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पश्चिमी घाट और तटीय योजना को लेकर कर्नाटक सरकार सक्रिय केंद्र को लिखा पत्र
Ratna Netam
28 Sept 2026 7:28 PM IST

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New दिल्ली : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से राज्य से जुड़े दो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट प्लान (CZMP) में प्रस्तावित बदलाव और पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया (ESA) के लिए प्रस्तावित अधिसूचना को लेकर कर्नाटक की चिंताओं को सामने रखा है।मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में आग्रह किया कि इन दोनों पर्यावरणीय ढांचों को अंतिम रूप देने से पहले राज्य की पारिस्थितिक, आजीविका और विकास से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।
पर्यावरणीय योजनाओं में राज्य की चिंताओं का मुद्दा
डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक की भौगोलिक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और विकास संबंधी जरूरतों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले राज्य सरकार, स्थानीय समुदायों और संबंधित पक्षों के सुझावों को शामिल किया जाए।
CZMP में बदलाव को लेकर आपत्तियां
मुख्यमंत्री ने कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट प्लान (CZMP) को लेकर राज्य सरकार को मिली शिकायतों का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि मछुआरा समुदायों, तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, स्थानीय निकायों, जन प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने स्वीकृत योजना में कुछ कमियों को लेकर चिंता जताई है।इन शिकायतों में मुख्य रूप से तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) के वर्गीकरण, सर्वे की सीमाओं, मौजूदा बस्तियों, मछली पकड़ने से जुड़े बुनियादी ढांचे और पारंपरिक आजीविका वाले क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
तटीय समुदायों की आजीविका का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका समुद्र और उससे जुड़े संसाधनों पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके साथ उन समुदायों के हितों की रक्षा भी आवश्यक है जो पीढ़ियों से तटीय क्षेत्रों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि CZMP को अंतिम रूप देते समय स्थानीय लोगों की समस्याओं और व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।
पश्चिमी घाट ESA अधिसूचना पर भी जताई चिंता
डीके शिवकुमार ने पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया (ESA) के लिए प्रस्तावित अधिसूचना को लेकर भी राज्य की चिंताएं रखीं।उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाट क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों, किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों के हित भी सुरक्षित रहें।
केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से आग्रह किया कि वे दोनों मामलों में हस्तक्षेप कर राज्य की चिंताओं पर विचार करें।उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले कर्नाटक सरकार और संबंधित पक्षों के साथ उचित चर्चा होनी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन पर जोर
कर्नाटक सरकार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण राज्य की प्राथमिकता है, लेकिन नीतियां बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।राज्य सरकार ने केंद्र से ऐसी व्यवस्था की मांग की है, जिसमें पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और विकास के अवसर प्रभावित न हों।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
अब इस मामले में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। CZMP और पश्चिमी घाट ESA जैसे मुद्दे पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास दोनों से जुड़े हुए हैं।कर्नाटक सरकार लगातार यह मांग कर रही है कि अंतिम नीतियों में राज्य की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय समुदायों की जरूरतों और विकास योजनाओं को ध्यान में रखा जाए।मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का पत्र इसी दिशा में राज्य की चिंताओं को केंद्र तक पहुंचाने का प्रयास माना जा रहा है।
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