दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली-NCR की हवा सुधारने के लिए पांच राज्यों की संयुक्त पहल

Saba Naaz
28 July 2026 8:34 PM IST
दिल्ली-NCR की हवा सुधारने के लिए पांच राज्यों की संयुक्त पहल
x

दिल्ली-एनसीआर: हर साल सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने प्रदूषण के वास्तविक कारणों की पहचान और तत्काल समाधान के लिए 11 सदस्यीय 'निगरानी और पहचान' (Monitoring and Identification) समिति का गठन किया है। यह समिति वैज्ञानिक तकनीक, मौसम संबंधी आंकड़ों और अंतर-राज्यीय सहयोग के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करेगी।

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण केवल स्थानीय समस्या नहीं है। सर्दियों में पड़ोसी राज्यों से आने वाला धुआं, पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण, औद्योगिक गतिविधियां और मौसम की स्थिति मिलकर हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं। ऐसे में अब केवल निर्देश जारी करने के बजाय वैज्ञानिक विश्लेषण और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए समस्या से निपटने की तैयारी की गई है।

सीएक्यूएम की ओर से गठित समिति की जिम्मेदारी आयोग के तकनीकी सदस्य डॉ. एसडी अत्री को सौंपी गई है। वहीं डॉ. विकास सिंह को समिति का सदस्य-संयोजक बनाया गया है। समिति में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान अधिक सटीक तरीके से की जा सके।

इस समिति में मौसम वैज्ञानिक डॉ. वीके सोनी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (IITM) पुणे के डॉ. सचिन घुड़े और सीएसआईआर-नीरी की डॉ. पद्मा एस. राव जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के वरिष्ठ अधिकारी भी समिति का हिस्सा बनाए गए हैं।

समिति की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह प्रदूषण की स्थिति का पहले से अनुमान लगाने में सक्षम होगी। एडवांस सेटेलाइट डेटा, मौसम की जानकारी और वैज्ञानिक मॉडलिंग के जरिए समिति 48 से 72 घंटे पहले ही यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि प्रदूषण का स्तर कहां और कितना बढ़ सकता है। इससे सरकार और संबंधित विभाग समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए इस समिति में दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इससे राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और प्रदूषण के लिए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय संयुक्त कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा।

सीएक्यूएम का उद्देश्य है कि प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख कारणों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाए। यदि किसी क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण, वाहन उत्सर्जन या अन्य कारणों से हवा खराब होती है तो संबंधित राज्य की मदद से तत्काल नियंत्रण उपाय किए जाएंगे।

आयोग ने समिति की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाए रखने के लिए यह भी निर्देश दिया है कि यदि किसी सदस्य अधिकारी का तबादला होता है या पद में बदलाव होता है तो नए अधिकारी की जानकारी तुरंत अपडेट की जाए। इससे निर्णय लेने और निगरानी प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं होगी।

समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आदित्य शर्मा (वैज्ञानिक 'ई'), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से डॉ. नंदिता मोइत्रा, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ए.के. आनंद, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भूपेंद्र सिंह रिणवा, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से डॉ. जयश्री काला और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हरप्रीत सिंह को शामिल किया गया है।

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन जाता है। कई बार हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर तक पहुंच जाती है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई समिति के गठन से उम्मीद की जा रही है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा और समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।

CAQM का यह प्रयास दिल्ली-एनसीआर की हवा को बेहतर बनाने के साथ-साथ राज्यों के बीच सहयोग की नई व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति को और मजबूत किया जा सकता है।

Next Story