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साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड रोकने के लिए सरकार की नई पहल

Kavita2
28 July 2026 5:42 PM IST
साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड रोकने के लिए सरकार की नई पहल
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नई दिल्ली : देश में बढ़ते साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि सरकार ने 'इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन' (IDPIC) की स्थापना की है। इस संस्था का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम फ्रॉड से जुड़ी जानकारी और अलर्ट साझा करना है, ताकि धोखाधड़ी की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

वित्त मंत्री ने सदन में एक सवाल के जवाब में कहा कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक मजबूत और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से IDPIC का गठन किया गया है।

RBI के साथ सलाह-मशविरा कर बनाई गई संस्था

निर्मला सीतारमण ने बताया कि IDPIC का गठन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ परामर्श के बाद किया गया है। यह संस्था डिजिटल भुगतान प्रणाली में होने वाले संदिग्ध लेनदेन और संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर कार्रवाई करना होती है। कई बार अपराधी कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच तुरंत सूचना साझा करने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

रियल-टाइम जानकारी साझा करने पर जोर

IDPIC का मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड से संबंधित सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना होगा। इसके तहत बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में समय पर अलर्ट मिल सकेगा।

इस व्यवस्था से वित्तीय संस्थान संभावित धोखाधड़ी वाले लेनदेन की पहचान कर तुरंत कदम उठा सकेंगे। इससे ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित रखने और अपराधियों पर कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ बढ़ी चुनौतियां

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। UPI, मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन के विस्तार के साथ लोगों की निर्भरता डिजिटल माध्यमों पर बढ़ी है।

हालांकि, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के साथ साइबर अपराधियों ने भी धोखाधड़ी के नए तरीके अपनाए हैं। फर्जी कॉल, ऑनलाइन लिंक, नकली ऐप और पहचान चोरी जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

सरकार और वित्तीय संस्थान लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते रहे हैं, लेकिन साइबर अपराधों की जटिलता को देखते हुए तकनीकी स्तर पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बनी हुई है।

ग्राहकों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान और संस्थागत सहयोग को मजबूत किया जा रहा है।

IDPIC के माध्यम से सरकार का लक्ष्य वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि धोखाधड़ी की घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके।

बैंकिंग सिस्टम को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर फ्रॉड रोकने के लिए केवल अलग-अलग संस्थानों की कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं। अपराधी कई बार अलग-अलग बैंकिंग चैनलों और भुगतान प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सभी संस्थानों के बीच जानकारी साझा करना जरूरी है।

IDPIC जैसी व्यवस्था से बैंकों को संदिग्ध पैटर्न पहचानने और जोखिम वाले लेनदेन पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है।

आगे की रणनीति पर काम जारी

सरकार का कहना है कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं को सुरक्षित बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। आने वाले समय में साइबर सुरक्षा से जुड़े उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

IDPIC की स्थापना को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके जरिए सरकार और वित्तीय संस्थान मिलकर साइबर अपराधों को रोकने और आम लोगों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे।

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