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खाने की तस्वीर से सियासत गरम राहुल गांधी के पोस्ट पर उठे सवाल

Ratna Netam
13 Sept 2026 5:05 PM IST
खाने की तस्वीर से सियासत गरम राहुल गांधी के पोस्ट पर उठे सवाल
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नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान खाने के मेन्यू को लेकर अब सियासी बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक पोस्ट ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। राहुल गांधी ने BRICS डिनर में परोसे गए शाकाहारी भोजन को लेकर टिप्पणी की और कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग नॉन-वेज खाना खाते हैं। उनके इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
मामला सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे संस्कृति, प्रतिनिधित्व और राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के खाने के मेन्यू से इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा हो गया?
क्या था राहुल गांधी का पोस्ट?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए भारतीय नॉन-वेज खाने की तारीफ की। उन्होंने लिखा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग नॉन-वेज भोजन करते हैं और भारतीय नॉन-वेज व्यंजन काफी स्वादिष्ट हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने खाने से जुड़ी एक तस्वीर भी साझा की।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी BRICS नेताओं के लिए आयोजित डिनर के बाद आई, जहां मेहमानों को शाकाहारी भोजन परोसा गया था। इसी को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत की विविध खान-पान संस्कृति को पूरी तरह दर्शाया गया।
BRICS डिनर से क्या है कनेक्शन?
दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता शामिल हुए। इस दौरान मेहमानों के लिए विशेष डिनर का आयोजन किया गया था, जिसमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए शाकाहारी मेन्यू रखा गया।
BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देश शामिल हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
लेकिन डिनर मेन्यू को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
राहुल गांधी के पोस्ट के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस खाने जैसी निजी पसंद की बात को भी राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मेहमानों के लिए मेन्यू तय करना आयोजन की व्यवस्था का हिस्सा होता है। इसे किसी राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं है।
कांग्रेस का क्या तर्क है?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का मुद्दा किसी भोजन की आलोचना करना नहीं था, बल्कि भारत की विविधता को सामने रखना था।
पार्टी का कहना है कि भारत में अलग-अलग राज्यों और समुदायों की खान-पान परंपराएं हैं और हर संस्कृति का सम्मान होना चाहिए।
भारत में खाने की संस्कृति कितनी विविध है?
भारत में भोजन की परंपरा बेहद विविध है। अलग-अलग राज्यों में लोगों की पसंद और खान-पान की आदतें अलग होती हैं।
दक्षिण भारत के समुद्री इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों और कई अन्य क्षेत्रों में नॉन-वेज व्यंजन लोकप्रिय हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी भोजन को भी प्राथमिकता देते हैं।
यही विविधता भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है।
क्या यह सिर्फ खाने का विवाद है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है। भारत में खान-पान कई बार पहचान और राजनीति से जुड़ जाता है।
किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान छोटी-सी बात भी राजनीतिक बहस का कारण बन सकती है, खासकर जब उसमें सरकार और विपक्ष के बड़े नेता शामिल हों।
BRICS जैसे मंच पर क्यों बढ़ी चर्चा?
BRICS सम्मेलन में दुनिया के कई प्रभावशाली नेता मौजूद थे। ऐसे में आयोजन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर देश और विदेश की नजर रहती है।
जहां सम्मेलन में शांति, व्यापार और वैश्विक सहयोग जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, वहीं डिनर मेन्यू को लेकर भारत में राजनीतिक बहस छिड़ गई।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
राहुल गांधी के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे भारतीय भोजन की विविधता का मुद्दा बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अनावश्यक राजनीतिक विवाद करार दिया।
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