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New दिल्ली : दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्राओं और महिलाओं पर पाबंदियां लगाना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह मामला सामने आने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने महिला सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं।
केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद दिल्ली की छात्राएं परेशान और आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि छात्राएं सड़कों पर उतरकर विरोध कर रही हैं और सुरक्षित माहौल की मांग कर रही हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम छात्राओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर ही अतिरिक्त पाबंदियां लगाने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि पहले ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने की बात कही गई और इसके बाद शाम तथा रात के समय छात्राओं को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि हर बार सुरक्षा से जुड़े मामलों में पाबंदियां केवल लड़कियों पर ही क्यों लगाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी व्यवस्था की है और इसके लिए सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना जरूरी है।
आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद लेडी श्रीराम कॉलेज ने कुछ समय के लिए ऑफलाइन कक्षाएं स्थगित कर ऑनलाइन मोड अपनाया था। कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए यह कदम उठाया था। इसके साथ ही कॉलेज ने परिसर के आसपास सुरक्षा और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग भी की थी।
घटना दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क की है। पुलिस के अनुसार, 17 वर्षीय लड़की अपने एक दोस्त के साथ पार्क गई थी। आरोप है कि तीन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को डराया और इसके बाद लड़की को अलग ले जाकर उसके साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में से एक को पकड़ने के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ भी हुई थी।
इस घटना के बाद आस्था कुंज पार्क और उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। पार्क में रोशनी, सुरक्षा गार्ड, CCTV और नियमित गश्त की कमी को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। घटना के बाद दिल्ली में सार्वजनिक पार्कों की सुरक्षा का ऑडिट शुरू किया गया और अधिकारियों को पार्कों में प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी लगातार प्रदर्शन किए हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए और सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने खराब स्ट्रीट लाइट, असुरक्षित रास्तों और महिलाओं पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए।
इससे पहले भी कई छात्र संगठनों और महिला समूहों ने घटना के बाद विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं को घर से बाहर निकलने से रोकना या समय की पाबंदी लगाना सुरक्षा का स्थायी समाधान नहीं है। उनकी मांग है कि सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर रोशनी, CCTV, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
केजरीवाल ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को छात्राओं की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद जो कदम उठाए गए, उनसे छात्राओं की नाराजगी और बढ़ी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह बताना कि वे कब घर से बाहर निकलें और कब वापस लौटें, सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकता।
AAP संयोजक ने जोर दिया कि दिल्ली की महिलाओं और छात्राओं को बिना डर के घूमने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार महिलाओं की आवाज को समझे और सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करे। हालांकि ये टिप्पणियां केजरीवाल की राजनीतिक आलोचना हैं और दिल्ली सरकार की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
आस्था कुंज की घटना के बाद महिला सुरक्षा एक बार फिर दिल्ली की राजनीति के केंद्र में आ गई है। एक ओर छात्र सार्वजनिक स्थानों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। वहीं दूसरी ओर छात्र संगठनों का विरोध भी महिला सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस में बदल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, पुलिस गश्त और छात्राओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज रहने की संभावना है।
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