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भारत न बांग्लादेश है न फ्रांस शशि थरूर का भाजपा पर पलटवार
Ratna Netam
19 Oct 2026 3:55 PM IST

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नई दिल्ली। देश में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत की तुलना बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना संवैधानिक अधिकार है और विपक्ष अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने में विश्वास करता है।
भारत की तुलना दूसरे देशों से करना गलत: थरूर
शशि थरूर ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक परिस्थितियां बांग्लादेश तथा फ्रांस से अलग हैं। उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें विपक्ष पर हिंसक प्रदर्शनों के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं से संविधान के अनुरूप काम करने की अपेक्षा करता है। उनका कहना था कि सरकार की आलोचना करना या चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार की मांग उठाना लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश नहीं है।थरूर ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से हमेशा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं और उनका मानना है कि विपक्ष भी इसी रास्ते का समर्थन करता है।
फ्रांस में हिंसा का समर्थन नहीं करता विपक्ष
फ्रांस में हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं को लेकर भारत में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि विपक्ष फ्रांस में बसों और पुलिस थानों में आग लगाने जैसी हिंसक गतिविधियों का समर्थन नहीं करता।उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक मांग को पूरा कराने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाना उचित नहीं है। विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन उनका स्वरूप शांतिपूर्ण होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लगाए थे आरोप
इस विवाद की शुरुआत केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद हुई। उन्होंने रविवार, 18 अक्टूबर को आरोप लगाया था कि कुछ विपक्षी नेता और भारत विरोधी तत्व युवाओं को भड़काकर देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैंरिजिजू ने दावा किया कि बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं की तरह भारत में भी अशांति पैदा करने की साजिश रची गई थी।उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता लोकतांत्रिक चुनाव हैं, न कि हिंसक आंदोलन। हालांकि, विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। कथित साजिश के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
SIR को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने
चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच लगातार विवाद जारी है।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार का हनन न हो।वहीं चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी है।शशि थरूर ने अपने एक लेख में भी कहा था कि मतदाता सूची से अपात्र और दोहरे नाम हटाना जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया कानूनी नियमों और उचित सत्यापन के आधार पर होनी चाहिए।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं के अस्तित्व को चुनौती नहीं दे रहा है, बल्कि उनसे संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा कर रहा है।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से काम करना आवश्यक है, ताकि नागरिकों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बना रहे।थरूर के अनुसार, लोकतंत्र किसी सरकार या राजनीतिक दल की देन नहीं है, बल्कि देश के नागरिक इसके वास्तविक संरक्षक हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का अधिकार है।
शांतिपूर्ण आंदोलन से अपनी बात रखेगा विपक्ष
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विरोध करना और चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की मांग करना विपक्ष की लोकतांत्रिक भूमिका का हिस्सा है।पार्टी का कहना है कि राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया से होकर गुजरना चाहिए। कांग्रेस ने हिंसा के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने संबंधी आरोपों को भी खारिज किया है।फिलहाल SIR और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। शशि थरूर के ताजा बयान के बाद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
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