- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- भविष्य की जंग के लिए...
दिल्ली-एनसीआर
भविष्य की जंग के लिए तैयार रहे भारत, रक्षा मंत्री ने दिया संदेश
Ratna Netam
23 Oct 2026 8:42 PM IST

x
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के वरिष्ठ कमांडरों से बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेना को वर्तमान चुनौतियों से निपटने के साथ अगले 20 से 30 वर्षों की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करनी होगी। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण और सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।
अगले 20 से 30 वर्षों की रणनीति तैयार करने पर जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य तकनीक में हो रहे बदलाव भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को अधिक जटिल बना रहे हैं।उन्होंने सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से कहा कि केवल मौजूदा खतरों का सामना करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों की संभावित चुनौतियों के लिए भी व्यापक तैयारी जरूरी है।रक्षा मंत्री ने अगले 20 से 30 वर्षों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही स्पष्ट किया कि भविष्य की योजनाएं बनाते समय वर्तमान सुरक्षा जरूरतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति में बदलाव जरूरी
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में सैन्य रणनीतियों को गतिशील और लचीला बनाए रखने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में भारतीय सेना को अपनी रणनीतियों और परिचालन तैयारियों में समय के अनुसार बदलाव करने में सक्षम होना चाहिए।रक्षा मंत्री के अनुसार, आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों और सैनिकों की संख्या पर निर्भर नहीं रह गए हैं। तकनीकी क्षमता, बेहतर समन्वय और तेजी से निर्णय लेने की योग्यता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।इसलिए सैन्य योजनाओं में ऐसी व्यवस्था विकसित करना जरूरी है, जिससे नई चुनौतियों का समय रहते प्रभावी जवाब दिया जा सके।
दिल्ली में तीन दिवसीय सेना कमांडरों का सम्मेलन
भारतीय सेना का सेना कमांडरों का सम्मेलन 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया।इस सम्मेलन की अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने की। इसमें सेना के वरिष्ठ कमांडरों और उच्च अधिकारियों ने भाग लिया।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस द्विवार्षिक सम्मेलन में बदलते सुरक्षा वातावरण, परिचालन तैयारियों, सैन्य क्षमता विकास और भविष्य के अनुरूप सेना के आधुनिकीकरण पर चर्चा की गई।सम्मेलन का उद्देश्य वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराना है।
आधुनिक युद्ध तकनीक पर सेना का ध्यान
सम्मेलन में आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव पर भी ध्यान केंद्रित किया गयाड्रोन युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालित हथियार प्रणालियां और सटीक हमले करने वाली तकनीकें आधुनिक सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।इन तकनीकों के कारण युद्धक्षेत्र में सैनिकों की तैनाती, निगरानी और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में बदलाव आ रहा है।भारतीय सेना भी भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार अपनी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने पर काम कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का उल्लेख
रक्षा मंत्री ने बदलती परिचालन परिस्थितियों के अनुसार भारतीय रक्षा बलों के अनुकूलन की सराहना की।उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक हथियारों के साथ नवीन सोच, बेहतर तालमेल और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच प्रभावी समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के सैन्य अभियानों में विभिन्न सेनाओं के बीच सहयोग और आधुनिक तकनीक का उपयोग निर्णायक महत्व रख सकता है।
सेना के लिए नई स्थल युद्ध रणनीति
तीन दिवसीय सम्मेलन का एक प्रमुख विषय भारतीय सेना का नया 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन' यानी स्थल युद्ध सिद्धांत भी रहा।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दस्तावेज का उद्देश्य भविष्य में युद्ध की बदलती प्रकृति और संभावित संघर्षों को देखते हुए भारतीय सेना की तैयारियों के लिए व्यापक रणनीतिक ढांचा प्रदान करना है।इसमें आधुनिक सैन्य तकनीक, परिचालन आवश्यकताओं और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सेना की क्षमताओं को विकसित करने की दिशा तय की जाएगी।
मजबूत और आधुनिक सेना बनाने पर सरकार का जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि सेना को अपनी परिचालन क्षमता, तकनीकी दक्षता और रणनीतिक तैयारियों को लगातार बेहतर बनाना होगा।भारत सरकार पहले से ही रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।सेना कमांडरों का यह सम्मेलन इन प्रयासों की समीक्षा करने और आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने का महत्वपूर्ण मंच है।रक्षा मंत्री के संदेश का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना को ऐसी आधुनिक, सक्षम और लचीली सैन्य शक्ति के रूप में विकसित करना है, जो वर्तमान खतरों का प्रभावी सामना करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए भी तैयार रहे।
Next Story





