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दिल्ली-एनसीआर
हंगामे के बीच संसद में बढ़ा विधायी कामकाज 4 बिल पेश
Ratna Netam
10 Aug 2026 3:42 PM IST

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नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में अब महज चार दिन का समय बचा है, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा किया। भारी शोर-शराबे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने इन मुद्दों पर चर्चा कराने और सरकार से जवाब देने की मांग की। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। इस दौरान नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सरकार ने लोकसभा की कार्यसूची में शामिल चार विधेयकों को पेश कर दिया। करीब 14 मिनट की कार्यवाही में चारों विधेयक सदन में पेश किए गए।
इन विधेयकों में न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि इन विधेयकों का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में प्रशासनिक और कानूनी सुधार करना है।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया। इसके जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का आधिकारिक नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ‘केरलम’ किए जाने का प्रस्ताव है। बताया गया कि केरल विधानसभा ने जून 2024 में राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था।
न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026 केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया। इस विधेयक में विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति तथा उनकी सेवा शर्तों में एकरूपता लाने से जुड़े प्रावधान प्रस्तावित हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग की स्थापना का भी प्रस्ताव है।
खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पेश किया। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र से जुड़े मौजूदा नियमों में बदलाव और व्यवस्था को आधुनिक बनाना बताया गया। वहीं, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने से जुड़ा है।
दोपहर दो बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा। इसी दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार, 11 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इस बीच कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चर्चा की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है और इस मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग भी उठाई।
संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने भी प्रदर्शन किया। मकर द्वार के सामने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सांकेतिक रूप से दान पेटी भी रखी गई। विपक्ष की प्रमुख मांग है कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान दें।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि जब तक गृह मंत्री छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध खत्म होने की संभावना कम है। दूसरी ओर, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव से झारखंड में कथित जेपीएससी अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया देने की मांग की।
संसद में जारी इस राजनीतिक टकराव के बीच भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने सांसदों के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान गतिरोध और राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है। मानसून सत्र के अंतिम दिनों में महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और विधायी कामकाज को लेकर भी विपक्ष और सरकार के बीच सहमति बनना चुनौती बना हुआ है।
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