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भारत में बड़ा दांव लगाएगी GE Aerospace 2030 तक खर्च होगा दोगुना
Ratna Netam
12 Oct 2026 5:42 PM IST

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नई दिल्ली। वैश्विक एयरोस्पेस कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) ने भारत में अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि वह वर्ष 2025 से 2030 के बीच भारतीय सप्लायर्स पर अपने खर्च को लगभग दोगुना करने की योजना बना रही है। इस कदम का उद्देश्य भारत में विनिर्माण क्षमता, इंजीनियरिंग गतिविधियों और विमानन उद्योग से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। कंपनी की यह घोषणा ऐसे समय सामने आई है, जब भारतीय विमानन क्षेत्र में विस्तार और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।जीई एयरोस्पेस ने यह घोषणा अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की रिपोर्ट 'पावरिंग प्रोग्रेस: जीई एयरोस्पेस इकोनॉमिक इम्पैक्ट इन इंडिया' जारी होने के अवसर पर की। इस रिपोर्ट में पिछले चार दशकों के दौरान भारत के वाणिज्यिक विमानन, रक्षा, विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कंपनी के आर्थिक योगदान का आकलन किया गया है। रिपोर्ट का उद्देश्य भारत में कंपनी की गतिविधियों और उनसे जुड़े व्यापक आर्थिक प्रभाव को सामने लाना है।
2030 तक भारतीय सप्लायर्स पर खर्च बढ़ाने की तैयारी
जीई एयरोस्पेस ने वर्ष 2025 से 2030 के बीच भारतीय सप्लायर्स पर अपने खर्च को लगभग दोगुना करने की योजना बनाई है।कंपनी का यह कदम भारत में अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हैभारतीय सप्लायर्स पर खर्च बढ़ने से स्थानीय स्तर पर एयरोस्पेस उद्योग से जुड़े उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना बन सकती है।हालांकि, कंपनी की ओर से उपलब्ध जानकारी में मौजूदा खर्च की वास्तविक राशि या वर्ष 2030 तक प्रस्तावित कुल खर्च का आंकड़ा नहीं दिया गया है।इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय सप्लायर्स को कुल कितने मूल्य के नए ऑर्डर मिलने की संभावना है।कंपनी ने अपने बयान में खर्च को लगभग दोगुना करने के लक्ष्य पर जोर दिया है।
भारत की सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर
जीई एयरोस्पेस का उद्देश्य भारत में अपनी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाना है।एयरोस्पेस उद्योग में सप्लाई चेन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि विमान और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्माण में विभिन्न प्रकार के पुर्जों, तकनीकी सेवाओं और इंजीनियरिंग क्षमताओं की आवश्यकता होती है।कंपनी भारतीय सप्लायर्स पर खर्च बढ़ाकर अपनी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।इससे भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक एयरोस्पेस उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ाने के अवसर पैदा हो सकते हैं।हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में किन सप्लायर्स को ऑर्डर दिए जाते हैं और किस प्रकार के उत्पादों या सेवाओं की मांग बढ़ती है।
तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र को मिलेगा समर्थन
भारत का विमानन क्षेत्र जीई एयरोस्पेस की इस योजना का एक महत्वपूर्ण आधार है।कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारतीय सप्लायर्स पर खर्च बढ़ाने का उद्देश्य देश के तेजी से विकसित हो रहे एविएशन सेक्टर को समर्थन देना भी है।विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ विमान निर्माण, रखरखाव, इंजीनियरिंग और संबंधित औद्योगिक सेवाओं की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।ऐसे में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है।जीई एयरोस्पेस की योजना इसी औद्योगिक आवश्यकता से जुड़ी है।हालांकि, कंपनी ने इस घोषणा में किसी विशेष विमानन परियोजना या नए उत्पादन केंद्र के बारे में जानकारी नहीं दी है।
EY की रिपोर्ट में चार दशकों के योगदान का आकलन
जीई एयरोस्पेस की घोषणा के साथ अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट 'Powering Progress: GE Aerospace's Economic Impact in India' भी जारी की गई।इस रिपोर्ट में भारत में कंपनी की लगभग चार दशकों की गतिविधियों का आर्थिक आकलन किया गया है।रिपोर्ट मुख्य रूप से चार क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें वाणिज्यिक विमानन, रक्षा, विनिर्माण और इंजीनियरिंग शामिल हैं।इन क्षेत्रों में कंपनी की उपस्थिति और आर्थिक योगदान को समझने के लिए रिपोर्ट तैयार की गई है।इसका उद्देश्य यह बताना है कि जीई एयरोस्पेस की गतिविधियां भारतीय औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र से किस प्रकार जुड़ी रही हैं।हालांकि, उपलब्ध विवरण में रिपोर्ट के विशिष्ट आर्थिक आंकड़े या रोजगार से जुड़े निष्कर्ष साझा नहीं किए गए हैं।
वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में कंपनी की भूमिका
जीई एयरोस्पेस वैश्विक विमानन उद्योग में विमान इंजनों और संबंधित तकनीकों से जुड़ी प्रमुख कंपनियों में शामिल है।भारत में वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र का विस्तार कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार अवसर प्रस्तुत करता है।विमानन उद्योग में विमान इंजनों के अलावा रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सहायता जैसी सेवाओं की भी आवश्यकता होती है।इन गतिविधियों के लिए मजबूत औद्योगिक और इंजीनियरिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।EY की रिपोर्ट में भारत के वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में जीई एयरोस्पेस के आर्थिक योगदान का आकलन शामिल किया गया है।कंपनी की नई योजना भारतीय सप्लायर्स की भूमिका बढ़ाने पर केंद्रित है।
रक्षा क्षेत्र में भी आर्थिक योगदान का आकलन
EY की रिपोर्ट में भारत के रक्षा क्षेत्र में जीई एयरोस्पेस की गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।एयरोस्पेस तकनीक का उपयोग वाणिज्यिक विमानन के साथ रक्षा विमानन में भी होता है।रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमताओं, इंजीनियरिंग और विनिर्माण की विशेष आवश्यकताएं होती हैं।रिपोर्ट में पिछले चार दशकों के दौरान इस क्षेत्र में कंपनी के आर्थिक योगदान का मूल्यांकन किया गया है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी नए रक्षा समझौते, सैन्य उपकरण की खरीद या रक्षा उत्पादन से संबंधित अतिरिक्त घोषणा का उल्लेख नहीं है।इसलिए कंपनी की सप्लायर खर्च बढ़ाने की योजना को किसी विशेष रक्षा सौदे से जोड़ना उचित नहीं होगा।
मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग को लेकर संभावनाएं
भारत में विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र जीई एयरोस्पेस की आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।एयरोस्पेस उद्योग में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों, तकनीकी विशेषज्ञता और निर्धारित मानकों के अनुसार निर्माण की आवश्यकता होती है।भारतीय सप्लायर्स पर खर्च बढ़ाने की योजना से संबंधित कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर बन सकते हैं।इसके साथ ही इंजीनियरिंग सेवाओं और विनिर्माण क्षमताओं की मांग में भी वृद्धि की संभावना हो सकती है।हालांकि, वास्तविक प्रभाव कंपनी की खरीद योजनाओं, ऑर्डर के वितरण और सप्लायर्स की क्षमता पर निर्भर करेगा।कंपनी ने फिलहाल इस योजना के तहत संभावित रोजगार वृद्धि या नए सप्लायर्स की संख्या का कोई निश्चित आंकड़ा साझा नहीं किया है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्या मायने रखती है घोषणा?
जीई एयरोस्पेस की यह घोषणा भारतीय एयरोस्पेस सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।वैश्विक कंपनियों द्वारा स्थानीय सप्लायर्स से खरीद बढ़ाने पर घरेलू विनिर्माण गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है।इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने के अवसर मिल सकते हैं।हालांकि, ऐसे अवसरों का लाभ उठाने के लिए तकनीकी क्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर आपूर्ति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।कंपनी ने भारतीय सप्लायर्स पर खर्च लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह लक्ष्य पूरा होने की स्थिति भविष्य की कारोबारी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
अगले पांच वर्षों की योजना पर रहेगी नजर
जीई एयरोस्पेस की घोषणा के बाद अब वर्ष 2030 तक भारतीय सप्लायर्स पर होने वाले खर्च में वास्तविक वृद्धि महत्वपूर्ण होगी।कंपनी ने वर्ष 2025 को आधार बनाते हुए अगले पांच वर्षों में खर्च लगभग दोगुना करने की योजना सामने रखी है।EY की रिपोर्ट ने भारत में कंपनी की चार दशकों की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी है।इस पहल से यह संकेत मिलता है कि कंपनी भारतीय विमानन उद्योग और उससे जुड़े विनिर्माण तथा इंजीनियरिंग क्षेत्र को अपनी भविष्य की रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान दे रही है।आने वाले वर्षों में भारतीय सप्लायर्स को मिलने वाले ऑर्डर, आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार और कंपनी की वास्तविक खरीद गतिविधियां इस योजना की प्रगति को स्पष्ट करेंगी।
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