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Gen Z पर सवाल उठाने वालों को जवाब पूर्व जज ने कही बड़ी बात

Ratna Netam
26 Aug 2026 6:01 PM IST
Gen Z पर सवाल उठाने वालों को जवाब पूर्व जज ने कही बड़ी बात
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दिल्ली : देश में युवाओं की भूमिका और लोकतांत्रिक आंदोलनों को लेकर बहस के बीच हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस **डॉ. एस. मुरलीधर** का बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने हालिया **Gen Z आंदोलनों** को भारतीय लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि युवा पीढ़ी को किसी भी तरह के लेबल या आरोपों से डराया नहीं जा सकता।
मुरलीधर ने कहा कि युवाओं की सक्रियता यह भरोसा दिलाती है कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों, भविष्य और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाने से पीछे नहीं हट रही है।
Gen Z के आंदोलन को बताया लोकतंत्र की ताकत
पूर्व जज एस. मुरलीधर ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि हालिया युवा आंदोलनों ने यह संदेश दिया है कि देश की नई पीढ़ी अपने विचारों को खुलकर रखने का साहस रखती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें नागरिकों का सवाल पूछना, अपनी असहमति दर्ज कराना और नीतियों पर चर्चा करना भी शामिल है।
उनके मुताबिक, जब युवा पीढ़ी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखती है तो यह लोकतंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है।
'दिमागी नक्सल' जैसे आरोपों से नहीं रुकेगी युवा आवाज
मुरलीधर ने युवाओं को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ राजनीतिक शब्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी युवा समूह को केवल नाम देकर या बदनाम करके उसकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि Gen Z प्रचार, बड़े-बड़े नारों और राजनीतिक दावों से प्रभावित होने के बजाय अपने सवालों के जवाब चाहती है। यह पीढ़ी तथ्यों और पारदर्शिता को महत्व देती है।
उनका कहना था कि युवा पीढ़ी सत्ता में बैठे लोगों से जवाब मांगने में संकोच नहीं करती और यही लोकतंत्र की असली ताकत है।
संविधान को बताया युवाओं का आधार
पूर्व जज ने कहा कि भारत का भविष्य तभी बेहतर होगा जब नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करने की पूरी आजादी मिले।
उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का अहम हिस्सा बताया और कहा कि सरकार की आलोचना को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
मुरलीधर के अनुसार, लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए क्योंकि सवाल और बहस ही व्यवस्था को बेहतर बनाते हैं।
सरकार की आलोचना को लेकर कही बड़ी बात
एस. मुरलीधर ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आलोचना और विरोध को देश विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों का सम्मान जरूरी है।
उन्होंने भविष्य के भारत की कल्पना करते हुए कहा कि ऐसा देश होना चाहिए जहां नागरिक बिना डर अपनी बात रख सकें।
युवाओं की बदलती सोच पर चर्चा
आज की Gen Z पीढ़ी सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए माध्यमों के जरिए अपनी राय तेजी से सामने रखती है।
यह पीढ़ी रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर ज्यादा जागरूक दिखाई देती है। राजनीतिक दल भी युवाओं की इस सक्रियता को गंभीरता से ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युवा मतदाता और युवा आंदोलन देश की राजनीति को काफी प्रभावित कर सकते हैं।
न्यायपालिका और लोकतंत्र पर भी रखी बात
पूर्व जज मुरलीधर ने न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को आम लोगों की पहुंच में रहना चाहिए और न्याय मिलने में देरी जैसी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है।
उन्होंने अदालतों के डिजिटलीकरण, लंबित मामलों और न्यायिक सुधारों पर भी बात की।
उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए केवल संस्थाओं का होना काफी नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी और निष्पक्ष तरीके से काम करना भी जरूरी है।
राजनीतिक माहौल में बयान के मायने
एस. मुरलीधर का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा तेज है।
जहां एक तरफ सरकारें युवाओं को विकास और अवसरों से जोड़ने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा संगठन कई मुद्दों पर अपनी मांगें और चिंताएं सामने रखते हैं।
मुरलीधर ने युवा आवाज को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि सवाल पूछना और अपनी राय रखना लोकतांत्रिक अधिकार है।
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