गरिमा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
लैंडस्केपिंग पर भी विशेष ध्यान
स्मारक परिसर की लैंडस्केपिंग को भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। राजघाट और इसके आसपास का क्षेत्र हरियाली, खुले स्थान और सादगीपूर्ण स्मारक वास्तुकला के लिए जाना जाता है। ऐसे में प्रस्तावित स्मारक के आसपास विकसित किए जाने वाले हरित क्षेत्र को मौजूदा वातावरण के अनुरूप रखने की बात कही गई है।
DUAC की मंजूरी शहरी वास्तुकला और सार्वजनिक स्थानों के डिजाइन से जुड़े पहलुओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजधानी में महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं के डिजाइन और उनके आसपास के शहरी परिदृश्य के बीच संतुलन बनाए रखने में आयोग की भूमिका रहती है। इसी के तहत मनमोहन सिंह के स्मारक के प्रस्ताव पर विचार किया गया।
राजघाट के स्मारकों से रहेगा सामंजस्य
राष्ट्रीय स्मृति स्थल राजघाट क्षेत्र में स्थित है, जहां देश के कई प्रमुख नेताओं से जुड़े स्मारक मौजूद हैं। यही वजह है कि नए स्मारक के निर्माण में इस पूरे क्षेत्र के वास्तु चरित्र को ध्यान में रखने पर विशेष जोर दिया गया है। आयोग चाहता है कि नया निर्माण ऐतिहासिक और स्मृति स्थलों के बीच दृश्य संतुलन बनाए रखे।
निर्देशों के मुताबिक स्मारक के आर्किटेक्चर से लेकर निर्माण सामग्री और आसपास विकसित होने वाले लैंडस्केप तक में एकरूपता और सामंजस्य दिखाई देना चाहिए। परियोजना से जुड़े अधिकारी अब इन निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
देश के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह
डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकाल तक देश का नेतृत्व किया। अर्थशास्त्री के रूप में भी उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान रही। प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।
विशेष रूप से 1991 में केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में उनकी भूमिका भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए बड़े आर्थिक सुधारों से जुड़ी रही। आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया के दौरान किए गए सुधारों ने देश की आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव की नींव रखी। बाद में प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने यूपीए सरकार का नेतृत्व किया।
मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और केंद्रीय वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक अर्थशास्त्री, प्रशासक और राजनेता के रूप में रही।
मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी परियोजना
DUAC से प्रस्ताव को मंजूरी मिलना स्मारक निर्माण की प्रक्रिया में अहम चरण माना जा रहा है। हालांकि स्मारक का अंतिम स्वरूप कैसा होगा, निर्माण कार्य कब शुरू होगा और इसे पूरा करने की समयसीमा क्या होगी, इससे संबंधित विस्तृत जानकारी आगे परियोजना के विभिन्न चरणों के साथ स्पष्ट होगी।
परियोजना अधिकारियों को अब आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों को डिजाइन और निर्माण योजना में शामिल करना होगा। खास तौर पर स्मारक की ऊंचाई, निर्माण सामग्री, खुले स्थान, हरियाली और आसपास मौजूद स्मारकों के साथ उसके दृश्य संबंध जैसे पहलुओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय स्मृति स्थल को मिलेगी नई पहचान
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का प्रस्तावित स्मारक उनके सार्वजनिक जीवन और देश के प्रति योगदान की स्मृति से जुड़ा स्थान होगा। यहां आने वाले लोग उनके राजनीतिक और आर्थिक योगदान को याद कर सकेंगे। साथ ही यह स्मारक राष्ट्रीय स्मृति स्थल के मौजूदा परिसर का हिस्सा बनेगा।
DUAC द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद अब इस परियोजना से जुड़ी आगे की प्रशासनिक और निर्माण प्रक्रिया पर नजर रहेगी। आयोग ने साफ कर दिया है कि स्मारक के निर्माण में राजघाट क्षेत्र की गरिमा और स्थापत्य पहचान से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर प्रस्तावित यह स्मारक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अब परियोजना के डिजाइन और निर्माण से जुड़े अगले चरण पूरे होने के बाद स्मारक का विस्तृत स्वरूप सामने आएगा।





