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NEET पेपर कांड में बड़ा खुलासा, खरीद-फरोख्त का मामला सामने

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में एजेंसी ने कहा कि यह मामला केवल परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और लाखों छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है।
सीबीआई ने अदालत के सामने तर्क रखा कि पेपर लीक जैसा अपराध देश की साख को नुकसान पहुंचाने वाला है। एजेंसी के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि लाखों छात्र अपनी मेहनत और भविष्य की उम्मीदों के साथ इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे मामलों से छात्रों का विश्वास प्रभावित होता है।
इस मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया है। इनमें डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे और लातूर स्थित आरसीसी क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर शामिल हैं। जांच एजेंसी ने अदालत से अपील की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत नहीं दी जानी चाहिए।
डॉ. मनोज शिरुरे की जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है। विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाने के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है। वहीं, शिवराज मोटेगांवकर की जमानत याचिका पर सीबीआई ने अपना जवाब अदालत में दाखिल कर दिया है।
सीबीआई का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक की पूरी साजिश कैसे तैयार की गई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और किस तरह से परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि पेपर लीक का असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन सभी छात्रों को नुकसान पहुंचाता है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में देशभर से लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में काफी उम्मीदें होती हैं। परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगते हैं।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपों की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा। एजेंसी का तर्क है कि जांच प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए आरोपियों को हिरासत में रखना जरूरी है।
पेपर लीक मामलों में जांच एजेंसियां अक्सर यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि इसमें शामिल लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है। इसके अलावा पैसे के लेन-देन, पेपर उपलब्ध कराने वाले लोगों और लाभ लेने वाले उम्मीदवारों की भूमिका की भी जांच की जाती है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की कार्रवाई लगातार जारी है। अदालत में चल रही सुनवाई के बीच अब सभी की नजर जमानत याचिकाओं पर आने वाले फैसले पर है। अगर अदालत आरोपियों को राहत नहीं देती है तो जांच एजेंसी को आगे की कार्रवाई के लिए और समय मिल सकता है।
सीबीआई का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना राष्ट्रीय महत्व का विषय है। इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा सकती। एजेंसी ने साफ संकेत दिया है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





