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Delhi दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह, जंतर-मंतर को अब कड़ी सुरक्षा वाले घेरे में बदल दिया गया है। विरोध-प्रदर्शन वाली जगह के चारों ओर बैरिकेडिंग की 11 परतें लगाई गई हैं - छह पीछे की तरफ और पांच सामने की तरफ। मुख्य प्रवेश द्वार और पीछे के रास्तों को एक के बाद एक कई बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है। इन बैरिकेड्स पर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान तैनात हैं। दौरे के समय बैरिकेड वाले इलाके में लगभग 300 जवान तैनात थे। यह संख्या ज़मीनी स्तर का अनुमान है, न कि पुलिस की आधिकारिक तैनाती की संख्या।
* पीछे की तरफ छह परतें
विरोध-प्रदर्शन वाली जगह के पिछले हिस्से में बैरिकेडिंग की छह परतें हैं। एक रास्ता जंतर-मंतर रोड से केरल हाउस की तरफ जाता है, जबकि दूसरा संसद मार्ग को जोड़ता है, जो पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के पास है। दोनों रास्तों को बंद कर दिया गया है। बैरिकेडिंग उस हिस्से तक जारी है जहाँ विरोध-प्रदर्शन वाली जगह के पीछे सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें हैं। इन दुकानों के आगे, पार्लियामेंट स्ट्रीट की तरफ जाने वाली सड़क को भी सील कर दिया गया है, जिससे पीछे से आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है।
जंतर-मंतर लेन, जंतर-मंतर रोड को संसद मार्ग से जोड़ती है, जिससे यह इलाका विरोध-प्रदर्शन वाली जगह के दोनों हिस्सों के बीच एक अहम कड़ी बन जाता है।
सामने की तरफ पांच परतें
जनपथ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 की तरफ से मुख्य प्रवेश द्वार को भी बंद कर दिया गया है। अशोक रोड की तरफ से, सुरक्षा की पहली परत रॉयल प्लाज़ा इलाके की ओर जाने वाले रास्ते को रोकती है। 21, अशोक रोड स्थित बंगले के पास सुरक्षा की एक और परत केरल हाउस और सरदार पटेल लाइब्रेरी की ओर जाने से रोकती है। इसके बाद केरल हाउस के पास बैरिकेड्स की एक और कतार शुरू होती है, फिर विरोध-प्रदर्शन वाली जगह के पिछले हिस्से के करीब अतिरिक्त बैरिकेडिंग है और आखिर में एक और बैरिकेड सीधे विरोध-प्रदर्शन वाली जगह को रोकता है। दूसरी तरफ, जनपथ और इंपीरियल होटल की ओर से आने वाले रास्तों पर भी रोक लगा दी गई है। मॉडर्न सर्विस स्टेशन के पेट्रोल पंप के पास जनपथ मेट्रो स्टेशन के दूसरे गेट के पास भी बैरिकेडिंग की गई है।
छह से आठ फीट ऊंचे बैरिकेड
सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ़ पुलिस बैरियर की एक लाइन नहीं है। कई बैरिकेड्स को एक साथ जोड़कर कई परतें बनाई गई हैं। इनमें से कई छह से आठ फीट ऊंचे हैं और उन पर दिल्ली पुलिस के निशान बने हैं। बैरिकेड्स पर लगे चेतावनी वाले बैनरों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का ज़िक्र है और बिना इजाज़त जमा होने या प्रदर्शन करने के खिलाफ चेतावनी दी गई है, साथ ही नियमों को तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
DCP सचिन शर्मा ने 'द ट्रिब्यून' से बात करते हुए कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू की है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक जंतर-मंतर की प्रदर्शन वाली जगह को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। लेकिन, वहां प्रदर्शन करने के लिए इजाज़त की ज़रूरत होती है, जिसके बिना इसे गैर-कानूनी माना जाएगा और उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।"
सुरक्षा घेरा प्रदर्शन स्थल से आगे तक फैला है
मौके पर जाकर देखने से पता चला कि पाबंदियां सिर्फ प्रदर्शन स्थल की सीमा तक ही सीमित नहीं हैं। अशोक रोड, केरल हाउस, संसद मार्ग, जनपथ और इंपीरियल होटल की तरफ से वहां जाने वाली सड़कों को भी सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। दिल्ली पुलिस, CISF और RAF के जवान बैरिकेड्स के पीछे और उनके बीच कई जगहों पर तैनात थे।
लंबे समय तक सीलिंग
मौजूदा व्यवस्था 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन के दौरान सुरक्षा बढ़ाने के बाद की गई है। 19 जुलाई को, दिल्ली पुलिस ने संसद तक प्रस्तावित मार्च से पहले नई दिल्ली ज़िले में धारा 163 लागू की और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी। 20 जुलाई के आंदोलन के दौरान मध्य दिल्ली में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। 25 जुलाई तक जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल को पूरी तरह से बैरिकेड्स से घेरकर सील कर दिया गया था। इसके बाद सुरक्षा और कड़ी कर दी गई। 30 जुलाई को खबरें आईं कि पुलिस ने बैरिकेड्स को वेल्डिंग करके आपस में जोड़ना शुरू कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर था कि प्रदर्शनकारी उन्हें हटाने की कोशिश कर सकते हैं।
हालिया प्रदर्शनों के कारण एक बार फिर पाबंदी वाले आदेश लागू किए गए हैं और भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह, जहाँ आसानी से पहुँचा नहीं जा सकता सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शनों को लेकर 2018 में दिए अपने फ़ैसले में इस जगह को प्रदर्शनों के लिए तय इलाका माना था। साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को इसके नियंत्रित इस्तेमाल के लिए एक तरीका बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें विरोध करने के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था व वहाँ रहने वाले लोगों और दफ़्तरों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके। मौजूदा ज़मीनी हालात, जगह तय करने और वहाँ तक पहुँचने की सुविधा के बीच एक बड़ा फ़र्क दिखाते हैं।
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