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20 हजार रुपये में गुजर-बसर मुश्किल

Kanchan Paikara
3 July 2026 3:16 PM IST
20 हजार रुपये में गुजर-बसर मुश्किल
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New Delhi | नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर एक रैपिडो राइडर की संघर्षभरी कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। रोजमर्रा की जिंदगी में लोग छोटी-छोटी परेशानियों जैसे ऑफिस लेट होना, ट्रैफिक जाम या डेडलाइन का दबाव आने पर परेशान हो जाते हैं, लेकिन इस कहानी ने जीवन की असली चुनौतियों की एक अलग तस्वीर सामने रखी है।
यह मामला एक ऐसे पैसेंजर द्वारा शेयर किया गया, जो सुबह ऑफिस के लिए देर हो रहा था और उसने बाइक टैक्सी बुक की थी। राइडर महज 2 मिनट में पहुंच गया और लगातार फोन करके जल्द आने की बात कह रहा था। जब पैसेंजर ने उससे इतनी जल्दी की वजह पूछी, तो जो सच सामने आया उसने उसकी सोच ही बदल दी।
राइडर कोई साधारण पार्ट-टाइम काम करने वाला युवा नहीं था, बल्कि एक जिम्मेदार पिता था जो अपने परिवार और दिव्यांग बच्चे के इलाज के लिए अतिरिक्त काम (साइड हसल) कर रहा था। वह दिन में अपनी फुल-टाइम नौकरी करता है और सुबह व रात के समय बाइक टैक्सी चलाता है, ताकि घर का खर्च पूरा हो सके।
राइडर ने सफर के दौरान बताया कि उसकी फुल-टाइम नौकरी से उसे हर महीने केवल 20 हजार रुपये की सैलरी मिलती है। इस सैलरी में उसे अपने पांच सदस्यीय परिवार का खर्च चलाना पड़ता है, जिसमें पत्नी और तीन बच्चे शामिल हैं। महंगाई के इस दौर में इतने कम पैसों में घर चलाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
उसकी सबसे बड़ी परेशानी उसका दिव्यांग बच्चा है, जिसका इलाज और दवाइयों पर हर महीने करीब 10 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। यानी उसकी आधी सैलरी सिर्फ मेडिकल खर्चों में ही खत्म हो जाती है। इसके बाद घर के बाकी खर्चों के लिए पैसे कम पड़ जाते हैं, जिसके चलते उसे मजबूरी में अतिरिक्त काम करना पड़ता है।
राइडर ने बताया कि वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सुबह जल्दी और देर रात तक बाइक टैक्सी चलाता है। इतनी मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उसके चेहरे पर मुस्कान और व्यवहार में शालीनता बनी रहती है, जो लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
इस कहानी को सोशल मीडिया पर लाखों लोग पढ़ चुके हैं और कई यूजर्स ने इसे जीवन की सच्चाई से जोड़कर देखा है। लोगों का कहना है कि यह कहानी बताती है कि कई लोग अपनी मुस्कान के पीछे कितनी बड़ी लड़ाई लड़ रहे होते हैं।
यह वायरल स्टोरी न सिर्फ आर्थिक संघर्ष को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जिम्मेदारियां इंसान को किस हद तक मेहनत करने पर मजबूर कर देती हैं। महंगाई और सीमित आय के बीच परिवार को संभालना कई लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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