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SC/ST एक्ट मामले में पत्रकारों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Ratna Netam
16 Oct 2026 9:02 PM IST
SC/ST एक्ट मामले में पत्रकारों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दो पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी की जांच पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह मामला दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत की शिकायत से जुड़ा है। पत्रकारों पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी करने और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने कहा कि पुलिस का पक्ष सुने बिना जांच रोकने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका पर दशहरा की छुट्टियों के बाद विचार किया जाएगा। अदालत ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की है।
पत्रकारों ने FIR की जांच रोकने की मांग की
पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर अदालत में पेश हुए।उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि दिल्ली पुलिस को प्राथमिकी के आधार पर आगे जांच करने या कोई नया कदम उठाने से रोका जाए।वकील ने कहा कि मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है और पत्रकारों को तत्काल अंतरिम राहत प्रदान की जानी चाहिए।हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर जांच रोकने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा कि संबंधित पुलिस पक्ष की बात सुने बिना ऐसा आदेश देना उचित नहीं होगा।
27 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की है।अदालत में 19 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक दशहरा की छुट्टियां रहेंगी। इसके बाद मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।न्यायालय ने फिलहाल प्राथमिकी की जांच पर रोक नहीं लगाई है। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है और याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर आगे विचार किया जाएगा।अदालत के अंतरिम आदेश का अर्थ यह भी नहीं है कि पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं।
ACP विवेक भगत ने लगाए थे जातिसूचक टिप्पणी के आरोप
यह विवाद तीन अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है।दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों और अन्य लोगों ने उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां कीं।उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के भी आरोप इन आरोपों के आधार पर 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।मामले में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
महिला पत्रकार ने भी ACP पर लगाए गंभीर आरोप
इस मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। महिला पत्रकार रोजी ने एसीपी विवेक भगत पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।पत्रकार का दावा है कि पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने के बाद उनके विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया।उनका आरोप है कि इस प्राथमिकी का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने और उनकी शिकायत को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।हालांकि, एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में पत्रकारों पर जातिगत अपमान और बदनाम करने के आरोप लगाए हैं।
दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट से एक पत्रकार को मिल चुकी है अंतरिम सुरक्षाइस विवाद में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम निर्देश दिया था।सुप्रीम कोर्ट के सामने महिला पत्रकार की ओर से कहा गया कि पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।अदालत ने इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्काल संरक्षण दिया था।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम संरक्षण और दिल्ली हाईकोर्ट में प्राथमिकी की जांच पर रोक लगाने की मांग अलग-अलग न्यायिक मुद्दे हैं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही जांच
मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। जांच एजेंसी के सामने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और दोनों पक्षों के आरोपों की पड़ताल करने की जिम्मेदारी है।इस दौरान उपलब्ध वीडियो फुटेज, शिकायतों और अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।पत्रकारों की ओर से दर्ज शिकायत तथा एसीपी की शिकायत से उत्पन्न आपराधिक मामले में अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं।कानूनी प्रक्रिया के तहत इन आरोपों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की जिम्मेदारी निर्धारित होगी।
हाईकोर्ट के अगले फैसले पर नजर
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल पत्रकारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच रोकने से इनकार किया है। अदालत ने पुलिस का पक्ष सुनने के बाद आगे विचार करने की बात कही है।अब 27 अक्टूबर की सुनवाई में पत्रकारों की ओर से दाखिल याचिका और दिल्ली पुलिस के जवाब पर चर्चा होगी।यह मामला विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका, पत्रकारों की सुरक्षा और जातिगत अपमान से जुड़े आरोपों के कारण महत्वपूर्ण बन गया है।फिलहाल आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है और मामला अदालत में विचाराधीन है।
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