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दिल्ली में लिफ्ट में फंसा पूर्व सांसद का परिवार, करीब एक घंटे बाद रेस्क्यू

Kavita2
1 Oct 2026 12:56 PM IST
दिल्ली में लिफ्ट में फंसा पूर्व सांसद का परिवार, करीब एक घंटे बाद रेस्क्यू
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में लिफ्ट संचालन में कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक पूर्व सांसद का परिवार करीब एक घंटे तक बंद लिफ्ट के अंदर फंसा रहा। घटना के बाद मौके पर पहुंची टीम ने काफी मशक्कत के बाद सभी लोगों को बाहर निकाला और स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल पहुंचाया। घटना में कुल छह लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से पांच को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक सदस्य का इलाज जारी है।

जानकारी के अनुसार पूर्व सांसद का परिवार एक इमारत की लिफ्ट में सवार हुआ था। इसी दौरान अचानक लिफ्ट रुक गई और अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके। शुरुआती प्रयासों के बावजूद लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला, जिससे अंदर मौजूद परिवार के सदस्यों की परेशानी बढ़ती गई।

लिफ्ट में फंसे लोगों ने मदद के लिए संपर्क करने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित टीम मौके पर पहुंची और लिफ्ट को खोलने का प्रयास शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अंदर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

लंबे समय तक बंद लिफ्ट में फंसे रहने के कारण कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद सभी छह लोगों को एहतियात के तौर पर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद पांच लोगों को छुट्टी दे दी, जबकि एक व्यक्ति को निगरानी और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती रखा गया है।

घटना के बाद लिफ्ट की तकनीकी स्थिति और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह जांच का विषय है कि लिफ्ट अचानक क्यों रुकी और आपातकालीन स्थिति में उसे तुरंत खोलने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम क्यों नहीं कर सकी।

ऐसे मामलों में लिफ्ट का नियमित रखरखाव, आपातकालीन अलार्म, इंटरकॉम और बैकअप सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इनमें से किसी व्यवस्था में खराबी हो तो लिफ्ट में फंसे लोगों के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है। खासकर लंबे समय तक बंद जगह में रहने से घबराहट, सांस लेने में परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी अन्य दिक्कतें हो सकती हैं।

पूर्व सांसद के परिवार से जुड़ा मामला सामने आने के बाद इमारत प्रबंधन की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है। यह देखा जाएगा कि लिफ्ट का आखिरी निरीक्षण कब हुआ था और उसकी सर्विसिंग नियमित रूप से की जा रही थी या नहीं।

घटना के समय लिफ्ट में कितने लोग मौजूद थे और उसकी निर्धारित क्षमता क्या थी, इसकी भी जांच की जा सकती है। हालांकि शुरुआती जानकारी में ओवरलोडिंग को लेकर कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आया है।

रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर पहले लिफ्ट की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद तकनीकी तरीके से दरवाजा खोलने और अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरी कार्रवाई में करीब एक घंटे का समय लगने की बात सामने आई है।

अंदर फंसे परिवार के लोगों के लिए यह समय बेहद तनावपूर्ण रहा। बंद लिफ्ट में लंबे समय तक रहने के कारण स्वाभाविक रूप से घबराहट की स्थिति बन सकती है। इसी कारण बाहर निकाले जाने के बाद सभी लोगों की मेडिकल जांच कराई गई।

अस्पताल में भर्ती एक सदस्य की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस तरह की स्वास्थ्य समस्या हुई, लेकिन एहतियात के तौर पर उनका उपचार जारी रखा गया है।

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को भी जानकारी दी गई। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लिफ्ट में आई खराबी तकनीकी थी या रखरखाव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

दिल्ली जैसे महानगर में बड़ी संख्या में लोग रोजाना बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में लिफ्ट सुरक्षा सीधे लोगों की जान से जुड़ा विषय है। समय-समय पर लिफ्ट के तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा उपकरणों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

कई इमारतों में बिजली बाधित होने की स्थिति में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस लगाए जाते हैं, जिससे लिफ्ट नजदीकी मंजिल पर जाकर खुल सके। इसके अलावा आपातकालीन घंटी और संचार व्यवस्था भी होनी चाहिए। इस घटना में ये व्यवस्थाएं किस स्थिति में थीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।

घटना के बाद संबंधित इमारत में लगी अन्य लिफ्टों की जांच भी कराई जा सकती है। यदि किसी तकनीकी कमी का पता चलता है तो मरम्मत और सुरक्षा परीक्षण के बाद ही दोबारा संचालन की अनुमति दी जा सकती है।

पूर्व सांसद के परिवार के एक घंटे तक फंसे रहने से मामला हाई प्रोफाइल बन गया है, लेकिन यह घटना आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल भी उठाती है। यदि लिफ्ट का रखरखाव समय पर न किया जाए तो छोटी तकनीकी खराबी भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पांच लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है और एक सदस्य का इलाज चल रहा है।

अब प्रशासन और संबंधित एजेंसी की जांच के बाद यह साफ होगा कि लिफ्ट क्यों रुकी और रेस्क्यू में इतना समय क्यों लगा। यदि रखरखाव या सुरक्षा नियमों में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा और नियमित तकनीकी जांच की जरूरत को रेखांकित किया है। फिलहाल परिवार के सदस्य सुरक्षित हैं और मामले की जांच जारी है।

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