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दिल्ली-एनसीआर
रोजाना 100 करोड़ का घाटा! दिल्ली के दुकानदारों ने लगाई गुहार
Tara Tandi
16 Oct 2026 4:51 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली के व्यापारियों और दुकानदारों ने शुक्रवार को चिंता जताई कि चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि त्योहारों के इस अहम सीजन में बाजारों में ग्राहकों की संख्या और बिक्री में भारी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों की तैनाती, सड़कों पर पाबंदियां और बाजारों में जाने को लेकर ग्राहकों के मन में डर ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
चूंकि कई व्यवसायों की सालाना बिक्री का एक बड़ा हिस्सा अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीनों में होता है, इसलिए व्यापारियों का कहना है कि इन रुकावटों ने उनकी आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों ने बताया कि त्योहारों के लिए खरीदा गया सामान बिना बिका पड़ा है, जबकि बिजली के बिल और कर्मचारियों के वेतन जैसे खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
मीडिया ने खान मार्केट, कनॉट प्लेस और शंकर मार्केट के व्यापारियों और दुकानदारों से बात की, ताकि यह समझा जा सके कि विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों का उनके कारोबार पर क्या असर पड़ा है।
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहता ने बताया कि बाजार में ग्राहकों की संख्या असामान्य रूप से बहुत कम है।
उन्होंने कहा, "आप बाजार की हालत देख सकते हैं; आपको शायद ही चार ग्राहक घूमते हुए दिखेंगे। यह सब विरोध-प्रदर्शनों और पाबंदियों की वजह से हो रहा है। ग्राहक डरे हुए हैं और बाजार नहीं आ रहे हैं। दुकानदार बिक्री नहीं कर पा रहे हैं, सामान बिना बिका पड़ा है और उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।"
मेहता ने बताया कि व्यापारियों के लिए त्योहारों का यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन तीन महीनों में होने वाली कमाई से ही वे साल भर अपना कारोबार चला पाते हैं और अपने ऊपर निर्भर परिवारों का भरण-पोषण कर पाते हैं।
उन्होंने कहा, "इन महीनों में हम इतनी बिक्री कर लेते हैं कि साल भर अपना काम चला सकें और अपने कारोबार से जुड़े परिवारों का खर्च उठा सकें। लेकिन इन विरोध-प्रदर्शनों की वजह से हमारी बिक्री पर बुरा असर पड़ रहा है।"
प्रदर्शनों के समय पर चिंता जताते हुए, मेहता ने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस वजह के, खासकर त्योहारों के दौरान, ये विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं और त्योहारों का सीजन बर्बाद हो गया, तो वे सरकार से मुआवजे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेंगे।
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने दावा किया कि कनॉट प्लेस और उसके आसपास के व्यावसायिक इलाकों में कारोबारियों को हर दिन लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि नुकसान का असर कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, मोहन सिंह प्लेस, म्युनिसिपल मार्केट, शंकर मार्केट और आसपास के इलाकों तक फैल गया है।
भार्गव ने कहा, "हम सभी को अभी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह त्योहारों का सीजन है। हमने पहले ही स्टॉक खरीद लिया है और पैसा लगा दिया है, लेकिन हमें भारी नुकसान हुआ है। अगर हालात सामान्य नहीं हुए, तो हमारा नुकसान और बढ़ जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा कि व्यापारी चाहते हैं कि कामकाज सामान्य हो जाए, ताकि वे अपना निवेश वापस पा सकें और आगे होने वाले नुकसान को कम कर सकें। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि कनॉट प्लेस में विरोध-प्रदर्शन और पाबंदियां जारी रहें।
खुदरा दुकानों (रिटेल आउटलेट्स) में काम करने वाले कर्मचारी भी इसका असर महसूस कर रहे हैं। कनॉट प्लेस के एक स्टोर में असिस्टेंट मैनेजर, प्रीत ने बताया कि कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा है, जिससे स्टाफ के लिए सेल्स टारगेट पूरा करना मुश्किल हो गया है।
प्रीत ने कहा, "कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हमारा गुजारा करना मुश्किल हो गया है। ऊपर से, कंपनी हम पर सेल्स टारगेट पूरा करने का दबाव डाल रही है और पूछ रही है कि हम बिक्री क्यों नहीं कर पा रहे हैं।"
प्रीत ने बताया कि कर्मचारी अपने काम के घंटों का ज्यादातर समय बिना ग्राहकों के बिता रहे हैं। उन्होंने अपील की कि विरोध-प्रदर्शन और रास्ते बंद करने का सिलसिला खत्म होना चाहिए।
प्रीत ने कहा, "हम यहां आते हैं, खाली बैठे रहते हैं और बिना कोई काम किए चले जाते हैं। यहां लगभग कोई ग्राहक नहीं है। ऑफिस जाने वाले लोग तो आ-जा रहे हैं, लेकिन आम जनता का आना-जाना बिल्कुल नहीं है।"
कनॉट प्लेस के एक दुकानदार ने बताया कि पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी की वजह से लोग बाजार आने से कतरा रहे हैं। दुकानदार ने यह भी कहा कि मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों और निजी वाहनों की आवाजाही पर रोक के कारण ग्राहकों के लिए व्यावसायिक इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
वहीं, शंकर मार्केट के एक दुकानदार ने बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा रास्ते बंद किए जाने की वजह से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
दुकानदार ने कहा, "हमें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अगर रास्ते बंद रहेंगे, तो ग्राहक बाजार तक कैसे पहुंचेंगे? विरोध-प्रदर्शनों की वजह से हमारा खर्च बढ़ रहा है। पूरे बाजार पर बिजली के बिल और स्टाफ की सैलरी जैसे बढ़ते खर्चों का बोझ है। अगर कोई कारोबार नहीं हो रहा और ग्राहक नहीं आ रहे हैं, तो हम इन खर्चों को कैसे संभालेंगे?"
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