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FSSAI का बड़ा कदम शिशुओं के आहार में चीनी मिलाने पर लगेगी रोक

Ratna Netam
17 Oct 2026 3:31 PM IST
FSSAI का बड़ा कदम शिशुओं के आहार में चीनी मिलाने पर लगेगी रोक
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नई दिल्ली। देश में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्राधिकरण ने छह महीने तक की उम्र के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसी शर्करा मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 'खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026' का मसौदा जारी किया गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य शिशुओं को शुरुआती उम्र से ही अनावश्यक अतिरिक्त शर्करा के सेवन से बचाना और उनके पोषण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
छह महीने तक के बच्चों के भोजन में नहीं मिलेगी अतिरिक्त चीनी
FSSAI द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि जन्म से छह महीने तक की उम्र के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज नहीं मिलाया जाएगा।सुक्रोज सामान्यतः चीनी के रूप में जाना जाता है, जबकि फ्रुक्टोज एक प्रकार की सरल शर्करा है, जो प्राकृतिक रूप से फलों सहित कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होती है।प्रस्तावित नियम विशेष रूप से उत्पाद निर्माण के दौरान मिलाई जाने वाली इन दोनों शर्कराओं पर केंद्रित हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि शिशु आहार में प्राकृतिक रूप से मौजूद सभी प्रकार की शर्करा पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
मौजूदा नियमों में बदलाव करने की तैयारी
भारत में शिशु पोषण उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020 में व्यापक नियम लागू किए गए थे। इन नियमों में जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के लिए विभिन्न पोषण उत्पादों की संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी मानक निर्धारित किए गए हैं।वर्तमान नियमों के अनुसार, शिशु आहार में कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। सुक्रोज और फ्रुक्टोज का उपयोग कुछ निर्धारित परिस्थितियों में सीमित मात्रा में किया जा सकता है।अब FSSAI ने छह महीने तक के बच्चों के लिए तैयार उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं को मिलाने की अनुमति समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है।
शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
जीवन के शुरुआती छह महीने बच्चों के शारीरिक विकास और पोषण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शिशुओं की पोषण संबंधी आवश्यकताएं बड़े बच्चों और वयस्कों से अलग होती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश के अनुसार, अधिकांश शिशुओं को जन्म से छह महीने तक केवल स्तनपान कराया जाना चाहिए। जिन परिस्थितियों में स्तनपान संभव नहीं होता, वहां स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयुक्त शिशु फॉर्मूला का उपयोग किया जा सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में अनावश्यक अतिरिक्त शर्करा से बचना स्वास्थ्यप्रद खानपान की आदतें विकसित करने के लिहाज से उपयोगी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शिशु पोषण उत्पादों के मानकों को अधिक सख्त बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा असर
यदि प्रस्तावित संशोधन अंतिम रूप में लागू होता है, तो शिशु पोषण उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों की सामग्री और पोषण संरचना की समीक्षा करनी होगी।विशेष रूप से जन्म से छह महीने तक की उम्र के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने की अनुमति नहीं होगी।कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद निर्धारित पोषण और सुरक्षा मानकों का पालन करें। नए नियमों के लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी उत्पादों की निर्धारित मानकों के अनुरूप जांच करनी होगी।हालांकि, यह अभी केवल प्रस्तावित संशोधन है और इसे तत्काल लागू प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।
आम जनता से 60 दिनों के भीतर मांगे गए सुझाव
FSSAI ने मसौदे पर संबंधित पक्षों, खाद्य उद्योग, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित किए हैं।आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राजपत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव भेजे जा सकते हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर अंतिम नियमों पर निर्णय लिया जाएगा।सुझाव FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नई दिल्ली स्थित कार्यालय में या आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।
शिशुओं को सुरक्षित और संतुलित पोषण देने पर जोर
FSSAI की इस पहल को शिशु आहार की गुणवत्ता बेहतर बनाने और खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त शर्करा की मात्रा नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे बच्चों के लिए तैयार खाद्य पदार्थ उनकी उम्र और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप हों।नियामक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि संशोधन को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो छह महीने तक के शिशुओं के लिए बने उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा।
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