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कारोबार से निवेश तक BRICS बिजनेस फोरम में बड़ी चर्चा

Ratna Netam
11 Sept 2026 5:48 PM IST
कारोबार से निवेश तक BRICS बिजनेस फोरम में बड़ी चर्चा
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नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS Summit 2026 से पहले नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार को कूटनीतिक और कारोबारी गतिविधियां तेज हो गईं। BRICS Business Forum की बैठक जारी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के नेता और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का भी बिजनेस फोरम में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। मुख्य BRICS Leaders' Summit 12 और 13 सितंबर को आयोजित होगा।
BRICS Business Forum का फोकस सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर है। वैश्विक स्तर पर युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत ने BRICS देशों के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल तैयार करने पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी फोरम में कहा कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में कारोबार के लिए पूर्वानुमानित माहौल जरूरी है।
मोदी और पुतिन बिजनेस फोरम में मौजूद
BRICS Business Forum में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी खास मानी जा रही है।
इससे पहले दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। इसमें व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, उर्वरक, मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे, स्टील और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर फोकस रहा।
द्विपक्षीय बैठक खत्म होने के बाद मोदी और पुतिन INNOPROM प्रदर्शनी में भी शामिल हुए। इसके बाद पुतिन के BRICS Business Forum को संबोधित करने का कार्यक्रम है।
इस पूरे घटनाक्रम से भारत-रूस संबंधों के आर्थिक पहलू पर विशेष जोर दिखाई दे रहा है।
बिजनेस फोरम क्यों है महत्वपूर्ण?
BRICS को अक्सर वैश्विक राजनीतिक और कूटनीतिक मंच के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका एक बड़ा उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग मजबूत करना भी है।
BRICS Business Forum में सरकारों के साथ निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को भी अपनी प्राथमिकताएं और कारोबारी चुनौतियां सामने रखने का अवसर मिलता है।
भारत की कोशिश है कि BRICS देशों के बीच केवल सरकारी स्तर पर समझौते न हों बल्कि कंपनियों, स्टार्टअप, निवेशकों और उद्योग जगत के बीच भी सीधा संपर्क बढ़े।
इस बार का फोरम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS का विस्तार हो चुका है। समूह अब करीब आधी वैश्विक आबादी और क्रय शक्ति समता के आधार पर दुनिया की अर्थव्यवस्था के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत ने दिया भरोसेमंद कारोबार का मंत्र
BRICS Business Forum में भारत ने वैश्विक व्यापार की मौजूदा चुनौतियों के बीच एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिर और भरोसेमंद कारोबारी माहौल की जरूरत पर जोर दिया। उनका फोकस व्यापार और निवेश के लिए पारदर्शिता तथा पूर्वानुमानित व्यवस्था पर रहा।
भारत का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण कंपनियों और निवेशकों के सामने अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे में BRICS देश आपसी सहयोग के जरिए व्यापारिक जोखिम कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
सप्लाई चेन को मजबूत करना भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्टार्टअप के लिए बन सकता है बड़ा नेटवर्क
BRICS Summit 2026 में स्टार्टअप और इनोवेशन पर भी बड़ा फोकस है।
सदस्य देश BRICS Incubator Network को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य BRICS देशों के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर और संबंधित एजेंसियों को एक-दूसरे से जोड़ना है।
इसके साथ BRICS Startup Innovation Fund पर भी काम चल रहा है, जिसका लक्ष्य शुरुआती और विकास के चरण में मौजूद स्टार्टअप को सहयोग देना है।
अगर ये पहल ठोस रूप लेती हैं तो भारतीय स्टार्टअप के लिए BRICS देशों में निवेश और बाजार तक पहुंच के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
सप्लाई चेन पर भी बड़ा प्लान
कोविड महामारी और उसके बाद दुनिया में हुए युद्धों ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियां उजागर की हैं।
अब BRICS देश आपसी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहयोग मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework पर विचार हो रहा है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को ज्यादा लचीला तथा टिकाऊ बनाना है।
भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि देश खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है।
मोदी-पुतिन बैठक से व्यापार को संदेश
बिजनेस फोरम से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात ने भी आर्थिक सहयोग का स्पष्ट संदेश दिया।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। जुलाई 2026 में भारत के कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुंची थी।
लेकिन दोनों देश अपने आर्थिक रिश्तों को केवल तेल तक सीमित नहीं रखना चाहते।
मैन्युफैक्चरिंग, उर्वरक, रेलवे, स्टील और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
रूस भारत का पुराना रक्षा साझेदार भी है। ऐसे में रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।
पुतिन की मौजूदगी पर दुनिया की नजर
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है।
यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते बनाए रखे हैं।
भारत का रुख रहा है कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। 31 अगस्त को बिश्केक में मोदी-पुतिन मुलाकात के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसी रुख को दोहराया था। दोनों नेताओं ने तब राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संबंधों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
अब दिल्ली में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात ने इस संवाद को आगे बढ़ाया है।
ईरान के राष्ट्रपति भी फोरम में
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी भी BRICS Business Forum और Summit को महत्वपूर्ण बना रही है।
पेजेशकियन की यह राष्ट्रपति के रूप में पहली भारत यात्रा है। उनका प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन समेत दूसरे नेताओं के साथ BRICS Business Forum में शामिल होने का कार्यक्रम है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ईरान की भागीदारी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास नजर है।
भारत के ईरान के साथ पुराने आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से लेकर व्यापार तक कई क्षेत्रों में दोनों देशों के साझा हित मौजूद हैं।
BRICS का आर्थिक वजन बढ़ा
BRICS अब शुरुआती पांच देशों वाला समूह नहीं रह गया है।
विस्तार के बाद इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं और इसके अलावा पार्टनर देशों का भी बड़ा नेटवर्क बन रहा है। मुख्य सम्मेलन में विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
आर्थिक आकार बढ़ने के साथ BRICS के भीतर भी अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं।
कुछ सदस्य पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के विकल्प पर ज्यादा जोर देते हैं, जबकि भारत जैसे देश मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बदलने के बजाय उनमें सुधार और विकासशील देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की बात करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कह चुके हैं कि BRICS को वैश्विक संस्थाओं का स्थान लेने वाले संगठन के बजाय उनमें सुधार चाहने वाले मंच के रूप में देखा जाना चाहिए।
वैश्विक तनाव के बीच कारोबारी बैठक
इस बार BRICS Summit ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर दबाव में है।
यूक्रेन युद्ध जारी है और पश्चिम एशिया का संघर्ष तेल तथा समुद्री व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन परिस्थितियों में सुरक्षित व्यापार मार्ग और भरोसेमंद सप्लाई चेन का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।
इसीलिए BRICS Business Forum में कारोबार और निवेश की चर्चा केवल कंपनियों के मुनाफे तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध ऊर्जा सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, उत्पादन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर भी नजर
मुख्य BRICS Summit में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक होगी।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई द्विपक्षीय बैठकें निर्धारित हैं और शी जिनपिंग के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीत का कार्यक्रम है।
भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों के बीच व्यापार बहुत बड़ा है, लेकिन सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
इसलिए BRICS के मंच पर भारत-चीन संवाद के आर्थिक और रणनीतिक दोनों मायने होंगे।
भारत मंडपम बना ग्लोबल डिप्लोमेसी का केंद्र
11 से 13 सितंबर तक BRICS Business Forum और 18वें BRICS Leaders' Summit के कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में निर्धारित हैं। आयोजन में लगभग 30 सदस्य और पार्टनर देशों के नेताओं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों और कारोबारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना है।
इसी बड़े आयोजन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं।
12 और 13 सितंबर को मुख्य Leaders' Summit होने के साथ दिल्ली अगले दो दिनों तक वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी रहेगी।
बिजनेस फोरम से क्या निकल सकता है?
BRICS Business Forum से सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि राजनीतिक घोषणाओं को ठोस कारोबारी सहयोग में बदला जाए।
स्टार्टअप नेटवर्क, इनोवेशन फंड और सप्लाई चेन फ्रेमवर्क जैसी पहलों पर प्रगति होती है तो BRICS देशों के बीच आर्थिक संपर्क का नया ढांचा तैयार हो सकता है।
भारत के लिए इसका अर्थ भारतीय कंपनियों को बड़े उभरते बाजारों तक पहुंच, निवेश के नए स्रोत और मैन्युफैक्चरिंग के अवसर मिलना हो सकता है।
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ने BRICS Business Forum को और महत्वपूर्ण बना दिया है। मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय बैठक के तुरंत बाद आर्थिक मंच पर दोनों नेताओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि इस बार BRICS में व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन और नई आर्थिक साझेदारियों पर खास जोर रहने वाला है।
अब नजर बिजनेस फोरम में नेताओं के संबोधनों और उसके बाद सामने आने वाली घोषणाओं पर है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को मुख्य BRICS Leaders' Summit में आर्थिक मुद्दों के साथ वैश्विक संघर्ष, बहुपक्षीय व्यवस्था और ग्लोबल साउथ से जुड़े विषय केंद्र में रहेंगे।
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