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दिल्ली-एनसीआर
मल्लू रवि बोले वोट का अधिकार छीनना लोकतंत्र के खिलाफ
Ratna Netam
7 Oct 2026 5:29 PM IST

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विपक्ष का विरोध बुधवार को भी जारी रहा। INDIA गठबंधन के सांसद दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। जंतर-मंतर पर करीब 300 विपक्षी सांसदों के जुटने की रिपोर्ट है।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि विपक्ष उन नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ रहा है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।
मल्लू रवि ने कहा, “हम भारत में लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं, वे अपने सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान के अधिकार से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा नहीं होना चाहिए कि कुछ नागरिकों को वोट देने का अधिकार मिले और कुछ नागरिक उससे वंचित रह जाएं।
कांग्रेस सांसद ने इस आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि भारत में दो श्रेणी के नागरिक नहीं हो सकते। उनके मुताबिक, मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और यदि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटता है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल राजनीतिक सवाल के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार से जुड़े विषय के रूप में उठा रहा है।
INDIA गठबंधन की ओर से पिछले दो दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज किया गया है। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था और राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था। विपक्ष ने उसी दिन SIR को वापस लेने, कथित रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रखी थी।
बुधवार को रणनीति बदलते हुए INDIA गठबंधन के सांसद जंतर-मंतर पहुंचे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से विपक्षी सांसदों के लिए बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। इसके बाद सांसद जंतर-मंतर की ओर बढ़े और वहां विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष की प्रमुख आपत्ति चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। INDIA गठबंधन ने मांग की है कि कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए नाम बहाल किए जाएं और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी हाल के दिनों में विवाद बढ़ा है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने का मुद्दा उठाया है। विपक्ष इसे संभावित मताधिकार से वंचित करने के रूप में पेश कर रहा है, जबकि चुनाव अधिकारियों का पक्ष रहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। इससे पहले लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाई थी। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न राजनीतिक और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों के कारण कई इलाकों में यातायात और आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
INDIA गठबंधन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत होने वाली कवायद बताता रहा है।
मल्लू रवि का बयान इसी व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस या INDIA गठबंधन की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन सभी नागरिकों की लड़ाई है जिनका मतदान का अधिकार प्रभावित होने का आरोप है। उन्होंने इसे “आजादी की लड़ाई” जैसा बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को समान रूप से मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि मतदाता का नाम हटाया जाता है तो उसे इसकी जानकारी, कारण और अपना दावा रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है। आयोग के अनुसार, गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने और पात्र मतदाताओं के सही विवरण दर्ज करने के लिए ऐसी प्रक्रिया की जाती है। ऐसे में विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष इस पूरे विवाद के दो अलग-अलग पहलू बने हुए हैं।
जंतर-मंतर पर बुधवार का प्रदर्शन यह दिखाता है कि SIR और मतदाता सूची का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रह सकता है। INDIA गठबंधन ने साफ संकेत दिया है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और कथित रूप से हटाए गए मतदाताओं के अधिकारों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा।
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