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गांधी जयंती से पहले PETA की अपील मीट विज्ञापनों पर रोक की मांग

Ratna Netam
28 Sept 2026 7:18 PM IST
गांधी जयंती से पहले PETA की अपील मीट विज्ञापनों पर रोक की मांग
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New दिल्ली : गांधी जयंती से पहले पशु अधिकार संगठन PETA इंडिया ने केंद्र सरकार से मीट उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर बड़ी मांग की है। PETA इंडिया ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर 2 अक्टूबर से देशभर में मीट के विज्ञापनों पर रोक लगाने की अपील की है।संगठन ने मांग की है कि बिलबोर्ड, टेलीविजन, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर मीट से जुड़े विज्ञापनों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया जाए।PETA इंडिया का कहना है कि यह कदम महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों के सम्मान के रूप में देखा जाएगा। संगठन ने दावा किया कि इससे पशुओं के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी लाभ पहुंच सकता है।
PETA इंडिया ने सरकार को भेजा पत्र
PETA इंडिया की ओर से भेजे गए पत्र में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मीट विज्ञापनों को नियंत्रित करने की मांग की गई है।संगठन ने कहा कि गांधी जयंती के अवसर पर अहिंसा और करुणा के संदेश को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं।PETA इंडिया ने अपने पत्र में पशु कल्याण, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए मीट विज्ञापनों पर रोक लगाने की अपील की है।
गांधी के अहिंसा सिद्धांत का दिया हवाला
PETA इंडिया ने अपनी मांग को महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से जोड़ा है।संगठन का कहना है कि गांधीजी ने जीवन के हर क्षेत्र में करुणा और अहिंसा को महत्व दिया था। इसलिए गांधी जयंती के मौके पर ऐसे फैसले उनके विचारों के अनुरूप हो सकते हैं।PETA इंडिया लंबे समय से पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और शाकाहार को बढ़ावा देने से जुड़े अभियान चलाता रहा है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी किया जिक्र
PETA इंडिया ने पत्र में मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया है।संगठन का कहना है कि भोजन की आदतों का असर स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है। इसलिए मीट की खपत और उससे जुड़े प्रचार को लेकर चर्चा जरूरी है।हालांकि, मीट उद्योग और उपभोक्ताओं के अलग-अलग पक्ष भी इस विषय पर मौजूद हैं।
बाढ़ के बाद की गई अपील
PETA इंडिया की यह अपील भारत और नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद सामने आई है।संगठन ने इस प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण और जीवन के प्रति संवेदनशीलता पर जोर दिया है।इसके अलावा यह अपील उस समय भी आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया भर के नेताओं को पारंपरिक और अंतरराष्ट्रीय मीट-रहित भोजन परोसे जाने की बात सामने आई थी।
मीट विज्ञापनों को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर समय-समय पर स्वास्थ्य, पर्यावरण और नैतिकता से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।कई संगठन खानपान से जुड़े विज्ञापनों में जिम्मेदारी और पारदर्शिता की मांग करते हैं।वहीं, मीट उद्योग से जुड़े लोग रोजगार, व्यापार और उपभोक्ताओं की पसंद जैसे मुद्दों को भी महत्वपूर्ण बताते हैं।
सरकार के फैसले पर नजर
PETA इंडिया की इस मांग पर अब केंद्र सरकार की ओर से किसी निर्णय का इंतजार है।यदि सरकार इस संबंध में कोई कदम उठाती है तो इसका असर विज्ञापन उद्योग, खाद्य क्षेत्र और उपभोक्ता व्यवहार पर पड़ सकता है।फिलहाल PETA इंडिया ने अपनी मांग के समर्थन में गांधी जयंती और अहिंसा के संदेश को आधार बनाया है।
बहस तेज होने की संभावना
मीट विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग के बाद इस मुद्दे पर सामाजिक और नीतिगत बहस तेज होने की संभावना है।जहां पशु अधिकार संगठन इसे नैतिकता, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खाद्य विकल्पों और व्यापार से जुड़े लोगों के अपने तर्क हैं।अब नजर इस बात पर होगी कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।
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