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भारत की बड़ी कूटनीतिक पहल: SCO के सभ्यता संवाद मंच में पाकिस्तान समेत 10 देशों को न्योता

Kavita2
28 Oct 2026 10:29 AM IST
भारत की बड़ी कूटनीतिक पहल: SCO के सभ्यता संवाद मंच में पाकिस्तान समेत 10 देशों को न्योता
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नई दिल्ली। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक सहयोग और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सभी 10 सदस्य देशों को पहली बार आयोजित होने वाले 'सिविलाइज़ेशनल डायलॉग फोरम' यानी 'सभ्यता संवाद मंच' में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम का आयोजन 20 से 22 नवंबर 2026 तक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में किया जाएगा। खास बात यह है कि भारत ने इस आयोजन के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी निमंत्रण भेजा है। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद भारत के इस फैसले को बहुपक्षीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना, प्राचीन सभ्यताओं की विरासत को साझा करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।

1. पाकिस्तान समेत SCO के सभी सदस्य देशों को आमंत्रण

भारत की ओर से आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित संगठन के सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया गया है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को भी कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसका प्रतिनिधित्व कौन करेगा और मंत्री स्वयं भारत आएंगे या नहीं।

इस आयोजन में SCO सदस्य देशों के अलावा संवाद साझेदारों और पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की योजना है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुल 25 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इससे यह आयोजन केवल क्षेत्रीय सम्मेलन तक सीमित न रहकर एक व्यापक सांस्कृतिक मंच के रूप में सामने आ सकता है।

2. प्रधानमंत्री मोदी ने रखा था सभ्यता संवाद मंच का प्रस्ताव

सभ्यता संवाद मंच की शुरुआत का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान रखा था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच केवल राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक सहयोग को भी नई दिशा देना था।

इसके बाद संगठन के स्तर पर इस पहल को आगे बढ़ाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित SCO शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के दौरान घोषणा की थी कि भारत इस वर्ष के अंत तक पहले सभ्यता संवाद मंच की मेजबानी करेगा।

भारत इस मंच के जरिए साझा इतिहास, साहित्य, कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना चाहता है। आयोजन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहने की संभावना है।

3. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को निमंत्रण, कूटनीतिक हलचल तेज

भारत की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान को आमंत्रित किया जाना है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के चलते दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।

ऐसे माहौल में पाकिस्तान के वरिष्ठ मंत्री को भारत आने का निमंत्रण भेजना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निमंत्रण SCO के बहुपक्षीय कार्यक्रम का हिस्सा है और इसे भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों में बदलाव के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इससे पहले मई 2023 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए गोवा आए थे। वहीं, अक्टूबर 2024 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने SCO बैठक में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद की यात्रा की थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय संगठनों में भागीदारी और द्विपक्षीय संबंध दो अलग-अलग पहलू हैं। भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अपना कठोर रुख बनाए रखते हुए भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुपक्षीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकता है।

4. दिल्ली का ऐतिहासिक पुराना किला बन सकता है आयोजन का केंद्र

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक पुराना किला इस आयोजन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मेलन का उद्घाटन किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कार्यक्रम के अंतिम आयोजन संबंधी विवरण की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है।

पुराना किला भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का एकत्र होना आयोजन के सभ्यतागत उद्देश्य को विशेष महत्व दे सकता है।

इस मंच के माध्यम से भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त करेगा। साथ ही सदस्य देशों को भी अपनी सांस्कृतिक पहचान, विरासत और परंपराओं को साझा करने का अवसर मिलेगा।

यह पहल पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए नए अवसर उपलब्ध करा सकती है।

5. सांस्कृतिक सहयोग के जरिए SCO देशों के बीच बढ़ेगा विश्वास

शंघाई सहयोग संगठन एशिया और यूरेशिया के प्रमुख देशों को एक साझा मंच प्रदान करता है। संगठन में सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा होती रही है। अब सभ्यता संवाद मंच के जरिए सांस्कृतिक संबंधों को भी अधिक महत्व देने की कोशिश की जा रही है।

भारत का मानना है कि विभिन्न देशों के बीच मजबूत संबंधों के लिए साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी समझ भी महत्वपूर्ण है। कला, साहित्य, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

इस आयोजन से भारत को मध्य एशियाई देशों, रूस, चीन और अन्य SCO सदस्यों के साथ सांस्कृतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी मजबूती मिल सकती है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पाकिस्तान इस निमंत्रण पर क्या फैसला करता है और कौन-कौन से देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचते हैं। फिलहाल भारत की इस पहल को क्षेत्रीय सहयोग और सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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