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दिल्ली दंगा केस में ताहिर हुसैन को 2 साल की सजा

Ratna Netam
16 Oct 2026 8:56 PM IST
दिल्ली दंगा केस में ताहिर हुसैन को 2 साल की सजा
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नई दिल्ली। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को अदालत ने दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सजा सुनाते हुए उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि किसी अपराध को अंजाम देने का निर्देश देने वाला व्यक्ति भी उतना ही या उससे अधिक दोषी हो सकता है, जितना अपराध को प्रत्यक्ष रूप से अंजाम देने वाला व्यक्ति।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने सजा सुनाते हुए कहा कि ताहिर हुसैन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि थे और उनसे सांप्रदायिक तनाव के दौरान शांति बनाए रखने की अपेक्षा की जाती थी। इसके विपरीत, अदालत ने पाया कि उन्होंने अपने घर का इस्तेमाल दंगाइयों को करने दिया, जिससे हिंसा को बढ़ावा मिला।
ताहिर हुसैन को दो साल का कठोर कारावास
कड़कड़डूमा अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दंगा भड़काने में सहायता करने का दोषी पाया था।10 अक्टूबर 2026 को अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को सजा निर्धारित की गई। अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से सजा में नरमी की मांग को स्वीकार नहीं किया।न्यायाधीश ने कहा कि मामले में अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाले कारक बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत राहत देने वाले आधारों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
जनप्रतिनिधि होने के कारण जिम्मेदारी अधिक थी
अदालत ने अपने फैसले में ताहिर हुसैन के तत्कालीन सार्वजनिक पद को महत्वपूर्ण माना। न्यायाधीश ने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी थी कि वे क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करते।अदालत के अनुसार, सांप्रदायिक तनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों से संयम और जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है।न्यायालय ने पाया कि हुसैन ने अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने के बजाय दंगाइयों को अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करने दिया।
दंगाइयों ने घर की छत से किया था पथराव
अदालत ने पाया कि 24 फरवरी 2020 को ताहिर हुसैन के घर की छत पर दंगाइयों की भीड़ मौजूद थी। इस स्थान का इस्तेमाल सड़क से गुजरने वाले लोगों और आसपास की संपत्तियों पर पथराव करने के लिए किया गया।न्यायालय के अनुसार, हुसैन का मकान आसपास के क्षेत्र में ऊंचे स्थान पर स्थित था। इस कारण वहां से दंगाइयों को आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और हमला करने की सुविधा मिली।अदालत ने माना कि हुसैन ने दंगाइयों को अपने घर का इस्तेमाल करने की अनुमति देकर हिंसा में सहायता की।
बचाव पक्ष की दलीलों पर अदालत ने किया विचार
सजा निर्धारित करने के दौरान अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से पेश राहत देने वाली परिस्थितियों पर भी विचार किया। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि अपराध की प्रकृति और परिस्थितियां अधिक गंभीर हैं।अदालत ने विशेष रूप से इस तथ्य को महत्व दिया कि दोषी एक जनप्रतिनिधि था और सांप्रदायिक तनाव के दौरान उससे जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा थी।न्यायाधीश ने कहा कि अपराध करने वाले व्यक्ति के साथ उसे प्रोत्साहित करने या सहायता देने वाले की भूमिका को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
अन्य 12 आरोपियों को किया गया बरी
इस मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा अन्य 12 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। अदालत ने हुसैन को दंगा भड़काने में सहायता करने का दोषी माना, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए कुछ अधिक गंभीर आरोप साबित नहीं हुए।इनमें घातक हथियारों के साथ दंगा करने, चोरी, आगजनी और घर में आपराधिक अतिक्रमण जैसे आरोप शामिल थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक आरोप पर अलग-अलग विचार किया।
अंकित शर्मा हत्याकांड में पहले ही उम्रकैद
ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।31 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा अदालत ने खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।वर्तमान मामले में सुनाई गई दो वर्ष की सजा उस हत्या के मामले से अलग है।
दिल्ली दंगों के मामलों में न्यायिक कार्रवाई जारी
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। विभिन्न घटनाओं को लेकर अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।ताहिर हुसैन के खिलाफ भी दंगों से जुड़े कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है। ताजा फैसले में अदालत ने दंगों को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को लेकर सजा सुनाई है।इस फैसले में अदालत ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और हिंसक घटनाओं में सहायता करने वाले व्यक्तियों की आपराधिक जवाबदेही को विशेष महत्व दिया है।
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