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दिल्ली में हेपेटाइटिस मरीजों के लिए खुशखबरी अब आसान होगी जांच

Ratna Netam
17 Oct 2026 3:55 PM IST
दिल्ली में हेपेटाइटिस मरीजों के लिए खुशखबरी अब आसान होगी जांच
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों की जांच और उपचार सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार अब राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत उपलब्ध मॉलिक्यूलर टेस्टिंग मशीनों का इस्तेमाल हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों की जांच के लिए करने की योजना बना रही है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को समय पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराना, बीमारी की जल्द पहचान सुनिश्चित करना और मौजूदा स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।सरकार की योजना के तहत टीबी जांच में इस्तेमाल होने वाली ट्रूनेट मशीनों से हेपेटाइटिस संक्रमित मरीजों का वायरल लोड टेस्ट किया जाएगा। इससे मरीजों के उपचार की योजना तैयार करने और बीमारी की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में 85 ट्रूनेट मशीनों का होगा इस्तेमाल
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिल्ली में राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वर्तमान में 85 मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक मशीनें उपलब्ध हैं। सरकार इन मशीनों का उपयोग हेपेटाइटिस बी और सी की जांच संबंधी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए करना चाहती है।शुरुआती चरण में प्रत्येक जिले में एक ट्रूनेट प्लेटफॉर्म को वायरल लोड जांच के लिए निर्धारित करने की योजना है। हालांकि, इसके लिए संबंधित राज्य कार्यक्रम अधिकारी की सहमति आवश्यक होगी।इस व्यवस्था से नई मशीनें खरीदने की आवश्यकता कम हो सकती है और मौजूदा उपकरणों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हेपेटाइटिस जांच के लिए मंगाई जाएंगी विशेष चिप्स
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की जांच से संबंधित 2,500-2,500 ट्रूनेट टेस्टिंग चिप्स की मांग की है।इन चिप्स का उपयोग संबंधित संक्रमण की मॉलिक्यूलर जांच में किया जाएगा। इससे संक्रमित मरीजों में वायरस की मात्रा का पता लगाने में सहायता मिलेगी।वायरल लोड टेस्टिंग विशेष रूप से उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण होती है, जिनकी शुरुआती जांच में हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हुई है। चिकित्सक इसके परिणामों और अन्य स्वास्थ्य जांचों के आधार पर उपचार संबंधी निर्णय लेते हैं।
गर्भवती महिलाओं की जांच पर विशेष ध्यान
सरकार की व्यापक स्वास्थ्य जांच योजना में महिलाओं, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं पर ध्यान देने की बात कही गई है।हेपेटाइटिस बी का संक्रमण गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मां से शिशु तक पहुंच सकता है। इसलिए समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय देखभाल महत्वपूर्ण है।स्वास्थ्य विभाग की योजना का उद्देश्य जोखिम वाले मरीजों की पहचान करके उन्हें समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।दिल्ली में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी और सी की स्क्रीनिंग की व्यवस्था पहले से मौजूद है। प्रस्तावित पहल से जांच क्षमता को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
पोर्टेबल एक्स-रे सुविधाओं का भी होगा उपयोग
व्यापक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग योजना में पोर्टेबल एक्स-रे सुविधाओं का इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव है। इन उपकरणों की सहायता से विशेष रूप से टीबी और फेफड़ों से संबंधित संदिग्ध समस्याओं की पहचान में मदद मिल सकती है।हालांकि, एक्स-रे से हेपेटाइटिस बी या सी की पुष्टि नहीं होती। इन संक्रमणों की पहचान के लिए रक्त जांच और आवश्यकतानुसार मॉलिक्यूलर परीक्षण किए जाते हैं।इस तरह सरकार अलग-अलग स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच समन्वय स्थापित करके मरीजों तक जांच सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
जांच करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रयोगशाला तकनीशियनों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी योजना है।ट्रूनेट प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग संक्रमणों की जांच के लिए आवश्यक परीक्षण प्रक्रियाओं और गुणवत्ता मानकों का पालन करना जरूरी है।योजना के अंतर्गत तकनीशियनों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी शामिल है, ताकि जांच सेवाओं का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सके।
हेपेटाइटिस मरीजों के लिए पहले से उपलब्ध हैं उपचार केंद्र
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, लोकनायक अस्पताल में हेपेटाइटिस मरीजों के लिए एक मॉडल उपचार केंद्र संचालित है।इसके अलावा सात जिलों में आठ उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर हेपेटाइटिस बी और सी की स्क्रीनिंग तथा पात्र मरीजों को उपचार संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।सरकार की नई योजना से इन सेवाओं के साथ जांच सुविधाओं का समन्वय और बेहतर होने की उम्मीद है।
2030 तक हेपेटाइटिस नियंत्रण का राष्ट्रीय लक्ष्य
भारत सरकार ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2018 में की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हेपेटाइटिस संक्रमण की रोकथाम, जांच और उपचार को बढ़ावा देना है।देश ने वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।दिल्ली सरकार की प्रस्तावित पहल को इसी दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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