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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में मंगलवार सुबह एक रिहायशी मकान में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी में एलईडी टीवी में धमाके के बाद आग लगने की बात सामने आई है। हालांकि, अन्य रिपोर्टों में चार्जिंग पर लगे इलेक्ट्रॉनिक खिलौने में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। आग लगने के दौरान मकान में मौजूद बुजुर्ग दंपती धुएं के बीच फंस गए। उम्र अधिक होने और चलने-फिरने में परेशानी के कारण दोनों के लिए तत्काल बाहर निकलना मुश्किल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। परिवार के सदस्यों ने दंपती को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह विवेक विहार फेज-1 स्थित एक रिहायशी मकान में हुई। दिल्ली अग्निशमन सेवा को सुबह करीब 8 बजकर 11 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। आग मकान की पहली मंजिल पर लगी थी। घर के अंदर मौजूद सामान में आग फैलने से काफी धुआं भर गया, जिससे वहां रह रहे लोगों के सामने बाहर निकलने की चुनौती पैदा हो गई।
घटना के दौरान बुजुर्ग दंपती मकान में मौजूद थे। उम्र संबंधी परेशानियों के कारण दोनों तेजी से चलने में असमर्थ थे। आग लगने के बाद घर में धुआं फैलने लगा, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई। ऐसे हालात में परिवार के सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।पुलिस के अनुसार, आग के धुएं के संपर्क में आने से बुजुर्ग दंपती की तबीयत प्रभावित हुई थी। उनकी पहचान 65 वर्षीय अनिल अरोड़ा और उनकी 60 वर्षीय पत्नी बीना अरोड़ा के रूप में हुई है। दोनों को उपचार के लिए पुष्पांजलि अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, अस्पताल में उपचार के बाद उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
आग लगने की सूचना के बाद स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद लोगों से घटना के बारे में जानकारी ली और दमकल विभाग के साथ राहत एवं बचाव व्यवस्था में सहयोग किया। दमकलकर्मियों ने मकान के प्रभावित हिस्से में लगी आग को बुझाने का अभियान शुरू किया।आग लगने के बाद घर में धुआं फैलना सबसे बड़ी चिंता का विषय था। बंद कमरों और सीढ़ियों में धुआं भरने से लोगों के लिए सुरक्षित रास्ते का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों के लिए ऐसी स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण होती है।
दिल्ली अग्निशमन सेवा की टीम ने आग पर नियंत्रण पाने के लिए आवश्यक उपकरणों का इस्तेमाल किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दमकलकर्मियों ने सुबह करीब 9 बजकर 45 मिनट तक आग पर काबू पा लिया। इसके बाद प्रभावित हिस्से में स्थिति का जायजा लिया गया।इस घटना के बाद आग लगने के वास्तविक कारण को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। प्रारंभिक विवरण में एलईडी टीवी में धमाका होने का दावा किया गया, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रॉनिक खिलौने में शॉर्ट सर्किट होने की आशंका व्यक्त की गई है। इसलिए फिलहाल आग की वजह को लेकर किसी एक कारण की अंतिम पुष्टि करना उचित नहीं होगा। तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग की शुरुआत किस उपकरण या विद्युत व्यवस्था से हुई थी।
घटना ने घरों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आज लगभग हर घर में एलईडी टीवी, मोबाइल चार्जर, सेट-टॉप बॉक्स, वाई-फाई राउटर और अन्य विद्युत उपकरण लगातार उपयोग किए जाते हैं। कई बार एक ही बिजली के बोर्ड पर अनेक उपकरण जोड़ दिए जाते हैं। यदि वायरिंग पुरानी हो या बिजली के उपकरण खराब हों, तो शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ सकता है।विद्युत सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, घरों में खराब तारों, ढीले प्लग और ओवरलोडेड सॉकेट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से असामान्य आवाज, धुआं या जलने की गंध आने पर उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा विद्युत उपकरणों को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां पर्याप्त हवा का आवागमन हो।
इस प्रकार की घटनाओं में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आग लगते ही लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास करें। यदि किसी कमरे में धुआं भर गया हो तो बिना तैयारी के उसके भीतर प्रवेश करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में तत्काल अग्निशमन सेवा को सूचना देनी चाहिए।बुजुर्गों के साथ रहने वाले परिवारों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है। जिन लोगों को चलने-फिरने में कठिनाई होती है, उनके कमरों से बाहर निकलने का रास्ता बाधारहित होना चाहिए। परिवार के सदस्यों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी आपात स्थिति में बुजुर्गों को जल्द सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके।
आग लगने की स्थिति में घबराहट के कारण कई बार लोग कीमती सामान निकालने के लिए वापस घर के अंदर जाने की कोशिश करते हैं। ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी अग्निकांड में सबसे पहले मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में रिहायशी मकानों में आग लगने की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को सामने लाती हैं। कई मकानों में सीमित स्थान, संकरी सीढ़ियां और बिजली के अनेक उपकरण होने के कारण आपात स्थिति में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है।विवेक विहार की इस घटना में राहत की बात यह रही कि परिवार के सदस्यों की तत्परता से बुजुर्ग दंपती को घर से बाहर निकाला जा सका। हालांकि, धुएं के संपर्क में आने के कारण दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा।
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