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नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के नोटिस में उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उनसे 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानती क्यों न लिया जाए। बोरा ने इस नोटिस को अनुचित बताते हुए इसे रद्द करने और अपने खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।नेहा बोरा की याचिका में कहा गया है कि नोटिस अस्पष्ट तथ्यों और निराधार आशंकाओं पर आधारित है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि उनके कारण सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थी।
10 हजार रुपये के मुचलके पर उठाए सवाल
याचिका के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 126 और 130 के तहत उन्हें नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया था।बोरा ने अदालत से नोटिस और उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीएनएसएस की धारा 135(3) के तहत उनसे मुचलका भरवाने की प्रक्रिया का कोई उचित आधार नहीं बताया गया है।उनकी ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि इस प्रकार की कार्रवाई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करती है।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नोटिस 18 अक्टूबर को जारी किया गया था, जबकि याचिका में 17 अक्टूबर की तारीख का उल्लेख सामने आया है।
मंडी हाउस प्रदर्शन को लेकर विवाद
मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि नेहा बोरा ने मंडी हाउस में नारेबाजी की और निषेधाज्ञा के बावजूद विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों में भाग लिया।इसके अलावा, जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शनों और कनॉट प्लेस में लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया गया है।हालांकि, नेहा बोरा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि उन्होंने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा का आह्वान किया था।बोरा के मुताबिक, उन्हें मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था और जिस सभा में शामिल होने की उन्होंने अपील की थी, वह कनॉट प्लेस में आयोजित प्रदर्शन से अलग थी।
पुलिस कार्रवाई को बताया अनुचित
याचिका में दावा किया गया है कि अधिकारियों ने बिना पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराए उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी। बोरा का कहना है कि उन्हें वे दस्तावेज और आदेश भी उपलब्ध नहीं कराए गए, जिनके आधार पर शांति भंग होने की आशंका जताई गई थी।उन्होंने तर्क दिया कि संबंधित दस्तावेजों के अभाव में आरोपों का प्रभावी ढंग से जवाब देना मुश्किल है।आइसा की ओर से जारी बयान के मुताबिक, नोटिस संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन करता है। संगठन ने नोटिस पर तत्काल रोक लगाने और उसे वापस लेने की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई थीं बोरा
इससे पहले 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' विरोध मार्च से पहले नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।पुलिस के अनुसार, बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 17 अक्टूबर की सुबह रिहा कर दिया गया था।इस प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ भी बीएनएसएस की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल राहत की मांग
नेहा बोरा के वकीलों ने बताया कि अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया जा रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय दशहरा अवकाश के कारण 26 अक्टूबर तक बंद है। ऐसे में उनकी कानूनी टीम अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई का प्रयास कर रही है।वकीलों के अनुसार, बोरा की ओर से विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को बताया जाएगा कि वह नोटिस के तहत मुचलका भरने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारी के निर्णय के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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