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women's आरक्षण-परिसीमन मुद्दे पर घमासान, खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

Ratna Netam
16 July 2026 6:22 PM IST
womens  आरक्षण-परिसीमन मुद्दे पर घमासान, खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
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New Delhi नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने यह पत्र संसद के मॉनसून सत्र से पहले लिखा है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से सभी दलों के साथ चर्चा कर आगे बढ़ने का आग्रह किया है।

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने इस साल मार्च और अप्रैल में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को कई बार पत्र लिखकर परिसीमन और उससे जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। हालांकि, उनके अनुसार केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। खरगे ने कहा कि अब मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार इस विधेयक के संशोधित स्वरूप को आगामी मॉनसून सत्र में दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है।

खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि सरकार द्वारा परिसीमन और अन्य संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को प्रस्तावों का अध्ययन करने और अपनी राय रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसे मुद्दों का प्रभाव देश की चुनावी व्यवस्था और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

क्या है संविधान (131वां) संशोधन विधेयक

संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य महिला आरक्षण को वर्ष 2029 से लागू करने और लोकसभा व विधानसभा सीटों के परिसीमन का रास्ता साफ करना था। इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या में संभावित बदलाव का प्रावधान भी इससे जुड़ा हुआ था।

यह विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। अब इसके संशोधित रूप को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी गुरुवार को कहा कि पार्टी परिसीमन विधेयक का विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर एकजुटता बनाए रखने का प्रयास करेगी।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि परिसीमन प्रक्रिया से कुछ राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अंतिम प्रस्ताव और रुख स्पष्ट होने के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी।

मॉनसून सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम और विपक्ष के साथ होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं।

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