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IRCTC ने बनाया नया रिकॉर्ड एक दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा ट्रेन टिकट

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले रेल टिकटों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग का नया रिकॉर्ड बनाया है। सात सितंबर 2026 को प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुल 20,06,353 आरक्षित टिकट बुक किए गए। आईआरसीटीसी के इतिहास में किसी एक दिन में ऑनलाइन बुक किए गए टिकटों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या बताई गई है।
आईआरसीटीसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अगले दिन यानी आठ सितंबर को भी बुकिंग का दबाव बना रहा। इस दिन यात्रियों ने 19,50,699 टिकट ऑनलाइन बुक किए। लगातार दो दिनों तक करीब 20 लाख टिकटों की बिक्री ने संकेत दिया कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर घर जाने वाले यात्रियों ने सीट सुनिश्चित करने के लिए एडवांस बुकिंग शुरू कर दी है।
वर्ष 2026 में दिवाली आठ नवंबर को मनाई जाएगी। त्योहार के आसपास देशभर में रेल यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए बड़े शहरों में रहने वाले लाखों लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने अपने घर जाते हैं। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और अन्य प्रमुख शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटों की मांग तेजी से बढ़ती है।
इस बार भारतीय रेलवे द्वारा एडवांस रिजर्वेशन पीरियड यानी एआरपी को 120 दिन से घटाकर 60 दिन किए जाने का असर भी बुकिंग के स्वरूप पर दिखाई दे रहा है। पहले यात्री चार महीने पहले आरक्षित टिकट बुक कर सकते थे, लेकिन अब उन्हें लगभग दो महीने पहले बुकिंग का अवसर मिलता है। इससे किसी प्रमुख त्योहार की यात्रा तारीख के लिए आरक्षण खुलते ही बड़ी संख्या में लोग एक साथ टिकट बुक करने का प्रयास कर रहे हैं।
आईआरसीटीसी के रिकॉर्ड के मुताबिक सात सितंबर को 20,06,353 टिकट बुक हुए, जबकि पिछले वर्ष त्योहारी सीजन के दौरान एक दिन में सर्वाधिक 18,40,203 टिकट बुक किए गए थे। इस हिसाब से नए रिकॉर्ड में पिछले उच्चतम आंकड़े की तुलना में 1,66,150 अधिक टिकट शामिल हैं। यह करीब नौ प्रतिशत की वृद्धि है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग अब भारतीय रेलवे की आरक्षण व्यवस्था का प्रमुख माध्यम बन चुकी है। रेलवे नेटवर्क पर होने वाली कुल आरक्षित टिकट बुकिंग में ऑनलाइन माध्यम की हिस्सेदारी लगभग 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका अर्थ है कि हर दस में से करीब नौ आरक्षित टिकट अब डिजिटल माध्यम से बुक किए जा रहे हैं। यात्रियों को टिकट के लिए स्टेशन स्थित आरक्षण केंद्र जाने की आवश्यकता लगातार कम हो रही है।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल एप के माध्यम से यात्री घर बैठे ट्रेन, सीट की उपलब्धता, किराया और यात्रा की तारीख देख सकते हैं। टिकट बुक होने के बाद उसकी डिजिटल प्रति मोबाइल पर उपलब्ध हो जाती है। यात्रा के दौरान यात्री वैध पहचान पत्र के साथ इलेक्ट्रॉनिक टिकट दिखा सकते हैं। इस सुविधा ने आरक्षण प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाया है।
त्योहारी सीजन में आरक्षण खुलते ही लोकप्रिय ट्रेनों की सीटें कुछ ही समय में भर जाती हैं। विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों के स्लीपर और वातानुकूलित श्रेणियों में भारी मांग रहती है। बड़ी संख्या में यात्री एक ही समय पर वेबसाइट या एप पर लॉगिन करते हैं, जिससे डिजिटल प्रणाली पर असाधारण दबाव पड़ता है। सात और आठ सितंबर के आंकड़ों ने आईआरसीटीसी के तकनीकी ढांचे की क्षमता की भी परीक्षा ली।
रिकॉर्ड ऑनलाइन बुकिंग के साथ यात्रियों के सामने प्रतीक्षा सूची की समस्या भी बनी रह सकती है। टिकटों की मांग उपलब्ध सीटों से अधिक होने पर वेटिंग टिकट जारी होता है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा की तारीख नजदीक आने तक टिकट के कन्फर्म होने का इंतजार करना पड़ता है। कई लोग विकल्प के रूप में दूसरी ट्रेन, अलग श्रेणी या आसपास के स्टेशन से टिकट तलाशते हैं।
त्योहारी भीड़ को संभालने के लिए रेलवे की ओर से आमतौर पर विशेष ट्रेनों का संचालन और नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने जैसे कदम उठाए जाते हैं। हालांकि किन मार्गों पर कितनी विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी, यह यात्रियों की मांग, उपलब्ध रैक और परिचालन क्षमता के आधार पर तय किया जाता है। रिकॉर्ड बुकिंग वाले मार्गों का विश्लेषण रेलवे को अतिरिक्त व्यवस्था तैयार करने में मदद कर सकता है।
एआरपी की अवधि कम होने से यात्रियों को अपनी यात्रा योजना जल्दी तय करने का समय घट गया है। पहले लोग चार महीने पहले टिकट बुक कर सकते थे, जबकि अब आरक्षण की तारीख खुलने का अधिक सावधानी से ध्यान रखना पड़ता है। लोकप्रिय मार्गों पर टिकट चाहने वाले यात्रियों के लिए बुकिंग शुरू होने का समय महत्वपूर्ण हो गया है।
ऑनलाइन मांग बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और फर्जी एजेंटों से सावधान रहना भी आवश्यक है। यात्रियों को टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप या अधिकृत एजेंटों के माध्यम से बुक करना चाहिए। सोशल मीडिया या संदेश के जरिए भेजे गए संदिग्ध लिंक पर लॉगिन विवरण, पासवर्ड, बैंक जानकारी और ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए।
अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए बड़ी संख्या में टिकट बुक करने वाले एजेंट सामान्य यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। रेलवे और संबंधित एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क पर निगरानी बनाए रखना जरूरी है, ताकि वास्तविक यात्रियों को उचित अवसर मिल सके। डिजिटल भुगतान असफल होने या टिकट जारी न होने की स्थिति में यात्रियों को आधिकारिक माध्यम से ही शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
आईआरसीटीसी का नया रिकॉर्ड भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं की स्वीकार्यता को भी दर्शाता है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने के साथ छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी ऑनलाइन आरक्षण का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे आरक्षण केंद्रों पर भीड़ कम करने में सहायता मिली है।
सात सितंबर को 20 लाख से अधिक और अगले दिन 19.50 लाख टिकटों की बुकिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि त्योहारी यात्रा के लिए मांग बहुत अधिक है। आने वाले दिनों में दिवाली और अन्य पर्वों की यात्रा तारीखों का आरक्षण खुलने पर बुकिंग का दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में यात्रियों के लिए समय पर योजना बनाना, टिकट की स्थिति नियमित रूप से जांचना और वैकल्पिक ट्रेनों पर नजर रखना उपयोगी होगा।





