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CBRN आपदाओं को लेकर NDRF अलर्ट, DG पीयूष आनंद ने दिया बड़ा संदेश
Ratna Netam
5 Nov 2026 4:47 PM IST

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गाजियाबाद। देश में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने संयुक्त प्रशिक्षण और विभिन्न आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है। एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद ने कहा कि बदलते समय में आपदाओं की प्रकृति अधिक जटिल होती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में केवल आधुनिक उपकरण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रशिक्षित जवानों, प्रभावी रणनीति और विभिन्न एजेंसियों के आपसी तालमेल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।महानिदेशक पीयूष आनंद ने यह बात गुरुवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ की आठवीं वाहिनी में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) सीबीआरएन प्रतियोगिता-2026 के समापन समारोह में कही। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य राज्य आपदा मोचन बलों के जवानों की तकनीकी दक्षता, आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न परिस्थितियों में समन्वय स्थापित करने की योग्यता का आकलन करना था।
कार्यक्रम में महानिदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि किसी बड़ी आपदा के दौरान राष्ट्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इसके लिए संयुक्त अभ्यास, नियमित प्रशिक्षण और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रभावी तैयारी से आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम करने में सहायता मिल सकती है।सीबीआरएन का अर्थ केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर यानी रासायनिक, जैविक, विकिरण संबंधी और परमाणु खतरे हैं। सामान्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में इन परिस्थितियों में बचाव कार्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई बार खतरनाक पदार्थ दिखाई नहीं देते, लेकिन उनके संपर्क में आने से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।रासायनिक आपदा की स्थिति में किसी औद्योगिक संयंत्र से जहरीली गैस का रिसाव, खतरनाक रसायनों का फैलाव या परिवहन के दौरान रसायनों से जुड़ी दुर्घटना जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। जैविक आपात स्थिति में संक्रमण फैलाने वाले कारकों का खतरा हो सकता है। इसी तरह रेडियोलॉजिकल और परमाणु घटनाओं में विकिरण के संपर्क से बचाव, प्रभावित क्षेत्र की पहचान और सुरक्षित निकासी जैसे कार्य महत्वपूर्ण होते हैं।
ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा उपकरण, खतरे की पहचान करने वाली तकनीक, प्रशिक्षित चिकित्सा दल और नियंत्रित तरीके से राहत एवं बचाव अभियान चलाने की आवश्यकता होती है। इसीलिए एनडीआरएफ विभिन्न राज्य आपदा मोचन बलों को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।गाजियाबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का शुभारंभ दो नवंबर को हुआ था। इसमें आठ राज्यों की एसडीआरएफ टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान जवानों की तकनीकी जानकारी, सुरक्षा प्रक्रियाओं की समझ, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और टीम के रूप में काम करने की दक्षता को परखा गया। इसके माध्यम से अलग-अलग राज्यों की टीमों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।प्रतियोगिता में तमिलनाडु की एसडीआरएफ टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। उत्तराखंड की टीम दूसरे और बिहार की टीम तीसरे स्थान पर रही। समापन समारोह में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को सम्मानित किया गया। इस तरह की प्रतियोगिताओं को जवानों के कौशल में सुधार और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का मूल्यांकन करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
एनडीआरएफ महानिदेशक ने राज्य आपदा मोचन बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संकेत दिया कि एनडीआरएफ विभिन्न राज्यों की एसडीआरएफ टीमों को सीबीआरएन आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराएगा। इससे राज्यों में मौजूद आपदा प्रतिक्रिया टीमों की तकनीकी क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गंभीर आपदा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण समय घटना के तुरंत बाद का होता है। यदि बचाव दल समय पर घटनास्थल पहुंच जाए और खतरे की सही पहचान कर सके, तो प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। हालांकि, सीबीआरएन जैसी घटनाओं में बिना उचित सुरक्षा के बचाव कार्य करना राहतकर्मियों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।इसी वजह से ऐसे अभियानों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का सही इस्तेमाल, प्रभावित क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षित निकासी और दूषित व्यक्तियों या उपकरणों को संक्रमणमुक्त करने जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन प्रक्रियाओं का नियमित अभ्यास करने से जवानों को वास्तविक आपदा के समय सही निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
देश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बड़े औद्योगिक क्षेत्रों, परिवहन केंद्रों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों में किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों का तैयार रहना जरूरी है।एनडीआरएफ के साथ राज्य आपदा मोचन बल, अग्निशमन सेवाएं, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन भी आपातकालीन प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन एजेंसियों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां और नियमित संवाद होने से राहत कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है।केंद्र सरकार भी सीबीआरएन आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास पर काम कर रही है। इसी वर्ष मई में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने दिल्ली में सीबीआरएन फील्ड ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर की शुरुआत की थी। इस केंद्र का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों के कर्मियों को विशेष परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्रदान करना और आपातकालीन प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ाना है।
एनडीआरएफ की प्रशिक्षण व्यवस्था में भी राज्य आपदा मोचन बलों, नागरिक सुरक्षा संगठनों और अन्य संबंधित एजेंसियों के लिए विभिन्न पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में खोज एवं बचाव, प्राथमिक चिकित्सा, आपदा प्रतिक्रिया और सीबीआरएन जैसी विशेष परिस्थितियों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।गाजियाबाद में आयोजित प्रतियोगिता के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आपदा प्रबंधन में तकनीकी दक्षता के साथ सामूहिक तैयारी भी आवश्यक है। नियमित संयुक्त अभ्यास से विभिन्न एजेंसियां एक-दूसरे की क्षमताओं और सीमाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं।महानिदेशक पीयूष आनंद का जोर इसी बात पर रहा कि आपदा के समय सभी संबंधित बल एक समन्वित टीम के रूप में कार्य करें। एनडीआरएफ की इस पहल से राज्य स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने और संभावित सीबीआरएन घटनाओं के दौरान अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
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