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राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Ratna Netam
16 Oct 2026 4:56 PM IST
राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
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प्रयागराज। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ सिख समुदाय को लेकर कथित विवादास्पद टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने तत्काल कोई आदेश जारी नहीं किया और अपना निर्णय सुरक्षित रखने की घोषणा की।यह मामला राहुल गांधी द्वारा सिख समुदाय को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी टिप्पणी आपत्तिजनक थी और इस संबंध में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने अभी इन आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की पीठ ने की सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे।याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से अधिवक्ता सत्येन्द्र कुमार त्रिपाठी अदालत में उपस्थित हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने रखा।करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर बहस हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सिख समुदाय के संबंध में ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि संबंधित आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।फिलहाल यह आरोप न्यायिक विचाराधीन हैं। अदालत ने अभी यह तय नहीं किया है कि प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए या नहीं।
वाराणसी की अदालत से खारिज हुई थी याचिका
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने पहले वाराणसी की अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वहां राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के माध्यम से वाराणसी की अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए न्यायिक निर्देश प्राप्त करना है।
BNSS की धारा 528 के तहत दाखिल की गई याचिका
यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई है।यह धारा हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों से संबंधित है। इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने या न्याय के उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य प्रश्न यह है कि निचली अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के आदेश में हस्तक्षेप करने का कानूनी आधार मौजूद है या नहीं।इस संबंध में अदालत का फैसला आने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सिख समुदाय पर कथित टिप्पणी से जुड़ा विवाद
राहुल गांधी की सिख समुदाय से संबंधित टिप्पणियों को लेकर पहले भी राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं।याचिकाकर्ताओं की आपत्ति उनके कथित बयान को लेकर है। इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक कार्रवाई की मांग उठाई है।हालांकि, किसी राजनीतिक बयान को लेकर आपत्ति जताया जाना और उसके आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने का न्यायिक निर्देश दिया जाना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।इसी वजह से हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
शुक्रवार की सुनवाई के बाद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं आया है।अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है और निर्णय सुनाने की तारीख की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।अब न्यायालय के आदेश से स्पष्ट होगा कि वाराणसी की अदालत का फैसला बरकरार रहेगा या मामले में किसी प्रकार के नए निर्देश जारी किए जाएंगे।फिलहाल राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग न्यायिक विचाराधीन है। याचिका पर फैसला सुरक्षित रखने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही मान लिया है।
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