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डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की बड़ी छलांग दो साल में ₹50 हजार करोड़ का लक्ष्य

Ratna Netam
25 Sept 2026 5:27 PM IST
डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की बड़ी छलांग दो साल में ₹50 हजार करोड़ का लक्ष्य
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नई दिल्ली। भारत के रक्षा निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमत भारतीय रक्षा उत्पादों की प्रमुख खूबियों में से एक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो वर्षों के भीतर देश का वार्षिक रक्षा निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये रहा था और भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।राजेश कुमार सिंह 13वें PAFI एनुअल फोरम 2026 में ‘बिल्डिंग इंडियाज कॉम्पिटिटिव एडवांटेज’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में बोल रहे थे। रक्षा निर्यात से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास लागत के मामले में महत्वपूर्ण बढ़त है। उनके मुताबिक कुछ भारतीय मिसाइल प्रणालियां विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी OEM के मुकाबले लगभग एक-चौथाई कीमत पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने इसे वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की प्रमुख प्रतिस्पर्धी ताकतों में गिनाया।
रक्षा सचिव ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भारत के सबसे चर्चित रक्षा निर्यात उत्पादों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है और भारत कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को इसे बेच रहा है या संभावित सौदों की प्रक्रिया में है। हाल के वर्षों में ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात की पहचान बनने वाले प्रमुख सिस्टम में शामिल हुआ है।भारत पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली निर्यात कर चुका है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों के साथ भी इस सिस्टम को लेकर बातचीत और रक्षा सहयोग आगे बढ़ा है। जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ ब्रह्मोस से जुड़े संभावित अवसरों का भी उल्लेख किया गया था।सिंह ने कहा कि भारतीय रक्षा निर्यात अब केवल मिसाइल प्रणालियों तक सीमित नहीं है। आर्टिलरी और माउंटेड गन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी निर्यात बढ़ रहा है। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO की तकनीक पर आधारित निजी क्षेत्र के कई उत्पादों को दूसरे देशों में निर्यात किया जा चुका है और इनके लिए नई मांग भी सामने आ रही है।
उन्होंने आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का भी जिक्र किया। रक्षा सचिव के अनुसार इस सिस्टम को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी दिलचस्पी दिखाई दे रही है। भारत की रक्षा निर्यात सूची में ब्रह्मोस और आकाश जैसे जटिल हथियारों के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट, बैलिस्टिक हेलमेट और अन्य रक्षा उपकरण भी शामिल हैं। जुलाई में राजेश सिंह ने बताया था कि करीब 145 भारतीय कंपनियां अलग-अलग तरह के रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं।रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। इसी अवधि में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा। मंत्रालय के अनुसार भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
ये आंकड़े पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में आए बदलाव को भी दिखाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले 2025-26 में यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ निर्यात के लिए भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। रक्षा मंत्रालय का घोषित लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।रक्षा सचिव की शुक्रवार की टिप्पणी से संकेत मिला कि मंत्रालय इस लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल करने की संभावना देख रहा है। सिंह ने अगले दो वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई। इससे पहले जुलाई 2026 में उन्होंने कहा था कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए 50 हजार करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।भारतीय रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक देश में 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, करीब 500 लाइसेंस प्राप्त रक्षा कंपनियां और लगभग 17 हजार MSME रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। रक्षा औद्योगिक लाइसेंस की संख्या भी मार्च 2026 तक बढ़कर 834 हो गई थी।
सरकार ने स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट और Innovations for Defence Excellence यानी iDEX जैसी पहलें लागू की हैं। इनका उद्देश्य घरेलू कंपनियों, स्टार्टअप और MSME को रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। बढ़ते घरेलू उत्पादन के साथ सरकार निर्यात बाजार में भी भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।भारत के रक्षा निर्यात में कीमत का पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक हथियार बाजार में अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और अन्य बड़े रक्षा उत्पादक देशों की कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। राजेश सिंह की टिप्पणी के मुताबिक भारत यदि आधुनिक रक्षा प्रणालियों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराने में सक्षम रहता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त साबित हो सकती है। हालांकि रक्षा सौदों में कीमत के साथ तकनीकी क्षमता, विश्वसनीयता, प्रशिक्षण, रखरखाव और दीर्घकालिक सपोर्ट भी महत्वपूर्ण कारक होते हैं।
ब्रह्मोस, आकाश, आर्टिलरी और निजी क्षेत्र के DRDO तकनीक आधारित उत्पादों में बढ़ती विदेशी दिलचस्पी के बीच सरकार का फोकस अब उच्च मूल्य वाले रक्षा प्लेटफॉर्म के निर्यात पर है। वित्त वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के निर्यात के बाद 50 हजार करोड़ रुपये का स्तर अगला बड़ा लक्ष्य है। रक्षा सचिव के मुताबिक भारत का कॉस्ट एडवांटेज और स्वदेशी रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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