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आर्टिकल 370 से नक्सलवाद तक, अमित शाह के 10 बड़े फैसले
Rajeshwari Nishad
22 Oct 2026 4:39 PM IST

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने कार्यकाल के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद, कानून व्यवस्था और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े कई बड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को निष्प्रभावी करने से लेकर भारतीय न्याय संहिता जैसे नए आपराधिक कानून लागू करने तक, केंद्र सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं। इसके अलावा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान तेज करने, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और साइबर अपराध से निपटने के लिए भी नई रणनीतियां अपनाई गई हैं। भाजपा इन कदमों को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताती है। हालांकि, कुछ फैसलों के संवैधानिक, राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी पहलुओं पर बहस भी हुई है।
अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला
अमित शाह के गृह मंत्री रहते सबसे चर्चित फैसलों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को निष्प्रभावी करना शामिल है। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को यह निर्णय लिया था।इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
सरकार का दावा है कि इस फैसले से क्षेत्र में विकास, निवेश और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिला है। हालांकि, राज्य का दर्जा समाप्त करने और फैसले के बाद लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक विरोध भी हुआ था।
तीन नए आपराधिक कानून लागू किए
देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बदलाव अमित शाह के कार्यकाल का एक अन्य महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए।इन कानूनों ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली।
सरकार का कहना है कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बनाना, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है। वहीं, कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने पुलिस शक्तियों और नए प्रावधानों को लेकर चिंता भी जताई है।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान
छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में केंद्र सरकार ने सुरक्षा अभियानों को तेज किया।अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई, विकास और पुनर्वास की संयुक्त रणनीति पर जोर दिया है।सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाने के साथ सड़क, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी प्राथमिकता दी।
मार्च 2026 में लोकसभा में गृह मंत्री ने दावा किया कि देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, स्थायी शांति के लिए प्रभावित क्षेत्रों में विकास और स्थानीय समुदायों का विश्वास बनाए रखना भी आवश्यक है।
ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त रणनीति
केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती माना है।अमित शाह के नेतृत्व में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।सरकार ने नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क और ड्रग्स से होने वाली अवैध कमाई पर कार्रवाई की रणनीति तैयार की है।
वर्ष 2026 से 2029 के लिए ड्रग्स नियंत्रण का नया रोडमैप भी सामने रखा गया है। इसमें खुफिया जानकारी, कार्रवाई, नशे की मांग कम करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई है।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करती रही है।इस रणनीति के तहत आतंकी संगठनों की गतिविधियों, वित्तीय नेटवर्क और संदिग्ध संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई।
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।सरकार का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में बेहतर जांच और एजेंसियों के समन्वय से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है।हालांकि, आतंकवाद विरोधी कानूनों के इस्तेमाल में नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पालन भी महत्वपूर्ण है।
पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने का फैसला
सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई और उससे जुड़े कई संगठनों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया था।
केंद्र सरकार ने संगठन पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और हिंसक नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए थे।इसके बाद विभिन्न एजेंसियों ने संगठन से जुड़े संदिग्ध लोगों और गतिविधियों की जांच की।
इस फैसले को सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया, जबकि प्रतिबंध से संबंधित आरोपों और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
नागरिकता संशोधन कानून लागू किया
नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए भी अमित शाह के कार्यकाल का बड़ा फैसला रहा है।यह कानून 2019 में पारित हुआ, जबकि इसके नियम मार्च 2024 में अधिसूचित किए गए।
इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए निर्धारित छह धार्मिक समुदायों के पात्र व्यक्तियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने की विशेष व्यवस्था की गई।
सरकार इसे धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले लोगों के लिए राहत बताती है। वहीं, विरोधी दलों और कुछ नागरिक संगठनों ने धर्म के आधार पर पात्रता तय करने पर सवाल उठाए।
साइबर अपराध रोकने के लिए नई पहल
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध भी बड़ी चुनौती बन गए हैं।केंद्र सरकार ने साइबर अपराधों की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
अमित शाह ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए पीड़ितों को त्वरित सहायता देने और अवैध धन के हस्तांतरण को रोकने की व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।इससे आम लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायत करने का एक संगठित माध्यम मिला है।
पूर्वोत्तर में शांति समझौतों पर जोर
पूर्वोत्तर राज्यों में लंबे समय से सक्रिय उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौतों को भी केंद्र सरकार ने प्राथमिकता दी।असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में विभिन्न समूहों के साथ समझौतों तथा पुनर्वास संबंधी पहलों को आगे बढ़ाया गया।
सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से कई क्षेत्रों में हिंसा कम करने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिली है।हालांकि, स्थायी शांति के लिए समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय समुदायों की समस्याओं का समाधान आवश्यक है।पुलिस और फॉरेंसिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर जोरनए आपराधिक कानूनों के साथ पुलिस जांच और फॉरेंसिक प्रणाली को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया गया है।
डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, वीडियो रिकॉर्डिंग और वैज्ञानिक जांच के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।इसके साथ ही पुलिसकर्मियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की पहल की गई है।सरकार का उद्देश्य अपराध की जांच को अधिक वैज्ञानिक बनाना और न्याय प्रक्रिया में देरी कम करना है।
देश की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ा असर?
अमित शाह के कार्यकाल में लिए गए इन दस प्रमुख फैसलों ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।भाजपा इन्हें मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा, बेहतर कानून व्यवस्था और आधुनिक न्याय प्रणाली की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है।
दूसरी ओर, विपक्ष और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इन फैसलों की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन उनके क्रियान्वयन, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर होना चाहिए।
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