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भारत की स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervavac को WHO की बड़ी मंजूरी
Ratna Netam
5 Oct 2026 2:31 PM IST

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नई दिल्ली: भारत में विकसित पहली स्वदेशी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन 'सर्वावैक' (Cervavac) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की ओर से बनाई गई क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से प्री-क्वालिफिकेशन मिल गया है। WHO के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक सर्वावैक की प्री-क्वालिफिकेशन स्थिति 25 सितंबर 2026 से प्रभावी है।
WHO की प्री-क्वालिफाइड वैक्सीन सूची में शामिल होने के बाद सर्वावैक के लिए वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इस्तेमाल का रास्ता आसान हुआ है। WHO के मुताबिक प्री-क्वालिफिकेशन यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है कि वैक्सीन गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के तय मानकों पर खरी उतरती है और संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों की आवश्यकताओं को पूरा करती है। ऐसी वैक्सीन को UN एजेंसियां खरीद सकती हैं, बशर्ते खरीद से पहले संबंधित एजेंसी अपनी अतिरिक्त प्रक्रियाएं भी पूरी करे।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सर्वावैक उसका WHO से प्री-क्वालिफिकेशन हासिल करने वाला 32वां जैविक उत्पाद बताया जा रहा है। इससे कंपनी के वैश्विक वैक्सीन पोर्टफोलियो में एक और महत्वपूर्ण उत्पाद जुड़ गया है। इस उपलब्धि से भारत में विकसित HPV वैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रमों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
सर्वावैक एक रिकॉम्बिनेंट क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन है। यह HPV के चार प्रकारों—6, 11, 16 और 18—को लक्षित करती है। WHO के अनुसार HPV के प्रकार 16 और 18 दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर के करीब 70 प्रतिशत मामलों से जुड़े हैं। वहीं 6 और 11 जैसे प्रकार जननांग मस्सों से जुड़े होते हैं। क्वाड्रिवैलेंट वैक्सीन इन चार प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित की जाती है।
सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार Cervavac 9 से 26 वर्ष की आयु के लड़के और लड़कियों के लिए स्वीकृत है। कंपनी की जानकारी के मुताबिक लड़कियों और महिलाओं में यह HPV के संबंधित प्रकारों से होने वाले सर्वाइकल, वल्वर, वैजाइनल और एनल कैंसर से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाती है, जबकि लड़कों और पुरुषों में संबंधित HPV संक्रमणों से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा यह HPV प्रकार 6 और 11 से जुड़े जननांग मस्सों से बचाव में भी मदद करती है।
HPV एक आम वायरल संक्रमण है, जो यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है। इसके कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर से जुड़े बदलाव पैदा कर सकते हैं। सर्वाइकल कैंसर HPV संक्रमण से होने वाली सबसे प्रमुख बीमारियों में शामिल है। इसी वजह से HPV के खिलाफ टीकाकरण को कैंसर की रोकथाम की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। WHO के अनुसार HPV टीके वायरस के प्रमुख उच्च-जोखिम प्रकारों के संक्रमण और उनसे होने वाले प्रीकैंसरस बदलावों की रोकथाम में प्रभावी हैं।
भारत के लिए Cervavac की WHO प्री-क्वालिफिकेशन उपलब्धि का एक और महत्व यह है कि इससे स्वदेशी वैक्सीन निर्माण की क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है। सीरम इंस्टीट्यूट ने जनवरी 2023 में Cervavac को भारत की पहली मेड-इन-इंडिया क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन के रूप में लॉन्च किया था। इससे पहले 2022 में इसके वैज्ञानिक विकास के पूरा होने की घोषणा की गई थी।
WHO प्री-क्वालिफिकेशन मिलने से सिर्फ नियामकीय मान्यता का दायरा नहीं बढ़ता, बल्कि वैक्सीन को उन अंतरराष्ट्रीय खरीद प्रणालियों तक पहुंच मिलने की संभावना भी बढ़ती है जिनके जरिए कम और मध्यम आय वाले देशों में टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए टीके उपलब्ध कराए जाते हैं। WHO के अनुसार UN एजेंसियां प्री-क्वालिफाइड वैक्सीनों की खरीद के जरिए उन देशों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों की जरूरतें पूरी करने में मदद करती हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित और प्रभावी टीकों की आवश्यकता होती है।
हालांकि, WHO की प्री-क्वालिफिकेशन को किसी देश में स्वत: बाजार मंजूरी या WHO की ओर से अलग से 'वैक्सीन अप्रूवल' नहीं माना जाता। WHO स्पष्ट करता है कि प्री-क्वालिफाइड सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि उत्पाद ने तय गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता मानकों को पूरा किया है और वह UN एजेंसियों की खरीद के लिए सिद्धांततः स्वीकार्य है। संबंधित देशों में अंतिम नियामकीय निर्णय वहां की राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में रहता है।
वैश्विक स्तर पर HPV टीकाकरण को बढ़ाने की कोशिशों के बीच Cervavac को मिली यह उपलब्धि भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। WHO के आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक 165 देशों ने HPV वैक्सीन को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल किया था। ऐसे में किफायती और बड़े पैमाने पर उपलब्ध वैक्सीनों की भूमिका आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।
कुल मिलाकर, Cervavac को WHO की प्री-क्वालिफिकेशन मिलना भारत के वैक्सीन निर्माण क्षेत्र के लिए अहम कदम है। इससे एक स्वदेशी HPV वैक्सीन को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद व्यवस्था में जगह मिलने का रास्ता खुला है। आने वाले समय में इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहने की संभावना है, बल्कि दूसरे देशों में HPV टीकाकरण की पहुंच बढ़ाने और सर्वाइकल कैंसर समेत HPV से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों में भी Cervavac की भूमिका बढ़ सकती है।
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