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भारतीय सेना होगी और ताकतवर राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में की अहम बैठक

Ratna Netam
3 Nov 2026 3:14 PM IST
भारतीय सेना होगी और ताकतवर राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में की अहम बैठक
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जैसलमेर : 3 नवंबर 2026। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य विषय ‘भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण’ रहा। इसमें देश की सुरक्षा जरूरतों, सेना की भविष्य की चुनौतियों, स्वदेशी रक्षा उपकरणों और नई सैन्य तकनीकों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित जैसलमेर में इस बैठक का आयोजन सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो दिवसीय दौरे पर सोमवार, 2 नवंबर को जैसलमेर पहुंचे थे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैठक का आयोजन होटल फोर्ट राजवाड़ा में किया गया। रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श करना और नीतिगत प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझना है।इस बार बैठक का केंद्र भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने पर रहा। रक्षा क्षेत्र में तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए आधुनिकीकरण को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
भारत की सुरक्षा जरूरतें अब केवल पारंपरिक हथियारों और सैन्य संसाधनों तक सीमित नहीं हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों और उन्नत निगरानी उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना आवश्यक माना जा रहा है।बैठक के एजेंडे में स्वदेशी रक्षा उपकरणों के बढ़ते उपयोग और उभरती सैन्य तकनीकों का विषय शामिल था। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का उद्देश्य विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करने के साथ देश में आधुनिक रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करना भी है।भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उत्पादन में स्वदेशी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका लक्ष्य ऐसी रक्षा औद्योगिक क्षमता विकसित करना है, जिससे सेना की जरूरतों के अनुरूप उपकरण देश में ही बनाए जा सकें।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक महत्वपूर्ण पहलू सैन्य उपकरणों की समय पर उपलब्धता भी है। किसी आपात स्थिति या संघर्ष के दौरान हथियारों, गोला-बारूद, कलपुर्जों और तकनीकी सहायता की निरंतर आपूर्ति सेना की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय ने हाल के समय में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 अक्टूबर 2026 को करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति प्रदान की थी। इन प्रस्तावों में निगरानी ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक हथियार प्रणालियां और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। हालांकि यह खरीद प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है और इसे अंतिम खरीद अनुबंध नहीं माना जाना चाहिए।जैसलमेर में आयोजित बैठक को पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्थान का यह सीमावर्ती क्षेत्र भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारियों में विशेष स्थान रखता है। रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य अभियानों की प्रकृति अन्य भौगोलिक क्षेत्रों से अलग होती है। यहां अत्यधिक तापमान, लंबी दूरी, सीमित जल संसाधन और कठिन परिस्थितियों के बीच सैन्य गतिविधियों को संचालित करना पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों में आधुनिक निगरानी उपकरण, सुरक्षित संचार व्यवस्था, तेज परिवहन और मजबूत सैन्य बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीमावर्ती इलाकों में सड़क संपर्क और रसद आपूर्ति बेहतर होने से सैनिकों तथा सैन्य संसाधनों की आवाजाही में सुविधा मिलती है।भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण का एक प्रमुख उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। आधुनिक सैन्य अभियानों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त कार्यक्षमता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।इसी दिशा में जून 2025 में रक्षा मंत्री ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सैन्य मामलों के विभाग को तीनों सेनाओं के लिए संयुक्त निर्देश तथा आदेश जारी करने का अधिकार दिया था। इस निर्णय का उद्देश्य सैन्य व्यवस्थाओं में बेहतर तालमेल और प्रशासनिक एकरूपता को बढ़ावा देना था।इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम कर रहा है। मार्च 2026 में राजनाथ सिंह ने ‘डिफेंस फोर्सेज विजन 2047’ नामक दस्तावेज जारी किया था। इसमें भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण, नवाचार, उन्नत तकनीक और आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक सैन्य शक्ति का आकलन केवल हथियारों की संख्या से नहीं किया जा सकता। प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी दक्षता, खुफिया जानकारी, साइबर सुरक्षा और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।इसके साथ ही आधुनिक उपकरणों के संचालन और रखरखाव के लिए सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण देना आवश्यक है। नई तकनीकों को सैन्य व्यवस्था में शामिल करने के साथ प्रशिक्षण प्रणालियों में बदलाव करना भी एक बड़ी चुनौती है।जैसलमेर की बैठक ऐसे समय आयोजित की गई है, जब दुनियाभर में सैन्य तकनीकों और युद्ध के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने ड्रोन, मिसाइल रक्षा प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों के महत्व को और स्पष्ट किया है।भारत के लिए इन बदलावों का अध्ययन करना और अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार सैन्य क्षमताएं विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही देश में रक्षा अनुसंधान, स्वदेशी निर्माण और अत्याधुनिक उपकरणों के विकास को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक माना जा रहा है।रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की यह बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करती है। हालांकि बैठक में लिए गए किसी विशिष्ट नए निर्णय या स्वीकृत परियोजना का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन निर्धारित एजेंडे से स्पष्ट है कि भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और भविष्य की सैन्य तैयारियां चर्चा के केंद्र में रहीं।
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