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भारतीय रेलवे ने रचा इतिहास, 12,495 भवनों पर लगाए सोलर पैनल

Ratna Netam
5 Nov 2026 4:53 PM IST
भारतीय रेलवे ने रचा इतिहास, 12,495 भवनों पर लगाए सोलर पैनल
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देशभर में रेलवे भवनों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रेल मंत्रालय को प्रतिष्ठित 'पीएम सूर्य घर एक्सीलेंस अवॉर्ड' (PM Surya Ghar Excellence Award) से सम्मानित किया गया है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के दौरान रेल मंत्रालय को यह पुरस्कार प्रदान किया। इस सम्मान ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारतीय रेलवे की बढ़ती भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।रेल मंत्रालय को यह पुरस्कार प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 'केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों द्वारा सबसे अधिक भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने' की श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त करने पर दिया गया है। रेलवे ने अपने विशाल नेटवर्क का उपयोग करते हुए हजारों सरकारी भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। यह उपलब्धि ऊर्जा बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे ने देशभर में कुल 15,868 ऐसे भवनों की पहचान की है, जहां रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना तकनीकी रूप से संभव है। इनमें से अब तक 12,495 भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस तरह रेलवे ने अपने कुल चिह्नित भवनों में से लगभग 79 प्रतिशत को सौर ऊर्जा से जोड़ दिया है। इतने बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा का उपयोग करने के कारण रेल मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से आगे निकल गया है।
रेलवे की उपलब्धि केवल भवनों की संख्या तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के मामले में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। रेलवे ने कुल 424 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके मुकाबले अब तक 351 मेगावाट क्षमता चालू की जा चुकी है। यानी निर्धारित लक्ष्य का लगभग 83 प्रतिशत हासिल कर लिया गया है। यह उपलब्धि रेलवे परिसरों में स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में शामिल है। इसके अंतर्गत रेलवे स्टेशन, प्रशासनिक कार्यालय, प्रशिक्षण संस्थान, कार्यशालाएं, रखरखाव केंद्र और अन्य महत्वपूर्ण भवन आते हैं। इन परिसरों की छतों का उपयोग सोलर पैनल लगाने के लिए किया जा रहा है। इससे उपलब्ध स्थान का बेहतर इस्तेमाल संभव हो रहा है और परंपरागत बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से कई स्तरों पर लाभ मिलते हैं। सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि दिन के समय सूर्य की रोशनी से बिजली उत्पन्न की जा सकती है। इससे ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली की जरूरत कम हो सकती है। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा के उपयोग से जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायता मिलती है।
रेलवे की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के 77 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत कुल 39,135 भवनों को सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से अब तक 25,984 भवनों पर सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 66 प्रतिशत चिह्नित भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है।इस राष्ट्रीय उपलब्धि में रेल मंत्रालय की हिस्सेदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के जिन 25,984 भवनों पर सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं, उनमें से 12,495 भवन अकेले भारतीय रेलवे के हैं। इसका अर्थ है कि इस अभियान के तहत सौर ऊर्जा से जोड़े गए केंद्रीय सरकारी भवनों में लगभग 48 प्रतिशत रेलवे के हैं।रेलवे की इस पहल से अन्य सरकारी विभागों को भी अपने भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सरकारी संस्थानों में अक्षय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से भविष्य में बिजली खर्च को नियंत्रित करने और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।रेल मंत्रालय ने अब अपने अगले लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया है। मंत्रालय की योजना मार्च 2027 तक देशभर में चिह्नित सभी उपयुक्त रेलवे भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की है। वर्तमान में 15,868 चिह्नित भवनों में से 12,495 पर सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस हिसाब से अभी लगभग 3,373 भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने बाकी हैं।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न रेलवे जोन और संबंधित इकाइयों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाना होगा। भवनों की तकनीकी उपयुक्तता, उपकरणों की स्थापना, विद्युत कनेक्शन और संयंत्रों के संचालन जैसी व्यवस्थाएं इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रमुख उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और बिजली उत्पादन में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। वहीं, सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अभियान सार्वजनिक संस्थानों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहा है।रेल मंत्रालय को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान दर्शाता है कि भारतीय रेलवे परिवहन सेवाओं के आधुनिकीकरण के साथ ऊर्जा क्षेत्र में भी बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। हजारों रेलवे भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और 351 मेगावाट क्षमता चालू करने की उपलब्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।आने वाले समय में यदि रेलवे निर्धारित समयसीमा के भीतर शेष भवनों पर भी सोलर पैनल स्थापित कर लेता है, तो सरकारी परिसरों में अक्षय ऊर्जा के उपयोग का यह एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। उपराष्ट्रपति द्वारा दिया गया पीएम सूर्य घर एक्सीलेंस अवॉर्ड इसी दिशा में रेलवे के प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता है।
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