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भारत-रूस ने कृषि, व्यापार और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा
SHIDDHANT
26 Sept 2025 11:23 PM IST

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Delhi दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को रूस के उपप्रधानमंत्री दिमित्री पात्रुशेव से नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में मुलाकात की। इस दौरान रूस के उप कृषि मंत्री सहित प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित रहा। इस बैठक में कृषि, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि रूस के उपप्रधानमंत्री और उनकी पूरी टीम के साथ अत्यन्त सौहार्दपूर्ण एवं सार्थक बैठक हुई। हमने कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करने और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। भारत के आलू और अनाज को रूस में प्रवेश मिले, उसके लिए चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि हमारे मत्स्य क्षेत्र जिसमें निर्यात की काफी संभावनाएं हैं, हमने उस पर भी चर्चा की है। पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात और रूस के बाजार में हमारी पहुंच बने, इस पर भी बातचीत हुई। मुझे विश्वास है कि फाइटो-सेनेटरी मानक और नॉन टैरिफ बाधाओं से जुड़े मामलों का शीघ्र ही समाधान होगा। हमने शोध और नवाचार पर भी बात की। आईसीएआर और उसके समकक्ष संस्था के बीच व्यापक सहयोग पर चर्चा जारी है ताकि हम आपस में विज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान कर सकें। इन विषयों पर बहुत सकारात्मक दृष्टिकोण से बातचीत हुई है।
शिवराज सिंह ने कहा कि भारत के विद्यार्थियों के रूस में अध्ययन और रूस के विद्यार्थियों के भारत के कृषि संस्थानों में अध्ययन को लेकर भी बातचीत हुई और इस पर सहमति बनी। रूस ने चार भारतीय विद्यार्थियों को निशुल्क पढ़ने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी दिया है। भारत में भी फेलोशिप का लाभ रूस के छात्रों को भी मिलेगा। इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक-अकादमिक ही नहीं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा। उसके साथ बीज और कृषि तकनीक आधारित सामाधानों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
आखिर में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि रूस के समर्थन और सहयोग से व्यापार से जुड़े लंबित मुद्दों का निश्चित रूप से समाधान निकलेगा और इसका लाभ हमारे किसानों, उपभोक्ताओं और दोनों देशों के नागरिकों को मिलेगा। रूस और भारत की मित्रता, शांति और स्थिरता के लिए भी आवश्यक है। भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना है कि सारी दुनिया ही हमारा परिवार है। इसी भाव से हम अपने राष्ट्र हितों का संरक्षण करते हुए रूस के साथ व्यापार, नवाचार, खाद्य सुरक्षा व शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर रूप से मिलकर काम करेंगे।
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