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नई सड़कों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी FIR, प्रवेश वर्मा ने दी चेतावनी

Kavita2
7 Oct 2026 2:47 PM IST
नई सड़कों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी FIR, प्रवेश वर्मा ने दी चेतावनी
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नई दिल्ली। लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने साफ कहा है कि नई बन रही सड़कों को जानबूझकर उखाड़कर या किसी अन्य तरीके से नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और यदि कोई व्यक्ति या समूह तैयार हो रही सड़कों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जा रही है। किसी भी सड़क को केवल तय समय पर पूरा करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मानकों के अनुरूप हो और सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत सड़क निर्माण से जुड़े काम की जांच विभाग से अलग एजेंसियों के माध्यम से कराई जा सकती है, ताकि गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की लापरवाही या कमी छिपी न रह सके।

मंत्री के अनुसार सड़क निर्माण में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी भी तय है। यदि किसी परियोजना में घटिया सामग्री, निर्धारित मानकों की अनदेखी या निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

प्रवेश वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि एक तरफ सरकार सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर बड़ी राशि खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर नई सड़क को उखाड़ता है या नुकसान पहुंचाता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में केवल विभागीय शिकायत तक सीमित रहने के बजाय एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि सड़कें सार्वजनिक संपत्ति हैं और इन्हें नुकसान पहुंचाना केवल निर्माण कार्य को प्रभावित करना नहीं बल्कि सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे की बर्बादी भी है। इसलिए इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती जरूरी है।

नई सड़कों के निर्माण के दौरान अक्सर यह देखा जाता है कि काम पूरा होने के तुरंत बाद किसी अन्य एजेंसी की ओर से पाइपलाइन, केबल या अन्य कार्यों के लिए सड़क काट दी जाती है। इस तरह की स्थिति से सड़क की गुणवत्ता और आयु दोनों प्रभावित होती हैं। हालांकि मंत्री के बयान का फोकस विशेष रूप से जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वालों पर है।

लोक निर्माण विभाग के सामने यह भी चुनौती रहती है कि अलग-अलग एजेंसियों के काम के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए, ताकि नई बनी सड़क को बार-बार न खोदा जाए। इसके लिए निर्माण से पहले संबंधित विभागों के साथ समन्वय और भविष्य की जरूरतों का आकलन जरूरी माना जाता है।

प्रवेश वर्मा ने अधिकारियों से कहा है कि सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाए। परियोजना के अलग-अलग चरणों में गुणवत्ता की जांच हो और किसी तरह की कमी मिलने पर उसे तुरंत दूर कराया जाए।

थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था को भी इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क की मोटाई, इस्तेमाल की गई सामग्री, मजबूती और निर्माण प्रक्रिया तय तकनीकी मानकों के अनुरूप हो।

यदि स्वतंत्र जांच में किसी ठेकेदार या एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसमें भुगतान रोकने, जुर्माना लगाने या भविष्य के कामों से बाहर करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नागरिकों की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती हैं। कहीं नई सड़क पर जल्दी गड्ढे बनने की शिकायत होती है तो कहीं बारिश के बाद सड़क की परत उखड़ने की बात सामने आती है। ऐसे मामलों में विभागीय जांच और ऑडिट महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

प्रवेश वर्मा का कहना है कि सरकार का उद्देश्य राजधानी में बेहतर और टिकाऊ सड़क नेटवर्क तैयार करना है। इसके लिए केवल निर्माण की रफ्तार बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।

नई सड़क बनने के बाद उसकी सुरक्षा और रखरखाव भी विभाग की जिम्मेदारी है। यदि सड़क को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है तो उसकी मरम्मत पर दोबारा खर्च करना पड़ता है, जिसका सीधा असर सरकारी बजट पर पड़ता है।

इसी वजह से मंत्री ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कानूनी दबाव बनेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी स्थान पर नई सड़क को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आती है तो उसकी जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों को दी जाए। जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्र की पुलिस को भी सूचना दी जाएगी।

सड़क निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में अब दस्तावेजी रिकॉर्ड और मौके की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे बाद में यह पता लगाने में आसानी होती है कि सड़क का निर्माण किस स्थिति में हुआ था और नुकसान किस स्तर पर पहुंचा।

थर्ड पार्टी ऑडिट के माध्यम से निर्माण की गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सकेगा। यदि काम निर्धारित मानकों के अनुसार पाया जाता है तो ठेकेदार की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी, वहीं कमी मिलने पर तुरंत सुधार कराया जा सकेगा।

नई सड़कों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में एफआईआर दर्ज कराने का फैसला सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से भी जुड़ा है। सरकार का मानना है कि सड़क निर्माण पर खर्च होने वाली राशि जनता के पैसे से आती है और इसे नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर सार्वजनिक हित के खिलाफ है।

प्रवेश वर्मा ने यह भी संकेत दिया कि सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े कार्यों में जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे मौके पर जाकर काम की निगरानी करें और केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर न रहें।

दिल्ली में सड़क नेटवर्क की स्थिति लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। बारिश के दौरान गड्ढे, सड़क टूटने और अलग-अलग एजेंसियों द्वारा खुदाई जैसी समस्याओं को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं।

ऐसे में सरकार अब निर्माण गुणवत्ता और सड़कों की सुरक्षा दोनों पर एक साथ ध्यान देने की बात कर रही है। नई सड़कों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वालों पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

फिलहाल लोक निर्माण मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्माण की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट रहेगा और यदि कोई नई सड़क को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी

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