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डिजिटल जांच में और मजबूत होगा ED NFSU के साथ नया समझौता
Ratna Netam
25 Sept 2026 2:33 PM IST

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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल जांच से जुड़ी अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ अगले पांच वर्षों के लिए नया मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) किया है। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में लंबे समय से जारी सहयोग को आगे बढ़ाएगा।ED के मुताबिक नया समझौता वर्ष 2021 में NFSU के साथ हुए पिछले MoA की अगली कड़ी है। पुराने समझौते के तहत NFSU ने एजेंसी की मौजूदा डिजिटल फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके तहत अलग-अलग स्थानों पर ED की साइबर फॉरेंसिक लैब को मजबूत करने के साथ गांधीनगर स्थित NFSU परिसर में भी एजेंसी के लिए नई साइबर लैब स्थापित की गई थी।
वर्ष 2021 के समझौते के तहत ED की सात साइबर लैब के लिए NFSU की ओर से तकनीकी मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रत्येक लैब के लिए एक रिपोर्टिंग ऑफिसर और दो टेक्निकल असिस्टेंट तैनात किए गए थे। इन प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल जांच के दौरान जब्त किए जाने वाले मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से महत्वपूर्ण डेटा निकालने और उसका विश्लेषण करने में किया जाता है।ED आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जब्त करता है। ऐसे उपकरणों में मौजूद डेटा जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करना जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुका है।
ED की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक साइबर लैब की व्यवस्था मजबूत होने से डिजिटल उपकरणों से डेटा निकालने में लगने वाला समय काफी कम हुआ। पहले इस प्रक्रिया में दो से छह महीने तक का समय लग सकता था, जबकि साइबर लैब की मदद से इसे घटाकर करीब चार से पांच दिन तक लाया गया। इससे डिजिटल साक्ष्यों की जांच और विश्लेषण की प्रक्रिया में तेजी आई।पिछले समझौते के तहत NFSU ने केवल लैब और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने में ही सहयोग नहीं किया, बल्कि ED द्वारा साइबर लैब के लिए फॉरेंसिक उपकरणों की खरीद से पहले तकनीकी सुझाव देने में भी भूमिका निभाई। इस व्यवस्था का उद्देश्य जांच में आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और उपयुक्त उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करना था।
अब पांच साल की पिछली अवधि पूरी होने के बाद दोनों संस्थानों ने सहयोग को अगले पांच वर्षों के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है। नए समझौते में साइबर फॉरेंसिक लैब, डिजिटल जांच, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे ED को तेजी से बदलती डिजिटल तकनीक और साइबर माध्यमों से जुड़े मामलों की जांच में विशेषज्ञ सहायता मिलती रहेगी।आज आर्थिक अपराधों में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, ई-मेल, मोबाइल कम्युनिकेशन और दूसरे डिजिटल डेटा जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। ऐसे में इनकी फॉरेंसिक जांच के लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरणों की जरूरत होती है।
NFSU फॉरेंसिक साइंस के साथ साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में विशेष शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है। केंद्र सरकार के अनुसार विश्वविद्यालय एडवांस DNA एनालिसिस, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल फॉरेंसिक, फॉरेंसिक साइकोलॉजी, नारकोटिक ड्रग्स एवं साइकोट्रॉपिक पदार्थों तथा बैलिस्टिक फॉरेंसिक जैसी आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रहा है।NFSU में साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फॉरेंसिक से संबंधित विशेष विभाग और शैक्षणिक कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के लिए डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर सिक्योरिटी, क्रिप्टोकरेंसी जांच और मोबाइल फॉरेंसिक जैसे विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
ED और NFSU के बीच नए पांच वर्षीय समझौते का मुख्य उद्देश्य पहले से स्थापित तकनीकी ढांचे और विशेषज्ञ सहयोग को जारी रखना है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच जांच एजेंसियों के सामने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से हासिल करने, उनका विश्लेषण करने और जांच में उपयोग करने की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में विशेष फॉरेंसिक विशेषज्ञता की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।नया MoA दोनों संस्थानों के बीच 2021 से जारी सहयोग को अगले चरण में ले जाएगा। पांच वर्षों के पिछले समझौते के दौरान विकसित साइबर फॉरेंसिक ढांचे के बाद अब नई अवधि में भी ED की डिजिटल जांच क्षमता को तकनीकी सहयोग मिलता रहेगा। इससे आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्यों की जांच को अधिक प्रभावी और तेज बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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