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सुरक्षा परिषद की दावेदारी में भारत को समर्थन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार

nidhi
28 Oct 2026 8:30 AM IST
सुरक्षा परिषद की दावेदारी में भारत को समर्थन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार
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लिकटेंस्टीन करेगा अस्थायी सुरक्षा परिषद सीट का समर्थन
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्ष 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन का समर्थन मिला है। लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष युवराज अलोइस की भारत यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान में इस संबंध में समर्थन की इच्छा व्यक्त की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए उनका आभार जताया। दोनों देशों ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर भी जोर दिया। यह समर्थन सुरक्षा परिषद के दो वर्ष के निर्वाचित कार्यकाल से संबंधित है। भारत की स्थायी सदस्यता की मांग एक अलग विषय है। ताजा घोषणा को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अस्थायी सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में चुनाव होता है। किसी देश का समर्थन मिलना इस चुनाव की तैयारी में राजनयिक महत्व रखता है, लेकिन उससे सदस्यता अपने आप सुनिश्चित नहीं होती।
संयुक्त बयान में भारत की उम्मीदवारी का उल्लेख
लिकटेंस्टीन ने वर्ष 2028-29 के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की तत्परता जताई। दोनों पक्षों ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की जरूरत भी स्वीकार की। बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने के प्रयासों में निकट सहयोग की बात कही गई। इस घटनाक्रम का महत्व संयुक्त राष्ट्र की चुनावी व्यवस्था से भी जुड़ा है। महासभा में प्रत्येक सदस्य देश का एक वोट होता है। इस आधार पर छोटे और बड़े देशों के साथ संवाद, समर्थन जुटाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनता है। लिकटेंस्टीन का समर्थन भारत के लिए इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
कैसे चुने जाते हैं सुरक्षा परिषद के सदस्य?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य शामिल हैं। स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। प्रत्येक वर्ष पांच अस्थायी सीटों के लिए चुनाव होता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, अस्थायी सदस्यों के चुनाव के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। इसलिए उम्मीदवार देश को व्यापक समर्थन जुटाना पड़ता है। किसी एक देश की घोषणा इस प्रयास में मदद करती है, लेकिन आवश्यक बहुमत का स्थान नहीं ले सकती। सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी दी गई है। इस मंच की सदस्यता किसी देश को महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देती है। इसी वजह से इसकी निर्वाचित सीटों के लिए राजनयिक प्रयास महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
स्थायी और अस्थायी सदस्यता में क्या अंतर?
अस्थायी सदस्यता निर्धारित अवधि के लिए होती है। इससे किसी देश को स्थायी सदस्य का दर्जा या वीटो अधिकार नहीं मिलता। परिषद में वीटो का विशेष अधिकार मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के पास है। अस्थायी सदस्य भी मतदान करते हैं, लेकिन उनके अधिकार और कार्यकाल की व्यवस्था अलग है। भारत सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की वकालत करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के 22 अक्टूबर के वक्तव्य में भी वास्तविक सुधार के लिए सदस्य देशों और समूहों के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखने की बात कही गई थी। ऐसे में लिकटेंस्टीन के ताजा समर्थन को दो स्तरों पर देखा जा सकता है। पहला, भारत की आगामी अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी को समर्थन; दूसरा, परिषद को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने पर साझा दृष्टिकोण। दोनों विषय जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी प्रक्रियाएं अलग हैं।
आतंकवाद और पहलगाम हमले की निंदा
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की निंदा की। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की तथा पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने की जरूरत पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व भी रेखांकित किया। यह साझा रुख सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर आपसी संवाद का संकेत है। हालांकि, बयान में किसी नई संयुक्त कार्रवाई या विशेष जांच तंत्र की घोषणा का विवरण नहीं दिया गया है।
व्यापार और निवेश संबंधों पर भी हुई चर्चा
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और युवराज अलोइस ने भारत तथा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते की प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने निवेश बढ़ाने और आर्थिक सहयोग गहरा करने के अवसरों पर बातचीत की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी युवराज अलोइस और राजकुमारी सोफी का राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। राष्ट्रपति ने उन्नत विनिर्माण, नवाचार और वित्तीय सेवाओं में लिकटेंस्टीन की विशेषज्ञता को भारत के कुशल कार्यबल तथा बढ़ते बाजार से जोड़ने की संभावना बताई।
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