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नेपाल में भीषण बाढ़ से भारी नुकसान पीएम मोदी ने जताया दुख राहत और बचाव कार्य तेज

नई दिल्ली। चीन से सटे नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 300 से अधिक तीर्थयात्री और यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कम से कम 16 लोगों की मौत की आशंका जताई गई है।
नेपाल में पैदा हुए इस संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की और बाढ़ के कारण हुई जान-माल की क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और नेपाल के लोगों के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की।
नेपाल के सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। कई इलाकों में पानी का तेज बहाव और भूस्खलन लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना। सड़क संपर्क टूटने, बिजली व्यवस्था प्रभावित होने और कई क्षेत्रों में आवागमन बाधित होने की खबरें सामने आई हैं।
बाढ़ से यात्री और स्थानीय लोग प्रभावित
Spoke to Prime Minister Balendra Shah and conveyed condolences on the loss of lives due to the floods in Nepal. The people of India stand in solidarity with their sisters and brothers in Nepal at this difficult time.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
India is ready to provide all possible humanitarian…
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग फंस गए हैं। इनमें तीर्थयात्री और अन्य यात्री भी शामिल हैं, जो अलग-अलग स्थानों की यात्रा पर थे। अचानक आई आपदा के कारण कई लोगों का संपर्क टूट गया है और उनकी तलाश के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई हैं।
पीएम मोदी ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में हुई इस प्राकृतिक आपदा पर दुख जताते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने बाढ़ से हुई क्षति और प्रभावित लोगों की स्थिति की जानकारी ली।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावित लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच आपदा और संकट के समय सहयोग की परंपरा भी रही है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में राहत कार्यों के लिए स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और बचाव दल सक्रिय हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, घायलों को चिकित्सा सहायता पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।
भूस्खलन और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने से राहत दलों को पहुंचने में परेशानी हो रही है।
मौसम की मार से बढ़ी मुश्किलें
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान भारी बारिश आम बात है, लेकिन कई बार अचानक होने वाली अत्यधिक बारिश बड़े हादसों का कारण बन जाती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों के उफान से लोगों की जान को खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना और समय रहते चेतावनी प्रणाली को प्रभावी बनाना बेहद जरूरी है।
भारत की नजर नेपाल की स्थिति पर
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच भौगोलिक और सामाजिक संबंधों के कारण नेपाल की घटनाओं का असर सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
भारत और नेपाल के बीच पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहयोग होता रहा है। जरूरत पड़ने पर भारत की ओर से राहत सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
फिलहाल नेपाल प्रशासन लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटा है। आने वाले समय में मौसम की स्थिति और बचाव अभियान की प्रगति के आधार पर नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों की जरूरत को उजागर किया है।





