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RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पर हाई कोर्ट सख्त काम में तेजी के निर्देश

Ratna Netam
25 Sept 2026 2:45 PM IST
RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पर हाई कोर्ट सख्त काम में तेजी के निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को जल्द से जल्द चालू करने की दिशा में अधिकारियों को विभिन्न प्रक्रियाएं तेज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने खास तौर पर 217 नए पदों पर भर्ती और आवश्यक मैनपावर की आउटसोर्सिंग के लिए टेंडर दस्तावेजों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से ब्लॉक को पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने नागरिक अधिकार समूह 'सोशल जूरिस्ट' की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पूरी तरह चालू नहीं होने के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में दायर जनहित याचिका के मुताबिक सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस ब्लॉक की योजना RML अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं और बेड की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि नए ब्लॉक के शुरू होने से अस्पताल की बेड क्षमता करीब 1,532 से बढ़कर 2,198 हो सकती है। यानी अस्पताल को लगभग 666 अतिरिक्त बेड मिलने की संभावना है।सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में 18 ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं और PET-CT सुविधा वाला एक समर्पित ऑन्कोलॉजी विभाग भी प्रस्तावित है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं वाले ब्लॉक को जल्द शुरू किया जाना चाहिए, ताकि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इसका फायदा मिल सके।
अदालत के समक्ष मैनपावर की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने आई है। ब्लॉक को संचालित करने के लिए डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इसी के मद्देनजर 217 नए पदों पर भर्ती से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। इसके साथ मैनपावर आउटसोर्स करने के लिए जरूरी टेंडर दस्तावेजों को भी जल्द अंतिम रूप देने का निर्देश दिया गया है।मामले की सुनवाई के दौरान अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर भी अदालत का ध्यान गया। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी CPWD की ओर से दिए गए कम्युनिकेशन में कहा गया कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की छत का इस्तेमाल किसी भी सार्वजनिक गतिविधि के लिए नहीं किया जाएगा। आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए फायर टॉवर की लिफ्ट और रैंप तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बाधा-मुक्त रखा जाएगा।
इसके अलावा फायर टॉवर-II की दो लिफ्ट को छत के स्तर तक बढ़ाए जाने की बात भी कही गई है। यह कदम आपात स्थिति में आवाजाही और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा है। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को शुरू करने में फायर सेफ्टी क्लियरेंस एक प्रमुख मुद्दा रहा है। इससे पहले दिल्ली फायर सर्विस ने मार्च 2026 में निरीक्षण के बाद 20 कमियां बताई थीं। बाद की कार्रवाई और निरीक्षण के बाद लंबित कमियों की संख्या घटकर तीन रह गई थी।दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त में भी CPWD को शेष अग्नि सुरक्षा कमियों को तत्काल दूर करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था। उस दौरान अदालत को बताया गया था कि अस्पताल की फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की अर्जी पहले 9 मार्च को 20 कमियां मिलने के बाद खारिज हुई थी। इसके बाद 4 जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया और 22 जुलाई को आवेदन फिर अस्वीकार हुआ। बाद में एक अगस्त को एक और निरीक्षण किया गया था।
जनहित याचिका में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को चालू करने में हो रही देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने सभी नियामकीय कमियां दूर करने, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करने तथा मेडिकल, नर्सिंग, तकनीकी और सपोर्ट स्टाफ की तैनाती के साथ सुविधा को पूरी तरह चालू करने की मांग की है।RML अस्पताल दिल्ली के प्रमुख केंद्र सरकार के अस्पतालों में शामिल है और यहां राजधानी के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में पहले से कार्डियोलॉजी, मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी, ट्रॉमा, सर्जिकल और अन्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। ([RML Hospital][5]) ऐसे में नए सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के शुरू होने से मौजूदा चिकित्सा ढांचे पर दबाव कम करने और विशेष इलाज की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।अब हाई कोर्ट ने भर्ती, आउटसोर्सिंग और ब्लॉक को कार्यात्मक बनाने से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं में तेजी लाने को कहा है। अदालत इस मामले में लगातार प्रगति की निगरानी कर रही है। अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों और आवश्यक प्रक्रियाओं की स्थिति के आधार पर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को पूरी तरह चालू करने की दिशा में आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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